पलाश विश्वास

यशवंत सिंह की बुराई में लोग कुछ भी कहें, लेकिन यह सच है कि मीडिया के अंतर्महल के घिनौने सामाजिक वास्तव को उसने बेपर्दा कर दिया है और इसके लिये उसकी जितनी तारीफ की जाये, कम है।

पहले हमें मीडिया में अपने साथियों के विषय में कोई खबर होती नहीं थी, बाकी दुनिया की चाहे हम खबर लेते रहे हों। अब हमें अपने लोगों के सुख- दुख की जानकारी हो जाती है और हम चाहें तो अपने साथी के हक में खड़ा हो सकते हैं।

यशवंत के जेल से लौटने के बाद भड़ास के अपडेट से कोई कोना अब बचा नहीं है।

य़शवंत, अमलेंदु, अविनाश, फुटेला और दूसरे साथियों का ही करिश्मा है कि बिल्कुल नहीं छपने वाले हम जैसे लोग अब पाठकों के साथ अनवरत संवाद करने की हालत में हैं।

ऐसे ही एक हमारे बड़े सिपहसालार जगमोहन फुटेला हैं, जिनका घर उत्तराखंड में मेरे घर से ठीक सोलह किमी की दूरी पर है। हमारी तरह वे भी जनसत्ता में काम करते रहे हैं। हमारी तरह वे भी वीरेन दा के साथ काम करते रहे हैं।

अभी- अभी फुटेला कैंसर से लड़ाकर उसे परास्त कर अपने मोरचे पर लौटा है।

पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। हिंदी में पत्रकारिता करते हैं, अंग्रेजी के पॉपुलर ब्लॉगर हैं। “अमेरिका से सावधान “उपन्यास के लेखक। अमर उजाला समेत कई अखबारों से होते हुए अब जनसत्ता कोलकाता में ठिकाना ।

मैं अवाक था कि कई दिनों से जर्नलिस्ट कम्युनिटी में अपडेट नहीं हो रहा है। अब हमें भी सोशल मीडिया की मुसीबतों के बारे में मालूम है। कैसे- कैसे ये लोग अलख जगाये हैं, उसका अंदाजा है। मोहल्ला लाइव की अपडेट बारंबारता अब लगभग शून्य के नीचे जाने को है। हस्तक्षेप का सर्वर भी कभी कभार फेल हो जाता है। जनज्वार भी बहुत तेज अपडेट नहीं कर पाता। यही हाल विस्फोट का है। हस्तक्षेप, भड़ास और मीडिया दरबार को छोड़कर अपडेट निरंतरता एक बड़ी समस्या बनी हुयी है।

फुटेला को इसलिए मैंने फोन नहीं लगाया और उम्मीद कर रहा था कि जल्दी ही समस्या सुलझ जायेगी। बीच में तीन- चार दिन के लिये भुवनेश्वर चला गया था। आज वापसी के बाद भड़ास खोला तो बुरी खबर मिली।

“हाँ, चंडीगढ़ से बुरी खबर है। वरिष्ठ और बेबाक पत्रकार जगमोहन फुटेला को ब्रेन स्ट्रोक हुआ है। घटना छह अगस्त की है। उन्हें चंडीगढ़ में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उनके नजदीकी लोगों का कहना है कि कई दिनों के इलाज के बाद फिलहाल वे खतरे से बाहर हैं लेकिन ब्रेन स्ट्रोक के साइड इफेक्ट बरकरार हैं।

जगमोहन फुटेला ने अभी हाल में ही हरियाणा से शुरू होने वाले एक चैनल के संपादक पद से इस्तीफा दिया था और चैनल के अन्दर की गड़बड़ियों को उजागर करते हुये बेबाक लेख लिखे थे। जगमोहन फुटेला लम्बे समय तक दैनिक जागरण में रहे। जागरण प्रबंधन द्वारा किये गये अन्याय के खिलाफ उन्होंने कोर्ट में लम्बी लड़ाई लड़ी और जीत हासिल की। उन्होंने जर्नलिस्ट कम्युनिटी डाट काम की स्थापना कर वह मीडिया और राजनीति के कई स्याह पक्षों के बारे में विश्लेषणात्मक लेख लिखा करते हैं और अन्य लोगों की अभिव्यक्ति को भी मंच प्रदान करते हैं।

जगमोहन फुटेला के ब्रेन स्ट्रोक की खबर मिलते ही उनके जानने वाले लोग अस्पताल पहुंचने लगे और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की दुआएं की। जगमोहन फुटेला के पुत्र अभिषेक उनकी देखरेख में लगे हुये हैं। परिवार के अन्य सदस्य भी मुकम्मल इलाज के लिये सक्रिय हैं। बताया जाता है कि पहले वे मैक्स अस्पताल में एडमिट कराये गये थे। बाद में उन्हें पीजीआई ले जाया गया।“

यशवंत की यह पहल काबिले तारीफ है। फुटेला से उसके हाल में थोड़े मतभेद हो गये और मैं अपने प्रिय दो मित्रों और अपने मोर्चे के दो सबसे अच्छे लड़ाकों के मतभेद से खासा चिंतित रहा हूँ।

अब जैसे इस मामले में पहल करके यशवंत ने बड़े दिल का नमूना पेश किया है, मुझे उम्मीद है कि फुटेला के स्वस्थ होकर लौटते ही रही सही गलतफहमियाँ भी दूर हो जायेंगी और हम लोग मिलजुलकर वैकल्पिक मीडिया के मिशन को आगे बढ़ायेंगे।

अपने वीरेन दा पहले से बीमार चल रहे हैं और अब फुटेला भी अस्पताल में हैं। जैसाकि यशवंत की गिरफ्तारी के वक्त हम सबने एकजुटता दिखायी, उसी तरह फुटेला का इलाज सही तरीके से हो, अड़ोस- पड़ोस के मीडियाकर्मी इसका जरूर ख्याल रखेंगे ,ऐसी उम्मीद है।