HamariRai |MannKiBaat |UNICEF| ModiInGujarat | 27 November 2017 | SoldChaiNotNation

मन की बात में प्रधानमंत्री मोदी कई बार बोल चुके हैं कि छोटे-छोटे बच्चों को भी देश की समस्याएं पता हैं और उन्हें भी देश की चिंता है. ये सही है कि आज के बच्चे पहले से ज्यादा जागरूक हैं और संवेदनशील भी। बच्चे कितने जागरूक हैं इसका अंदाज़ा हाल ही में किये गए एक सर्वे से लगाया जा सकता है..

जी हाँ, बच्चों के लिए काम करने वाली यूनाइटेड नेशन की संस्था यूनिसेफ ने एक सर्वे किया है, जिसमें बच्चों ने चौकाने वाली चिंताएं जाहिर की हैं. लगभग 95 फीसदी बच्चे आतंकवाद से चिंतित हैं और इसी तरह की फिक्र उन्हें गरीबी, अशिक्षा और सेहत को लेकर भी है। यूनिसेफ ने भारत समेत अमरीका, ब्रिटेन, जापान जैसे 13 देशों में एक आनलाइन सर्वे किया। जिसमें शामिल 9 से 12 साल के बच्चों में से 95 फीसदी बच्चों ने जहाँ आतंकवाद को लेकर चिंता जाहिर की तो वहीँ 48 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि उन्हें लगता है कि आतंकवाद का असर खुद उन पर भी पड़ सकता है।

आज की पीढ़ी को दुनिया भर के नेता विश्वशांति का पाठ पढ़ाते रहते हैं, लेकिन सच्चाई ये है कि व्यावहारिक तौर पर उन्हें हर ओर हिंसा और आतंक का खूनी खेल देखने को मिल रहा है। शायद ही कोई सप्ताह ऐसा बीतता हो, जब दुनिया में कोई आतंकी घटना न होती हो।

हाल ही में मिस्र में भयंकर आतंकी हमला हुआ। इराक, लीबिया, सीरिया, नाइजीरिया, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, इन तमाम देशों में तो हर दिन आतंकी हत्याएं होती हैं। इस लिस्ट में तो अब भारत का नाम भी जुड़ ही गया है, क्योंकि कश्मीर में हालात बेहद गंभीर हैं और नार्थ ईस्ट में स्थिति चिंताजनक है। नक्सल प्रभावित इलाकों में भी हालात अच्छे नहीं हैं।

देखा जाये तो भारत के अन्दर की समस्याओं को सुलझाने के लिए कोई ईमानदार कोशिश हो ही नहीं रही है। हमारे बच्चे देख रहे हैं कि हिंसा प्रभावित इलाकों के बच्चे कैसा नरक भुगत रहे हैं। अपने हम उम्र बच्चों की लहूलुहान तस्वीर देखकर उनके मासूम और कोमल मन पर कितना गहरा असर पड़ता है, यह हमें समझ नहीं आता, लेकिन बच्चे सेंसिटिव होते हैं>

यूनिसेफ के सर्वे से अब ये जगजाहिर है कि आतंकवाद बच्चों के दिलो-दिमाग पर भी असर डाल रहा है। बच्चों की दूसरी बड़ी चिंताएं शिक्षा, सेहत और गरीबी को लेकर है।

सर्वे में ये बात सामने आई है कि 96 प्रतिशत बच्चे अच्छी शिक्षा मिलने के बारे में सोचते हैं, जबकि 97 प्रतिशत बच्चे गरीबी को लेकर परेशान हैं, 94 प्रतिशत बच्चों की चिंता अच्छी स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर है। एक बेहतर जीवन के लिए इन बुनियादी बातों पर जब बच्चे फिक्रमंद हो सकते हैं, तो बड़ों की जिम्मेदारी निश्चित तौर पर बढ़ जाती है। वैसे सर्वे में 70 प्रतिशत बच्चों ने यकीन दर्शाया है कि विश्व नेता दुनिया भर के बच्चों के लिए अच्छे फैसले लेंगे। बच्चे चाहते हैं कि हमारे नेता सबसे पहले आतंकवाद, फिर गरीबी और शिक्षा की बदतर हालत के खिलाफ कदम उठाएं। 91 प्रतिशत बच्चों ने कहा कि अगर नेता बच्चों की बातों को सुनें तो यह दुनिया एक बेहतर जगह होगी। लेकिन जब हमारे घर और समाज में ही बच्चों को और उनकी बातों को तबज्जो नहीं दिया जाता है।

तो इस सर्वे का हमारे नेताओं पर क्या असर होगा ये सोचने वाली बात है.. क्या ये बेहतर न हो कि बच्चों को सीख देने की जगह समाज खुद अपने आचरण में सुधार करें, ताकि बच्चे खुद को सुरक्षित और अपने भविष्य को संरक्षित महसूस कर सकें। और दूसरी तरफ हर महीने रेडियो पर अपने मन की बात करने वाले मोदी जी क्या सचमुच बच्चों के मन की बात अब तक सुन पाए हैं?