मंडल कारागार में लगी दुर्लभ प्रदर्शनी
अयोध्या। हिन्दुस्तान रिपाब्लिक एसोसिएशन प्रांतीय कार्यकारिणी की एक बैठक पीली कोठी धर्मशाला 3 अक्टूबर 1924 को सम्पन्न हुई। योगेश चन्द्र चटर्जी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लखनऊ, बनारस, इलाहाबाद, प्रतापगढ़, कानपुर, फतेहपुर, जौनपुर, इटावा, आगरा, अलीगढ़, झांसी ,हमीरपुर, फर्रूखाबाद, मैनपुरी, मथुरा, बुलंदशहर, मेरठ, दिल्ली, एटा, शाहजहांपुर, पीलीभीत, बरेली और मुजफ्फरनगर के जिला संगठनकर्ता नियुक्त किये गये। मीटिंग में कहा गया कि प्रांत में सैकड़ों सदस्य हैं जिसमें बनारस व झांसी के 15, अलीगढ़ के 12, और शाहजहांपुर से 8 सदस्यों ने हिस्सा लिया था। क्रंतिकारियों ने व्यापक रणनीति बनाई। एच0आर0ए को संचालन करने, हथियार खरीदने, साहित्य छपवाने और वितरित करने के लिए पैसे की जरूरत थी। ताकि ठोस और लगातार क्रांतिकारी एक्शन चलता रहे। दल के संविधान के तहत विभिन्न जिलों में क्लब और सेवा समितियां खोल कर दल को मजबूत करना था, सप्ताहिक पत्र भी निकालना था, जिससे वैचारिक क्रांति को धार दी जा सके। गोपनीय छापा खाना और हथियार की बेहद जरूरत थी।
आजादी आन्दोलन में काकोरी एक्शन आनोखी घटना है ब्रिटिश सम्राज्यवाद द्वारा इस प्रसिद्ध राजनैतिक मुकदमे चार क्रांतिकारियों को फाँसी पर लटका दिया गया। मुख्य चीफ कोर्ट के प्रधान न्यायधीश ने एक-एक क्रांतिकारी पर कई-कई गंभीर आरोप सिद्ध करने के लिये पूरा जोर लगाया। डकैती के आरोपी क्रांतिकारियों को उनके आरोपो की नकल तक नहीं दी गयी। उन्हें अपने मुताबिक वकील तक नहीं करने दिया गया। महीनों तक बिना मामला चलाया उन्हें जेलों में सड़ाया गया, कठोर से कठोर यातनायें दी गयीं देशवासियों से नफरत करने वाला, इन्साफ का गला घोटने वाला, फाँसी जज के नाम से कुख्यात हेमिल्टन ने 6 अप्रैल 1927 को अपना फैसला सुनाया। 18 महीने के नाटक के बाद 115 पन्ने के निर्णय को हडबड़ी सुनाकर जज हेमिल्टन तत्काल लंदन चला गया। इस फैसले के खिलाफ अवध चीफ कोर्ट में 18 जुलाई 1927 को अपील दायर की गयी। लेकिन ब्रिटिश भारत के न्यायधीश, पुलिस आदि फिंरगी सरकार के इशारे पर नंगा नाच करते रहे। लिहाजा अपील में सजा कम होने बजाय और बढ़ा दी गयी। क्रांतिवीर अशफ़ाक़ और शचीन्द्र नाथ बख्शी पर अलग से मुकदमा चला. क्रांतिकारियों को बचाने के लिए देश के प्रमुख हस्तियों की डिफेन्स कमेटी बनी थी, जो पैसे जुटा कर प्रिवी कांउसिल इग्लैण्ड में अपील की गयी। परन्तु प्रिवी काउंसिल के तथाकथित न्यायधीशों ने विचार किये बिना ही अस्वीकर दिया।
शहीद-ए-वतन अशफाक़ के शहादत दिवस पर काकोरी मुकदमे से जुड़े दुर्लभ दस्तावेज़ों की प्रदर्शनी मण्डल कारगार, फ़ैज़ाबाद में लगाई गई जिसमें हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन का संविधान, सप्लिमेंट्री काकोरी केस की फ़ाइल, चीफ़ कोर्ट आफ अवध जजमेंट, सजायाफ्ता क्रांतिवीरों की सूची, दुर्लभ तस्वीरें, और रिजेकटेड प्रिवी काउंसिल रिपोर्ट, फिरंगी हुकूमत के मुख्यालय नैनीताल और हिमाचल और लंदन ऑफिस से टेलीग्राम आदि क्रांति योद्धा से जुड़े प्रमुख दस्तावेज़ आकर्षण और चर्चा का केंद्र बने रहे।