हान्स माग्नुस एन्त्सेन्सबैर्गर – युद्ध पश्चात पीढ़ी के सबसे महत्वपूर्ण कवियों में से एक
हान्स माग्नुस एन्त्सेन्सबैर्गर – युद्ध पश्चात पीढ़ी के सबसे महत्वपूर्ण कवियों में से एक
हान्स माग्नुस एन्त्सेन्सबैर्गर – युद्ध पश्चात पीढ़ी के सबसे महत्वपूर्ण कवियों में से एक
उज्ज्वल भट्टाचार्या
जिन जर्मन कवियों में मेरी ख़ास दिलचस्पी रही है, हान्स माग्नुस एन्त्सेन्सबैर्गर उनमें से एक हैं. युद्धपश्चात पीढ़ी के सबसे महत्वपूर्ण कवियों में से वह एक हैं. उनकी कुछ कविताओं का मैंने अनुवाद किया था, भविष्य संगीत शीर्षक से वह संग्रह राधाकृष्ण प्रकाशन ने छापा था.
सुरेश सलिल जी ने अच्छे अनुवाद किये हैं, मेरे ख़्याल से शायद मंगलेश जी ने भी उनकी कुछ एक कविताओं का अनुवाद किया है.
ख़ासकर सुरेश जी के अनुवाद से हिंदी के पाठकों को उनकी कविताओं का परिचय मिला है.
कवि अनुवादकों के अलावा कई प्रगतिशील आलोचकों व अध्यापकों ने एन्त्सेन्सबैर्गर की कविताओं पर दृष्टिपात किया है.
लगभग इन सभी की राय में एन्त्सेन्सबैर्गर और एरिष फ़्रीड ने जर्मन कविता के जगत में ब्रेष्त की परंपरा को आगे बढ़ाया है.
ऐसे वक्तव्य से इस हद तक सहमति व्यक्त की जा सकती है कि ब्रेष्त के बाद प्रगतिशील राजनीतिक कविता लिखने का मतलब उनकी परंपरा को आगे बढ़ाना है. लेकिन ब्रेष्त के साथ तुलना वहीं रुक जाती है.
ब्रेष्त के साथ इन दोनों कवियों के अंतर कहीं ज़्यादा बुनियादी हैं.
फ़्रीड के बारे में अलग से बात करूंगा. एन्त्सेन्सबैर्गर के बारे में मेरी राय है कि वह इस मायने में पूंजीवाद विरोधी नहीं हैं कि एक वैकल्पिक व्यवस्था की हिमायत करते हों. वह पूंजीवाद के नतीजों के विरोध के कवि हैं, उनकी गहराई पर टार्च की रोशनी फेंकते हैं.
ब्रेष्त के विरोध में व्यवस्था के चरित्र में निहित विसंगतियां पीछे से झांकती हैं और कवि हमेशा जनता की ताकत की ओर इशारा करता है. यह बात हमें एन्त्सेन्सबैर्गर की कविताओं में नहीं दिखाई देती है.
ब्रेष्त सबवर्सिव हैं. एन्त्सेन्सबैर्गर में वह सबवर्सन नहीं है.
ब्रेष्त की भाषा में षड़यंत्र है, त्रास है. शायद ग्रास की कुछ कविताओं में है, लेकिन वैचारिक स्पष्टता नहीं है. हाइनर म्युलर में है, लेकिन राजनीतिक कवितायें उन्होंने कम लिखी है और उनकी रचनायें बहुत जटिल रूप से आधुनिक जर्मन इतिहास में गुंथी हुई हैं.
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