रामशरण जोशी

देश की राजनीति गटर बनती जा रही है। इसकी ताज़ा मिसाल मोदी-केजरीवाल जंग है।
देश के इतिहास में शायद यह पहली घटना है जब राजधानी दिल्ली के मुख्यमंत्री ने अपने ही देश के प्रधानमंत्री के सम्बन्ध में यह भय व्यक्त किया है कि वे उन्हें मरवा सकते हैं।
यह एक संगीन आशंका है, खोफनाक बयान है।
स्वाधीन भारत में इससे पहले ऐसा कभी किसी मंत्री ने प्रधानमंत्री को इस प्रकार से कठघरे में खड़ा नहीं किया।

मुख्यमंत्री की आशंका, भय के क्या आधार हैं, यह तो जाँच का विषय है।
इतना ज़रूर है कि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में मोदी-शाह जोड़ी बेहद विवादस्पद और डरावनी आशंकाओं से घिरी रही है। तहलका की पत्रकार की बहुचर्चित पुस्तक - गुजरात फाइल्स में काफी कुछ है। अभी तक इस पुस्तक के टेक्स्ट को किसी ने चुनोती नहीं दी है, यहाँ तक कि यह राष्ट्रीय जोड़ी भी खामोश है।

सबसे बड़ा मुद्दा है- ऐसा क्यों हो रहा है?
इस जंग से मोदी या केजरीवाल को कितना सियासी फायदा पहुंचेगा, यह तो वक़्त बतलायेगा। लेकिन लोकतंत्र के लम्पटीकरण की रफ़्तार और तेज हो जायेगी। क्या हम लोग इस खतरे को देख-समझ पा रहे हैं?
वरिष्ठ पत्रकार रामशरण जोशी की फेसबुक टाइमलाइन से साभार

Modi-Kejriwal war-politics is becoming the gutter