लकड़हारे कभी लौटे न थे
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उन्होंने सीखा है जन्मना

बस काटना / फाड़ना

टुकड़ों में बाँटना

आदिम प्रवृत्ति / आदिम कबीले

लकड़हारे हैं

लकड़ी का अकाल

जंगल नहीं रहे

टोटा तो नहीं मनुष्यों का

उनकी फ़ितरत / उनकी शोहरत

राजनीतिक वृत्ति

दास बनाना कर हाँकना

बस हाँकना
O- जसबीर चावला
जसबीर चावला