राहुल गांधी की जासूसी - जेटली ने कहा कि कांग्रेस सुरक्षा के मुद्दे पर बेवजह राजनीति कर रही है
नई दिल्ली। सोमवार को लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही राहुल गांधी की जासूसी मामले को कांग्रेस ने मुद्दा बना दिया। इस मामले में कांग्रेस ने प्रश्नकाल के स्थगन का प्रस्ताव पेश किया, जिसे खारिज कर दिया गया। राज्यसभा में भी इस मुद्दे को उठाया गया, जिस पर सरकार की ओर से जवाब देते हुए वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि यह पुरानी कानूनी प्रक्रिया है और इसमें कोई नई बात नहीं है, राहुल गांधी की जासूसी मामले को लेकर राज्यसभा से कांग्रेस सांसदों ने सदन से वॉकआउट भी किया।
जेटली ने कहा कि कांग्रेस सुरक्षा के मुद्दे पर बेवजह राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि जासूसी चुपके से होती है न कि इसके लिए फॉर्म भराया जाता है। सरकार का बचाव करते हुए राज्यसभा में अरुण जेटली ने कहा कि ये एक रुटीन जांच थी और ये पुरानी प्रक्रिया है। कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते जेटली ने हुए कहा कि कई पूर्व प्रधानमंत्रियों और दूसरे बड़े नेताओं की इसी तरह जांच की गई है।
जेटली ने कहा कि ये रुटीन जांच बीते 8 महीने से नहीं शुरू हुई बल्कि कांग्रेस की सरकार में 526 वीवीआईपी से ये फॉर्म भरवाए गए थे। कांग्रेस के साथ- साथ जदयू और समाजवादी पार्टी ने भी संसद में इस मुद्दे को उठाया।
जेटली ने कहा आडवाणी और सुषमा के घर भी रुटीन जानकारी के लिए पुलिस गई। उन्होंने कहा कि 1957 से दिल्ली पुलिस नेताओं की प्रोफाइलिंग करते आ रही है।
जेटली ने कहा कि जिस दिन राहुल के घर गए उससे पहले नरेश अग्रवाल और उसी दिन रमेश भदूड़ी के यहां भी दिल्ली पुलिस गई। जासूसी के लिए जाना होगा तो क्या उनके घर जाकर उनके स्टाफ से पूछेंगे क्या। जेटली ने कहा कि बेकार के मुद्दे पर क्यों इतना हंगामा मचाया जा रहा है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को काफी गंभीर बताते हुए कहा कि यह सिर्फ सुरक्षा समीक्षा या जासूसी का मसला नहीं है, यह विपक्षी राजनेताओं की प्राइवेसी यानि निजता में घुसपैठ कर भारत को पुलिस स्टेट में बदलने की कोशिश जैसा है।