जाहिद खान
वरिष्ठ पत्रकार वेद प्रताप वैदिक और जमात-उद-दावा के सरगना हाफिज सईद की मुलाकात पर विपक्ष के निशाने पर आई राजग सरकार ने भले ही संसद में यह साफ कर दिया हो कि वैदिक प्रकरण से उसका कोई वास्ता नहीं। सरकार का इस मुलाकात से न तो प्रत्यक्ष, न परोक्ष और न ही दूर-दूर तक कोई संबंध है। लेकिन यह मुद्दा इतना गंभीर है कि मोदी सरकार अपनी जिम्मेदारियों से बच नहीं सकती। इस मामले में उसका सिर्फ इतना कहना भर काफी नहीं है कि सरकार का इस मुलाकात से कोई लेना-देना नहीं। जिस शख्स को अमेरिका तक ने दुर्दांत आतंकवादी घोषित किया हो, जो 26/11 के मुंबई हमले का अहम मास्टरमाइंड और गुनहगार हो और जिसे पकड़ने के लिए हमारी सरकार ने लाखों का इनाम एलान किया हो, उसी हाफिज सईद से हमारे देश का कोई पत्रकार, बुद्धिजीवी, या कोई राजनीतिक आसानी से जाकर मिल ले, यह बात हमारी सरकार के लिए शर्मनाक तो है ही, अव्वल दर्जे की हिमाकत भी है।
वैदिक की हाफिज सईद से पाकिस्तान में हुई यह विवादास्पद मुलाकात राज ही रहती, यदि वे अपनी इस मुलाकात का फोटो खुद, सोशल साइट पर नहीं डालते। जाहिर है सोशल साइट पर यह फोटो वायरल होते ही न्यूज चैनलों पर हाफिज सईद से उनकी मुलाकात को लेकर चर्चा शुरू हो गई। मुलाकात में वैदिक की हाफिज सईद से क्या बात हुई ?, देशवासियों को इसे जानने की उत्सुकता से कहीं ज्यादा, यह सवाल हैं कि मुलाकात मुमकिन कैसी हुई ? वैदिक की हाफिज सईद के साथ मुलाकात सुनिश्चित कराने में आखिर कौन मददगार रहा ? क्योंकि पाकिस्तान के पत्रकार भी सईद से आसानी से नहीं मिल सकते। गौरतलब है कि वैदिक पिछले दिनों पाकिस्तान गए एक प्रतिनिधिमंडल में शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल के सदस्य 13 जून को जाने के बाद 15 जून को आ गए, लेकिन वैदिक वहां 15 दिन तक और रुके रहे। सवाल अब यहीं से शुरू होते हैं कि उन्हें इतनी लंबी अवधि का वीजा कैसे मिला ? वैदिक ने वहां जो कुछ कहा और जिन लोगों से मुलाकात की उसके बारे में भारतीय उच्चायुक्त ने क्या भारत सरकार को सतर्क किया या कोई रिपोर्ट भेजी ? पूरे घटनाक्रम के दौरान हमारी खुफिया एजंसियां क्या कर रही थीं ? एक बात और, वैदिक के पास वीजा केवल दो शहरों का था और घूमने के लिए नहीं था, फिर भी पाकिस्तान में उन्होंने कई सहुलियतों का फायदा उठाया। पूरी दुनिया में दहशत का पर्याय बन चुके हाफिज सईद से वैदिक किस हैसियत से मिले ? क्या पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग ने वैदिक की सईद से मुलाकात की व्यवस्था की थी ?
वैदिक-सईद की मुलाकात पर बवाल के बाद, पाकिस्तानी पत्रकार इफ्तिखार शिरानी ने इस मामले में यह कहकर कि भारत सरकार को इस मुलाकात की पूरी जानकारी थी, एक नया मोड़ ला दिया है। रोज-रोज हो रहे इन नए-नए रहस्योद्घाटनों की वजह से लोगों के दिमाग में शक पैदा हो रहा है कि वैदिक एक पत्रकार के नाते खुद ही आतंकी सरगना से मुलाकात करने गए थे या राजग सरकार में किसी की तरफ से बात करने गए थे ? क्या इसके पीछे कोई बैक चैनल मैकेनिज्म वाली बात थी ?, जो देशवासियों से छिपाई जा रही है। मोदी सरकार की तरफ शक की सुंई इसलिए भी जा रही है कि इससे पहले भी लोकसभा चुनावों के दौरान कश्मीरी अलगाववादियों से मोदी के दूत के मिलने की खबरें मीडिया में आईं थीं। वैदिक-सईद की मुलाकात के जरिए, क्या मोदी सरकार पर्दे के पीछे कोई नई कूटनीति चल रही है ? जाहिर है सवाल उठना लाजिमी हैं और सरकार को इन सब सवालों के जवाब देना होंगे। सरकार की नीयत पर सवाल इसलिए भी उठ रहे हैं कि इस पूरे मामले के मालूम चलने के बाद भी पूरे घटनाक्रम पर सरकार ने बहुत दिनों तक चुप्पी साधे रखी। वह तो जब संसद में हंगामा हुआ, तब उसने अपनी ओर से सफाई पेश की। वरना सरकार इस तरह से बैठी थी, जैसे कि कुछ हुआ ही ना हो।
इस विवादास्पद मुलाकात के बाद संकट में फंसे पत्रकार वैदिक और राजग सरकार अपनी सफाई में हर जगह कह रही है कि वे एक पत्रकार हैं और वे सबसे मुलाकात और बात कर सकते हैं। यह बात सही है कि एक पत्रकार होने के नाते वैदिक किसी से भी मिलने को स्वतंत्र हैं। लेकिन पत्रकारीय पेशे की भी कुछ मर्यादाएं हैं और हर पत्रकार को अपनी तरफ से इन मर्यादाओं का पालन करना चाहिए। खासकर मौका जब इतना संवेदनशील हो। चलो यह बात यदि मान भी ली जाए कि वैदिक पत्रकार के नाते बेगुनाहों के हत्यारे से मिले थे, तो वहां से लौटने के पन्द्रह दिन बाद तक उन्होंने इसके बारे में कहीं कुछ लिखा क्यों नहीं ? सबसे अहम बात तो यह है कि उनके जैसा वरिष्ठ पत्रकार जब एक आतंकवादी से बात करने गया तो अपने साथ न तो टेपरिकार्डर लेकर गया और न ही उसने यह इंटरव्यू रिकार्ड करने की कोई कोशिश की। वैदिक का कहना है कि उन्होंने बातचीत सिर्फ कागजों पर ही नोट की और जल्द ही इसके बारे में लिखेंगे। वहीं इस बारे में खुद हाफिज सईद का कहना है कि यह एक अनौपचारिक मुलाकात थी। यानी मुलाकात का मकसद पत्रकारिता से नहीं था। कुल मिलाकर इस मुलाकात की वजह संदिग्ध नहीं, तो अस्पष्ट जरूर है।
बहरहाल, इस मुलाकात को लेकर वैदिक ने मीडिया में अभी तलक जो कुछ कहा है उसके निहितार्थ बहुत गहरे हैं। वे सईद को सम्मानपूर्वक संबोधित करते हैं और उसके सभ्य आचरण की कहानियां सुनाते हैं। अपने साक्षात्कारों में वैदिक कहते हैं कि हाफिज सईद ने उन्हें बताया कि उसे तो मुंबई बम विस्फोट की जानकारी करीब घंटे भर बाद न्यूज चैनलों से मिली थी। यही नहीं वैदिक का दावा है कि उन्होंने सईद से यह बात कही कि नरेंद्र मोदी मुस्लिम विरोधी नहीं हैं। अपने चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने मुसलमानों के खिलाफ एक भी शब्द नहीं कहा था। उनकी सरकार की कोई भी नीति मुस्लिम विरोधी नहीं है। जाहिर है यह सब बातें किस तरफ इशारा करती हैं ? इन सबका मकसद कहीं न कहीं आतंकवादी हाफिज सईद की छवि चमकाना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को यह पैगाम देना है कि वे किस तरह से पाकिस्तान में उनका प्रचार कर रहे हैं।
ऐसा आतंकवादी, जिसका एकमात्र मकसद हमारे देश को नेस्तनाबूद करना रहा हो, जो अपनी हर तकरीर में हमारे देश के बारे में जहर उगलता रहा हो, उससे मिलकर वैदिक अपने देश को क्या पैगाम देना चाहते थे ? एक बात और फर्ज करें, अगर वेदप्रताप वैदिक के बदले किसी दूसरे समुदाय का कोई पत्रकार पाकिस्तान में रह रहे इस मोस्ट वांटेड आतंकवादी हाफिज सईद से जाकर मिला होता, तो आरएसएस और उसके आनुषंगिक संगठन पूरे देश में हंगामा बरपा देते। पत्रकार पर हमले और उसकी गिरफ्तारी की मांग होती। इस बात को अभी ज्यादा दिन नहीं गुजरे हैं, जब अलगाववादी कश्मीरी नेता यासीन मलिक ने ठीक इसी तरह से पाकिस्तान में हाफिज सईद से मुलाकात की थी, तो इस मुलाकात पर हंगामा करने में बीजेपी सबसे अव्वल नंबर पर थी। संघ परिवार और बीजेपी का उस वक्त कहना था कि मलिक की गिरफ्तारी की जाए। लेकिन इस मामले में सभी खामोश बैठे हुए हैं। उलटे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने वेद प्रताप वैदिक को देशभक्त बताया है। संघ के नेता इंद्रेश कुमार का हाल ही में एक बयान आया है कि, वेद प्रताप वैदिक देशभक्त हैं। उन्होंने जो कुछ किया, देशहित में किया। वहीं वैदिक के एक और करीबी ‘योग गुरु’ बाबा रामदेव कहते हैं कि वैदिक, हाफिज सईद का ‘हृदय परिवर्तन’ करने गए होंगे। जाहिर है, संघ से यह सवाल पूछा जा सकता है कि एक मोस्ट वांटेड आतंकवादी से मुलाकात कर, देश का क्या हित साधा जा सकता है ?
वैदिक-सईद प्रकरण राजग सरकार की उस घोषित नीति का मजाक उड़ाता है, जो कहती है कि वह मुंबई बमकांड के आतंकवादियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करना चाहती है। आतंकवाद के खिलाफ, उसका रुख जीरो टाॅलरेंस का रहेगा। कुल मिलाकर जिस खूंखार आतंकवादी के खिलाफ करोड़ों का इनाम घोषित हो और जिसके प्रत्यार्पण के लिए भारत लगातार पाकिस्तान पर दबाव बनाए हुए हो, उसके साथ वैदिक की मुलाकात और उसके खुलासे से राजग सरकार और बीजेपी की स्थिति हास्यास्पद हो गई है। उसकी स्थिति कुछ-कुछ सांप-छछंूदर सी हो गई है। उससे ना तो उगलते बन रहा है और ना ही निगलते। हां, देखने-दिखाने को वह यह कवायद जरूर कर रही है कि इस मामले से उसका कोई लेना-देना नहीं।
जाहिद खान, लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।