सॉरी मकसूद
सॉरी मकसूद
इमरान रिज़वी
पंद्रह मिनट तक वो बेचारा एक बाघ के सामने हाथ जोड़े बैठा रहा। बाघ के सामने आ जाने पर अच्छे-अच्छे लोगों की यही हालत होती अगर वो निहत्थे होते जैसे मक़सूद था। इन पंद्रह मिनटों के दौरान चिड़ियाघर प्रशासन यदि तत्परता दिखाता तो काफी कुछ उपाय किए जा सकते थे मक़सूद को बचाने के लिए। बाघ को बेहोशी के इंजेक्शन डार्टगन द्वारा देकर बेहोश किया जा सकता था...एक इंसानी जान बचाई जा सकती थी। चिड़ियाघर प्रशासन पर सख्त से सख्त कार्यवाही होना चाहिए ताकि आगे चल कर इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए एक मिसाल कायम की जा सके।
न्यूज़ चैनल देखिये, किस तरह से वो बाघ मक़सूद की लाश को मुंह में दबाये पूरे बाड़े में लेकर घसीट रहा था....दिल अगर होगा आपके सीने में तो रो पड़ेगा।
अलविदा मक़सूद....तुम कौन थे कहाँ रहते थे कुछ नहीं जानता तुम्हारे बारे में। तुम्हारी इतनी दर्दनाक मौत आँखों में आंसू दे गयी दोस्त...तुम्हारी लाश से बहुत शर्मिंदगी महसूस हो रही है, क्यूंकि मेरे इस देश में लापरवाहियों के चलते होने वाली मौतों में आज एक नाम और जुड़ गया है जिसे ज़रा सी तत्परता दिखा कर टाला जा सकता था....शायद....
#sorryMaqsood


