मोदी दुनिया में घूम कर अपना समय काट रहे हैं, जानते हैं कि पैरों के नीचे से जमीन निकल गई है
मोदी दुनिया में घूम कर अपना समय काट रहे हैं, जानते हैं कि पैरों के नीचे से जमीन निकल गई है
मोदी दुनिया में घूम कर अपना समय काट रहे हैं, जानते हैं कि पैरों के नीचे से जमीन निकल गई है
“यह मूर्खमंडली का शासन है। विदेश नीति इन पांच सालों में कोई दिशा पकड़ने के बजाय एक वृत्त में घूम गई है। सार्क देशों से मित्रता के दिखावे के बाद ही सबसे वैर का पूरा दौर चला और अब अंत में फिर सबको पटाने में लग गये हैं। चीन के मामले में भी यही है। अपनी दबंगई को दिखाने इसराइल से बढ़ चढ़ कर दोस्ती की और दूसरे ही पल फिलिस्तीन से भी अपनी पुरानी दोस्ती के हवाले से संबंध बनाये रखने की जरूरत महसूस हुई।
अर्थनीति के क्षेत्र में ये तमाम प्रकार की वसूली बढ़ा कर लोगों की निजी खपत को दबा रहे हैं। फलत: सार्वजनिक व्यय में वृद्धि का अर्थ-व्यवस्था पर असर नहीं पड़ रहा है। मंदी और मुद्रा स्फीति दोनों साथ-साथ चल रहे हैं। बैंकों की हालत खराब है। सरकार ब्याज दरों में कमी चाहती है और बैंकें अपनी आमदनी को बनाये रखने के लिये बढ़ोतरी। ऐसे में मुद्रा नीति से ऋणों के बाजार को नियंत्रित किया जा रहा है। कोई साफ निर्देश न होने के कारण ऋणों का मसला पूरी तरह बैंक के अधिकारियों के निजी निर्णय का मसला बन गया है जो बड़े लोगों की जेब में बैठे हुए हैं। आज बैंकों का ऋण लोगों के लिये उपहार-स्वरूप है। डूबत का कोई ओर-छोर नहीं है।
ये मूर्ख शासक इस दुष्चक्र को देखने में अक्षम हैं। मोदी खुद दुनिया में घूम कर अपना समय काट रहे हैं। जानते हैं कि पैरों के नीचे से जमीन निकल गई है।”


