हम जानते हैं कि फासिज्म नहीं आयेगा क्योंकि...
हम जानते हैं कि फासिज्म नहीं आयेगा क्योंकि...
शेष नारायण सिंह
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष चंचल का आज लिखत पढ़त वाला जन्मदिन है। हो सकता कि यही उनका सही जन्मदिन भी हो। अगर ऐसा है तो उनको जन्मदिन की बधाई।
आज मैं, गंगा, गोमती, सई और पीली नदियों के बहाव के साथ बचपन और जवानी बिता चुके इस छोरे की जीवन यात्रा को याद करना चाहता हूँ क्योंकि उसी यात्रा में पता लगेगा कि आज़ादी मिलने के बाद पहले दशक में जन्म लेने वाले लोगों के सपने किस तरह से चकनाचूर हुये हैं। किस तरह से इस पीढ़ी ने 67-68 के आस-पास सोचा था कि बरगद और झोपड़ी निशान वाली पार्टियाँ सामाजिक न्याय की वाहक बनेंगी, लेकिन वह सपना टूट गया। इस पीढ़ी ने मधु लिमये और जार्ज फर्नांडीज़ के जुझारूपन को देखा है, उनके साथ जुलूसों में शामिल हुये लेकिन देखा कि एक दिन मधु ने सक्रिय राजनीति से तौबा कर लिया और जार्ज फर्नांडीज़ आरएसएस के खिदमतगार बन गये। इस पीढ़ी की परवरिश काँग्रेस विरोध की घुट्टी के साथ हुयी थी, जवान होने पर इन लोगों ने संजय गांधी,अंबिका सोनी और इंदिरा गांधी की कांग्रेस को नफरत किया था लेकिन एक मुकाम आया जब इसने कांग्रेस में ही वह ताक़त देखना शुरू कर दिया जो फासिज्म को हरा सकती है।


