हिंदी का लेखक-प्रकाशक विवाद : क्या साहित्य समाज में अप्रासंगिक होता जा रहा है ?
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हिंदी का लेखक-प्रकाशक विवाद : क्या साहित्य समाज में अप्रासंगिक होता जा रहा है ?

हस्तक्षेप | आपकी नज़र : ‘क्या साहित्य समाज में अप्रासंगिक होता जा रहा है ?’, इस चिंता के साथ साहित्य संबंधी चर्चाओं को सुनते-सुनते लगता है जैसे हम...

‘अपना टाइम आयेगा’ की कविता : कविता पर कवियों की बपौती के सिद्धांत की धज्जियाँ उड़ाती है ‘गली बॉय’
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‘अपना टाइम आयेगा’ की कविता : कविता पर कवियों की बपौती के सिद्धांत की धज्जियाँ उड़ाती है ‘गली बॉय’

आपकी नज़र | मनोरंजन : ‘अपना टाइम आयेगा’ (apna time aayega) - जुनून की नैतिकता का आप्त कथन। प्रमाद ग्रस्त आदमी विद्रोह के जरिये सामान्य नैतिकता को...

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