ये थर्ड फ्रंट (Third Front) इसलिये बनाया गया है ताकि वोटों का ध्रुवीकरण, (Polarization of votes) बना रहे और बीजेपी को फ़ायदा (Benefit to BJP) पहुँचे – निहाल उरूज

राजनीति में सब कुछ वो नहीं होता जो सामने से खेला जा रहा होता है,बहुत कुछ पर्दे के पीछे रचा जा रहा होता है।

किसी स्थानीय चुनाव का अध्ययन करेंगे तो आप पाएंगे कई ऐसे कई प्रत्याशी मैदान में होते हैं जिनका जीत से दूर दूर तक वास्ता नहीं होता,फिर ये क्यूँ खड़े होते हैं क्या इन्हें पैसा ख़र्च करने का शौक़ होता है ?

नहीं, ये खड़े किये जाते हैं यानी शतंरज की चाल की तरह मोहरे बिछाए गये होते हैं विरोधी वोटों के ध्रुवीकरण के लिए.

अब आइये मुद्दे की बात पर। कुछ लोग बसपा-सपा के गठबन्धन को लेकर अति उत्साहित हैं, जिससे काँग्रेस को अलग रखा गया है.

2014 का चुनावी परिणाम ये था 30%वोट एक मुश्त एक जगह गया था और 70% वोट बिखरा हुआ हुआ था, हालात आज भी वही हैं बीजेपी का जो 30 प्रतिशत वोट है वो न तो 28 हुआ है न 32 हुआ है।

सत्ताधारी पार्टी वही दोहराना चाहती है, क्योंकि अगर चुनाव् काँग्रेस और बीजेपी दो बैनर तले हुआ तो बीजेपी हारी हुई है.

बिहार चुनाव होते हैं समाजवादी पार्टी बैकडोर से बीजेपी की मदद करने जाती है, गुजरात में चुनाव होते हैं मायावती बीजेपी को मदद देती है।

किस मुँह से आप उत्तर प्रदेश में बीजेपी ख़िलाफ़ अपने गठबन्धन को पेश करते हो, ये थर्ड फ्रंट इसलिये बनाया गया है ताकि वोटों का ध्रुवीकरण बना रहे और बीजेपी को फ़ायदा पहुँचे

Nihal Urooj की कलम से

(निहाल उरूज भीमनगर जनपद के गुन्नौर के निवासी हैं, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं। बता दें गुन्नौर से समाजवादी पार्टी के अपदस्थ अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव विधायक रहे हैं।)

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