पटना, 25 मई। न्याय मंच के नेता रिंकु यादव व डॉ. मुकेश कुमार ने कहा है कि नीतीश-लालू की सरकार सेकुलरिज्म और सोशल जस्टिस की झूठी बातें करती है।

बिहार की राजधानी पटना के यूथ हॉस्टल में सेकुलरिज्म व सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध संगठनों की बैठक करते हुए कैम्पस में दो घंटे तक पुलिस-प्रशासन ने कैद किये जाने की घटना को न्याय मंच के नेताओं ने लोकतंत्र व अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बताते हुए कहा कि नीतीश-लालू की सरकार सेकुलरिज्म और सोशल जस्टिस की झूठी बातें करती है और साम्प्रदायिक हिंसा व दलितों पर सहारनपुर सहित पूरे देश में जारी हमले के खिलाफ देश भर से आये विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों पर माओवादी होने का झूठा आरोप लगाकर साम्प्रदायिक हिंसा के दोषियों को सजा दिलाने के लिये इंसाफ की आवाज बुलंद करने वालों को बदनाम कर रही है।

दोनों नेताओं ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम में यूथ हॉस्टल के कैम्पस में पुलिस बल तैनात कर दिया गया और गेट को बंद कर दिया गया। फिर उनके साथ अपराधियों जैसा सलूक किया गया। जेएनयू से आये छात्र नेता बीरेंद्र कुमार को माओवादी बताकर 6 घंटे तक गिरफ्तार कर गांधी मैदान थाने में रखा गया। पुलिस ने उनके घर झारखण्ड पुलिस को भेजकर उन के माँ पिता को परेशान किया।

दोनों नेताओं ने कहा कि नीतीश कुमार के संघ मुक्त भारत बनाने के नारे का फर्जीवाड़ा सामने आ गया है और नितीश सरकार भी संघ के एजेंडे पर काम कर साम्प्रदायिक हिंसा के दोषियों को बचा रही है और न्याय की आवाज बुलंद करने वालों का दमन कर रही है।

डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि

“आज हमलोग पूरे बिहार के दर्जनों संगठन के प्रतिनिधि सहारनपुर में दलितों पर बर्बर हमले के मसले सहित गौगुंडों द्वारा मुसलमानों पर जारी हमले पर विचार करने हेतु यहां बैठक कर रहे थे।

हमारे साथ पटना उच्च न्यायालय के वरीय अधिवक्ता Basant Kumar Choudhary और सूर्यदेव यादव, रिंकु यादव, Mustaqim Siddiqui, Abhishek Raj Nehal Haider, Naushad Zubair Malick, Tanweer Alam, Birendra Kumar, उस्मान हलालखोर, इंजीनियर राजकुमार पासवान, गजेंद्र मांझी सहित दर्जनों लोग व एक महिला साथी भी शामिल हैं।

जबकि रिहाई मंच उत्तर प्रदेश के साथी Rajeev Yadav और पटना न्यायालय के अधिवक्ता Abhishek Anand निकल चुके थे।“