ये हैं आजादी के बाद के नेहरू-गाँधी खानदान के कांग्रेस के अध्यक्ष
ये हैं आजादी के बाद के नेहरू-गाँधी खानदान के कांग्रेस के अध्यक्ष
132 साल पुरानी कांग्रेस के युवा अध्यक्ष राहुल गांधी
आज युवा राहुल गांधी ने 132 साल पुरानी कांग्रेस की बतौर अध्यक्ष कमान संभाल ली है। 132 साल पहले जब भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की नींव पड़ी, तो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल, सुभाष चंद्र बोस, मोतीलाल नेहरू, मौलाना अबुल कलाम आज़ाद जैसे क्रांतिकारी वीरों ने पार्टी की जड़ों को मजबूत कर एक विशाल वृक्ष खड़ा किया। 1885 से लेकर 1947 के आजाद भारत तक इस पार्टी ने कई उतार चढ़ाव देखे...आजादी के बाद अंग्रेजों के दंश से देश को आगे निकालने के लिए पार्टी राजनीतिक राहों पर चल पड़ी... इसके बाद तो देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू से लेकर सोनिया गांधी तक के युग को इस पार्टी ने देखा...आइए जानते हैं...आजाद भारत में किस-किस ने संभाली पार्टी की कमान...
आजादी के बाद नेहरू-गाँधी खानदान के कांग्रेस के अध्यक्ष
President of Congress from Nehru-Gandhi dynasty after Independence
पण्डित जवाहरलाल नेहरू
वीओ- जब देश को आजादी मिली तो कांग्रेस देश की प्राण वायु बन चुकी थी। आजादी की लड़ाई के दौरान अनगिनत स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के बलिदान से देश की कमान कांग्रेस को मिली तो 1947 में आजाद भारत के पहले प्रधानमंत्री बनने के बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने देश के साथ-साथ पार्टी की कमान को भी बखूबी संभाला...उन्होंने 1954 तक पार्टी को मजबूती देने का काम किया...वैसे तो 1929 में ही वो पार्टी के अध्यक्ष बन चुके थे...लेकिन आजादी के बाद उन्होंने कांग्रेस को नया रूप दिया...
इंदिरा गांधी
नेहरु युग के बाद ये विरासत उनकी बेटी इंदिरा गांधी को मिली... पंडित जवाहरलाल नेहरु की मृत्यु के बाद 1959 में वो पार्टी की अध्यक्ष बनीं और धीरे-धीरे जैसे उन्होंने खुद की छवि गुंगी गुडिया से ऑयरन लेडी के रुप में बनाई वैसे ही पार्टी का भी कायाकल्प कर दिया... 31 अक्टूबर, 1984 तक अध्यक्ष रहीं इंदिरा गांधी ने अपने फैसला से नई दिशा दी... हालाँकि इंदिरा गांधी को कांग्रेस की सत्ता तश्तरी में सजा कर नहीं मिली थी।
राजीव गांधी
1984 में इंदिरा गांधी की मौत के बाद पार्टी की कमान ऐसे युवा चेहरे को मिली... जिसे राजनीति में ना रुचि थी...ना ही सियासत का कोई ज्ञान...लेकिन जब जिम्मेदारी पड़ी तो सियासत से कोसो दूर रहने वाले राजीव गांधी भी राजनीति की कटीली राहों पर चल पढ़े... और उन्होंने युवा चेहरों के साथ पार्टी में नया जोश भरा....संचार क्रांति लाने वाले राजीव गांधी पार्टी के लिए ऐसा चेहरा बन गए थे, जिसे युवा से लेकर बुजुर्गों तक सबने पसंद किया... उनके युग में कांग्रेस ने युवाओं का साथ देखा...1991 में एक आत्मघाती हमले में मारे जाने तक वे कांग्रेस के अध्यक्ष रहे।
सोनिया गांधी
राजीव गांधी की मौत कांग्रेस को लिए ऐसा सदमा था...जिसके बाद पार्टी डगमगा सी गई...उस वक्त राहुल गांधी बहुत छोटे थे...किसी को समझ नहीं आया कि...देश की सबसे पुरानी पार्टी की कमान किसको सौंपी जाए... फिर कांग्रेस ने विचार किया कि...पार्टी की जिम्मेदारियां क्यों ना राजीव गांधी की पत्नी सोनिया गांधी को दी जाए... लेकिन सोनिया गांधी विदेश से आईं थी...उन्हें ना हिन्दुस्तान के बारे में ज्यादा जानकारी थी...ना ही राजनीति के बारे में,,,इसीलिए उन्होंने ये जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठाने से इंकार कर दिया...लेकिन परिस्थितियां ऐसी बनीं कि..उन्हें पार्टी की विरासत को उठाने के लिए आगे आना ही पड़ा...1997 में कोलकाता में हुए कांग्रेस के अधिवेशन में उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ली। मार्च, 1998 को सोनिया कांग्रेस की अध्यक्ष चुनी गईं...अध्यक्ष बनने के बाद सोनिया गांधी को विरासत में चुनौतियां मिली...कांग्रेस का असतित्व डगमगा चुका था...लेकिन सोनिया गांधी ने हार नहीं मानी और वो धीरे-धीरे पार्टी को आगे ले जाती गईं...सोनिया गांधी की छवि भी इंदिरा की तरह ही बनने लगी थी...सोनिया गांधी के नेतृत्व में ही पार्टी ने 10 साल तक केंद्र की सत्ता पर राज किया...बीते नौ दिसंबर को सोनिया गांधी ने अपने जीवन के 71 साल पूरे किए। और लगातार 19 साल से अधिक समय तक पार्टी की अध्यक्ष बने रहने का रिकॉर्ड भी बनाया।
राहुल गांधी
सोनिया गांधी के बाद विरासत और पार्टी की कमान राहुल गांधी को सौंप दी गई है,,.राहुल गांधी 47 साल की उम्र में पार्टी के अध्यक्ष बने हैं.. राहुल... गांधी- नेहरू खानदान के अध्यक्ष बनने वाले छठे सदस्य हैं... चुनौतियों भरी जो विरासत सोनिया गांधी को मिली थी...उससे कहीं अधिक चुनौतियां अब राहुल गांधी को मिली हैं...ऐसे में अब देखना होगा कि...राहुल कैसे पार्टी का खोया हुआ जनाधार वापस लाते हैं और कांग्रेस को उसका खोया हुआ वैभव लौटाते हैं।


