सामाजिक न्याय की सरकार ने ठेका प्रथा शुरू कर सफाईकर्मियों के शोषण का ही मार्ग प्रशस्त कर दिया
सामाजिक न्याय की सरकार ने ठेका प्रथा शुरू कर सफाईकर्मियों के शोषण का ही मार्ग प्रशस्त कर दिया
बिहार के सफाई मजदूरों ने किया जोरदार प्रदर्शन !
पटना,26 मार्च। एक समान काम के लिए एक समान वेतन, सभी नगर निकायों से ठेका प्रथा खत्म हो तथा सभी मजदूरों का स्थायीकरण किया जाए, आदि मांगों को लेकर राजधानी पटना के गर्दनीबाग में धरना सभा की।
बिहार के विभिन्न जिलों से आए नगर निकाय में काम करने वाले दैनिक सफाई मजदूरों ने पटना गर्दनीबाग में जोरदार प्रदर्शन किया।
बिहार राज्य दैनिक सफाई मजदूर संघर्ष समिति के बैनर तले 26 मार्च को बिहार के विभिन्न हिस्सों से आये सफाई मजदूरों ने एकजुट होकर बिहार सरकार के समक्ष अपना मांग पत्र भी सौंपा।
सभा की शुरुआत पटना नगर निगम के दैनिक सफाई मजदूर रामसूरत यादव को श्रद्धांजलि से हुई।
बता दें 22 मार्च को तेज रफ्तार से चलती स्कूल बस से राजेंद्र नगर पुल, लोहानीपुर पर सफाई करते हुए रामसूरत यादव की बस दुर्घटना में मौत हो गई थी।
सभा को संबोधित करते हुए सभा के नेता नवीन कुमार ने कहा कि सरकार कानून के राज का ढोल पीटती है, जबकि पूरे समाज की गंदगी साफ करने वाले सफाई मजदूरों को राज्य में न्यूनतम मजदूरी तक नहीं दी जा रही है। सफाई मजूरों को मिलने वाली मजदूरी काफी कम है। सरकार ने ठेका प्रथा शुरू कर सफाईकर्मियों के शोषण का ही मार्ग प्रशस्त कर दिया है।
उन्होंने कहा कि सफाई का काम स्थायी प्रकृति का है तो सफाई कर्मियों की नियुक्ति अस्थाई क्यों है।
सभा को संबोधित करते हुए पटना नगर निगम के मजदूर नेता रवि साह ने कहा कि पटना सहित पूरे राज्य में सफाई मजदूरों को EPF का हिसाब नहीं दिया जा रहा है। सफाई मजदूरों के मेहनत की गाढ़ी कमाई की लूट जारी है। सफाई मजदूरों को किसी भी किस्म की सामाजिक सुरक्षा भी नहीं दी जा रही है। मनमाने ढंग से सफाई मजदूरों को जब-तब काम पर से हटा दिया जाता है।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ मुकेश कुमार ने कहा कि बिहार में पिछले 27 वर्षों से सामाजिक न्याय के नाम पर चल रही लालू-नीतीश की सरकार ने एक भी सफाई कर्मियों को स्थायी नौकरी नहीं दी है। राज्य में दलितों, भूमिहीनों पर सवर्ण-सामंती ताकतों के द्वारा हमले किए जा रहे हैं। राज्य की सरकार और उसकी पुलिस अपना हक-अधिकार मांगने पर सफाईकर्मियों के आंदोलन को बर्बरतापूर्वक कुचल रही है और उनपर फर्जी मुकदमे लाद रही है।
सभा मे आए सामाजिक कार्यकर्ता रमानन्द पासवान ने कहा कि एक समान शिक्षा की गारंटी के बिना दलित-वंचित समुदाय का विकास मुमकिन नहीं है। न्याय का प्रश्न भी समान शिक्षा व सभी को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा उपलब्ध कराये बगैर हल नहीं हो सकता है।
सभा में आई महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र की शोध छात्रा ज्योति कुमारी ने कहा कि सफाईकर्मियों को एक ही साथ पूंजीवाद, जातिवाद और ब्राह्मणवाद की मार झेलनी पड़ रही है। महिला सफाईकर्मियों को इन सबके साथ-साथ पितृसत्तामाक शोषण-उत्पीड़न का भी शिकार होना पड़ रहा है।
महात्मा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा की ही शोधछात्रा डिम्पल ने सफ़ाई मजदूरों के अधिकार व उनके बाल-बच्चों के शिक्षा की चरम बदहाली को रेखांकित किया।
सभा को संबोधित करते हुए अभिषेक राज ने कहा कि नीतीश सरकार सफाई मजदूरों के हितों की अनदेखी कर रही है। इस अनदेखी के खिलाफ उन्होंने व्यापक जन आंदोलन की जरूरत को रेखांकित किया।
सभा में दर्जनों वक्ताओं ने सफाई कर्मियों की समस्याओं के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद की। सभा में पूरे राज्य भर के दर्जनों जिले के 1000 से अधिक सफाईकर्मियों ने हिस्सा लिया और चरणबद्ध आंदोलन का संकल्प व्यक्त किया।


