कैंसर के हर 10 में से 4 मामलों की रोकथाम संभव, तम्बाकू और संक्रमण सबसे बड़े कारण : यूएन अध्ययन
यूएन, WHO और IARC के नए अध्ययन में खुलासा: तम्बाकू, संक्रमण और जीवनशैली सुधार से कैंसर के 40% मामलों की रोकथाम संभव

Cancer news
वैश्विक कैंसर संकट: हर छह में से एक मौत की वजह
- WHO–IARC अध्ययन: 185 देशों के डेटा से क्या सामने आया
- कैंसर के 30 जोखिम कारक: तम्बाकू, ऐल्कॉहॉल और प्रदूषण प्रमुख
- संक्रमण और कैंसर: HPV सहित 9 संक्रमण पहली बार अध्ययन में शामिल
- तम्बाकू नियंत्रण क्यों है सबसे प्रभावी रोकथाम उपाय
- पुरुष-महिला और क्षेत्रवार अंतर: कहां रोकथाम की ज्यादा संभावना
- 2040 तक बढ़ सकता है कैंसर का बोझ: चेतावनी और अनुमान
- रोकथाम की रणनीतियाँ: टीकाकरण, स्वच्छ पर्यावरण और जन-स्वास्थ्य नीति
विश्व कैंसर दिवस और नीति-निर्माताओं के लिए संदेश
नई दिल्ली, 4 फरवरी 2026. संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय कैंसर शोध एजेंसी (IARC) के एक नए अध्ययन में यह सामने आया है कि विश्व भर में कैंसर के लगभग 40 प्रतिशत मामलों की रोकथाम संभव है। तम्बाकू सेवन, ऐल्कॉहॉल, वायु प्रदूषण, शारीरिक निष्क्रियता और संक्रमण जैसे जोखिम कारकों पर प्रभावी नियंत्रण से लाखों जानें बचाई जा सकती हैं। 185 देशों के आंकड़ों पर आधारित यह रिपोर्ट विश्व कैंसर दिवस २०२६ (World Cancer Day 2026) से पहले जारी की गई है और यह जन-स्वास्थ्य नीतियों के लिए एक स्पष्ट हस्तक्षेप की मांग करती है।
पढ़िए संयुक्त राष्ट्र समाचार की यह ख़बर
कैंसर के हर 10 में से 4 मामलों की रोकथाम सम्भव है - यूएन अध्ययन
3 फरवरी 2026 स्वास्थ्य
विश्व भर में कैंसर के 40 फ़ीसदी मामलों में रोकथाम की जा सकती है, और इसके लिए यह ज़रूरी है कि तम्बाकू नियंत्रण समेत इस बीमारी के जोखिम में कमी लाने वाले ठोस उपायों को अपनाया जाए, ताकि लोगों के जीवन को बचाया जा सके.
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अन्तरराष्ट्रीय कैंसर शोध एजेंसी (IARC) के एक नए अध्ययन में यह निष्कर्ष साझा किया गया है.
मंगलवार को प्रकाशित इस अध्ययन में, कैंसर की वजह बनने वाले 30 कारणों की पड़ताल की गई है, जिनमें तम्बाकू, ऐल्कॉहॉल, शारीरिक निष्क्रियता, वायु प्रदूषण, पराबैंगनी विकिरण (ultraviolet radiation), शरीर का अधिक वज़न होना शामिल हैं.
इनके अलावा, कैंसर के लिए ज़िम्मेदार 9 संक्रमणों पर भी पहली बार ध्यान केन्द्रित किया गया है,जिनमें ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) है. यह सर्वाइकल कैंसर का कारण है.
एक विशाल चुनौती
कैंसर, विश्व भर में बड़ी संख्या में मौतों की एक बड़ी वजह है. वर्ष 2020 में इस बीमारी से लगभग 1 करोड़ लोगों की जान गई थी, यानि हर छह में से 1 मौत.
कैंसर के सबसे आम प्रकारों में स्तन, फेफड़े, बड़ी आंत, मलाशय और प्रोस्टेट कैंसर हैं.
एक अनुमान के अनुसार, यदि मौजूदा रुझान जारी रहे तो वर्ष 2040 तक कैंसर के नए मामलों में 50 फ़ीसदी तक की वृद्धि हो सकती है, और इसे रोकने के लिए कारगर रोकथाम रणनीति अपनाई जानी ज़रूरी है.
यूएन स्वास्थ्य एजेंसी और IARC का यह अध्ययन, विश्व कैंसर दिवस से ठीक पहले जारी किया गया है, जोकि हर वर्ष 4 फ़रवरी को मनाया जाता है.
इस अध्ययन में 185 देशों से प्राप्त डेटा और कैंसर के 36 प्रकारों का अध्ययन किया गया है. इसके अनुसार, वर्ष 2022 में, कैंसर के नए मामलों में, लगभग 37 फ़ीसदी, यानि 71 लाख मामलों में रोकथाम की जा सकती थी.
तम्बाकू, एक बड़ी वजह
तम्बाकू का सेवन, कैंसर का एक मुख्य कारण है और इसकी रोकथाम की जा सकती है. कैंसर के नए मामलों में यह 15 प्रतिशत के लिए ज़िम्मेदार है, जिसके बाद संक्रमण (10 प्रतिशत) और ऐल्कॉहॉल सेवन (3 प्रतिशत) आता है.
महिलाओं और पुरुषों में जिन कैंसर मामलों की रोकथाम की जा सकती है, उनमें लगभग 50 फ़ीसदी फेफड़े, पेट और सर्वाइकल कैंसर के मामले हैं.
फेफड़ों के कैंसर के लिए मुख्य रूप से धूम्रपान और वायु प्रदूषण को ज़िम्मेदार माना जाता है, वहीं पेट के कैंसर का एक बड़ा कारण Helicobacter pylori नामक संक्रमण है. सर्वाइकल कैंसर, अधिकाँशतया एचपीवी संक्रमण की वजह से होता है.
महिलाओं की तुलना में, पुरुषों में कैंसर के वो मामले अधिक नज़र आते हैं, जिनकी रोकथाम की जा सकती है. कैंसर के कुल नए मामलों में, 45 प्रतिशत पुरुषों में दर्ज किए जाते हैं, जबकि महिलाओं में यह आँकड़ी 30 फ़ीसदी है.
क्षेत्रवार स्थिति, जोखिम
कैंसर के जिन मामलों की रोकथाम सम्भव है, उनमें विश्व भर में अलग-अलग स्थिति है. उत्तर अफ़्रीका और पश्चिम एशिया में महिलाओं में यह 24 फ़ीसदी है, जबकि सब-सहारा अफ़्रीका में यह 38 प्रतिशत तक है.
वहीं, पुरुषों के मामले में, पूर्व एशिया में यह 57 प्रतिशत तक है, जबकि लातिन अमेरिका और कैरीबियाई क्षेत्र में यह 28 फ़ीसदी आंका गया है.
विशेषज्ञों के अनुसार, व्यावहारिक, पर्यावरणीय, कामकाज सम्बन्धी और संक्रमण के जोखिमों में अन्तर होने की वजह से यह भेद दिखाई दिया है. इसके अलावा, सामाजिक-आर्थिक विकास, राष्ट्रीय स्तर पर रोकथाम नीतियों और स्वास्थ्य प्रणालियों की क्षमता भी इसे तय कर सकती हैं.
रोकथाम के लिए रणनीतियाँ
अध्ययन में ज़ोर देकर कहा गया है कि सन्दर्भ व ज़मीनी स्थिति के अनुरूप रोकथाम रणनीतियों को अपनाया जाना आवश्यक है.
जैसेकि तम्बाकू नियंत्रण के मज़बूत उपाय, ऐल्कॉहॉल सेवन के लिए नियम, एचपीवी, हेपेटाइटिस समेत कैंसर की वजह बनने वाले अन्य संक्रमणों के लिए टीकाकरण.
इसके अलावा, वायु गुणवत्ता को बेहतर बनाना, कार्यस्थलों में सुरक्षा उपायों का पालन, स्वस्थ भोजन और शारीरिक सक्रियता को बढ़ावा दिया जाना भी अहम है.
साथ ही, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन और श्रम के क्षेत्र में समन्वित प्रयास किए जाने होंगे, ताकि लाखों-करोड़ों परिवारों को कैंसर के बोझ से बचाया जा सके.
यूएन स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, कैंसर के बड़े जोखिमों की रोकथाम करके न केवल इस बीमारी के मामलों में कमी लाई जा सकती है, बल्कि स्वास्थ्य देखभाल क़ीमतों को घटाना और आबादी के स्वास्थ्य-कल्याण में बेहतरी भी सम्भव है.


