हम गाँव को बिखरने नहीं देंगे- जयंत चौधरी
हम गाँव को बिखरने नहीं देंगे- जयंत चौधरी
नई दिल्ली। लोकदल के राष्ट्रीय महासचिव जयन्त चौधरी ने कहा है कि जो लोग गाँव छोड़ चुके हैं, उन्हें वापस लाया जायेगा, हम गाँव को बिखरने नहीं देंगे।
रालोद के प्रवक्ता कैप्टन एम के तायल ने बताया कि श्री चौधरी हिंसा प्रभावित मुजफ्फरनगर, मेरठ, बागपत तथा शामली जनपद में शान्ति बहाली के उद्देश्य से गये थे। उन्होंने मेरठ जनपद के तीन गांवों में हिंसा में मारे गये लोगों के परिवारीजनों से बातचीत की तथा शोक व्यक्त किया। उत्तर प्रदेश प्रशासन को चकमा देकर जयन्त चौधरी ने तड़के सुबह 6 बजे बिना सुरक्षा तथा बिना किसी को बताये अपने एक वाहन से अकेले मेरठ में प्रवेश किया।
जयन्त पहले मोर खुर्द गाँव पहुँचे और वैभव और छोटू से मिले जिनके पिता विरेन्द्र सिंह 7 सितम्बर को मारे गये थे। उसके बाद वह मोहम्मदपुर शिखस्त गाँव गये और हिमांशु (8) तथा चिराग (10) से मिले और शोक व्यक्त किया। इन मासूम बच्चों ने अपने पिता योगिन्दर सिंह को 7 सितम्बर को महापंचायत से लौटते समय खो दिया था। उसके बाद वह निलोखा गाँव की ओर चले तथा 72 वर्षीय सलीम से मिले जिनका 32 वर्षीय पोता साहिद 8 सितम्बर को गाँव में मारा गया। जयन्त को देखकर सलीम रो पड़ा और कहा, “मैंने सब कुछ एक झटके में खो दिया। क्यों?” जयन्त ने दुखी पिता को ढाँढस बंधाते हुये कहा कि आप बुजुर्ग व्यक्ति हैं, आपने सब कुछ देखा है। अपना दिल मत दुखाईए। इसके बाद गाँव के सभी बुजुर्ग मस्जिद में एकत्रित हुये जहाँ जयन्त चौधरी उनसे मुखातिब हुये तथा कहा कि सभी बुजुर्ग एक साथ आगे आयें और समुदाय को शान्ति एवं सुलह का संदेश दें।
रालोद नेता जयन्त चौधरी ने कहा, “मैं उन लोगों के पास जाना चाहता था जो दुखी हैं। कई जिन्दगियां समाप्त हो गयीं। मैंने लोगों में राज्य सरकार की निष्क्रियता के प्रति आक्रोश देखा है। लोग भाईचारे व शान्ति को पुनः बहाल करने की गम्भीर पहल के लिये जागरूक हैं। निलोखा गाँव में बहुत से ग्रामीणों ने मुझे बताया कि जो लोग गाँव छोड़ चुके हैं, उन्हें वापस लाया जायेगा, हम गाँव को बिखरने नहीं देंगे।”
जब जयन्त चौधरी ने निलोखा गाँव छोड़ा तथा बहरामपुर गाँव में मृतक जहीद के परिवारीजनों से मिलने के लिये चले, उत्तर प्रदेश पुलिस ने उन्हें मेरठ जनपद के जानी गाँव पर रोक लिया तथा वापस जाने के लिये कहा। जानी में पुलिस अधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में शान्ति है लेकिन वे सांसद की वापसी पर अड़े हुये थे।
युवा सांसद ने कहा, “यह समय पुलिस के लिये समस्या उत्पन्न करने का नहीं है। मैं शान्ति के लिये आया हूँ। मैं बहरामपुर जाना चाहता था लेकिन जानी में पुलिस ने मेरी कार को रोक लिया। पुलिस ने कई जगह बैरीकेडस लगा रखे थे। मैं चाहता हूँ कि प्रशासन अपने संसाधानों को कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर केन्द्रित करे बजाय यह सुनिश्चित करने के कि मैं अपने लोगों से न मिल सकूँ।”
जयन्त चौधरी ने यह भी कहा कि एक तरफ तो समाजवादी पार्टी के नेता आगरा में बैठक करके राजनीतिक मुद्दों पर चर्चाएं कर रहे हैं और दूसरी तरफ सांप्रदायिक हिंसाओं को बुझाने जा रहे जन प्रतिनिधियों को रोका जा रहा है। इस समय इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन उचित नहीं है तथा इससे उन लोगों का भला नहीं होगा जो असुरक्षित महसूस कर रहे हैं तथा न्याय की माँग कर रहे हैं।


