ग़ाज़ा में हमले, विस्थापन और जनसंख्या संरचना में बदलाव की आशंका : संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गंभीर चेतावनी

  • 2024–25 की रिपोर्टिंग अवधि: क्या कहता है संयुक्त राष्ट्र
  • अकाल, कुपोषण और मानवीय सहायता पर रोक
  • नागरिक ठिकानों पर हमले और संभावित युद्ध अपराध
  • पश्चिमी तट में ग़ैरक़ानूनी बल प्रयोग के आरोप
  • बन्धकों के साथ अमानवीय व्यवहार पर चिंता
  • जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय कानून की कसौटी

पुनर्निर्माण, न्याय और राजनीतिक समाधान की दिशा

नई दिल्ली, 20 फरवरी 2026. संयुक्त राष्ट्र की एक नई रिपोर्ट ने ग़ाज़ा और पश्चिमी तट की स्थिति पर गहरी चिंता जताई है। नागरिक क्षेत्रों पर तेज़ होते हमले, अकाल, जबरन विस्थापन और कथित युद्ध अपराध, क्या यह जनसंख्या संरचना बदलने की सुनियोजित कोशिश है? जवाबदेही और न्याय पर वैश्विक समुदाय की अगली परीक्षा ग़ाज़ा और पश्चिमी तट में होनी है। पढ़िए संयुक्त राष्ट्र समाचार की यह ख़बर...

ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट में 'जातीय सफ़ाए' की गहरी आशंकाएँ - यूएन रिपोर्ट

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) ने कहा है कि ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट में, तेज़ होते इसराइली हमले और फ़लस्तीनी नागरिकों को जबरन विस्थापित करने की घटनाओं ने, जातीय सफ़ाए को लेकर गम्भीर चिन्ता उत्पन्न कर दी है.

गुरूवार को जारी इस रिपोर्ट में 1 नवम्बर 2024 से 31 अक्टूबर 2025 के बीच की स्थिति को शामिल किया गया.

OHCHR द्वारा जारी की गई यह रिपोर्ट निगरानी, सरकारी स्रोतों, अन्य यूएन एजेंसियों तथा गै़र-सरकारी संगठनों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर तैयार की गई है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़ाज़ा पट्टी में तेज़ होते इसराइली हमले, पूरे के पूरे रिहायशी इलाक़ों को योजनाबद्ध तरीके़ से नष्ट किया जाना और मानवीय सहायता को रोके जाने जैसे क़दम, वहाँ की जनसंख्या संरचना में स्थाई बदलाव लाने की मंशा की ओर इशारा करते हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, आबादी का जबरन स्थानांतरण की घटनाएँ भी, स्थाई विस्थापन के उद्देश्य से की जा रही प्रतीत होती हैं. इन हालात को देखते हुए ग़ाज़ा पट्टी और पश्चिमी तट में जातीय सफ़ाए को लेकर गम्भीर चिन्ता उत्पन्न हो गई है.

अस्तित्व पर ख़तरा

रिपोर्ट में कहा गया है कि ग़ाज़ा पट्टी में इसराइली बलों द्वारा अभूतपूर्व संख्या में आम नागरिकों की लगातार हत्या और घायल किए जाने की घटनाएँ सामने आई हैं.

साथ ही, पूरे क्षेत्र में अकाल फैल रहा है व अस्पतालों, स्कूलों तथा घरों जैसे बचे हुए नागरिक बुनियादी ढाँचों को भी बड़े पैमाने पर नष्ट किया गया है.

रिपोर्ट के अनुसार, यह स्थिति फ़लस्तीनियों पर ऐसी जीवन-परिस्थितियाँ थोप रही है, जो एक समुदाय के रूप में ग़ाज़ा में उनके निरन्तर अस्तित्व के अनुकूल नहीं रह गई है.

इसके अलावा, ग़ाज़ा में देखे गए घातक हमलों के तौर-तरीक़ों से, इस बात को लेकर गम्भीर चिन्ता उत्पन्न होती है कि इसराइली बलों ने, जानबूझकर नागरिकों और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाया.

ऐसे हमले किए गए, जिनमें यह पहले से ज्ञात था कि होने वाली मौतें, चोटें और तबाही, अपेक्षित सैन्य लाभ की तुलना में अत्यधिक होंगी. रिपोर्ट के मुताबिक़, ऐसे कृत्य युद्ध अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं.

रिपोर्ट कहती है कि 7 अक्टूबर 2023 को इसराइल पर हमास के नेतृत्व में हुए हमलों के बाद शुरू हुए युद्ध से अब तक 68 हज़ार 800 से अधिक फ़लस्तीनी मारे जा चुके हैं और 1 लाख 70 हज़ार 664 से अधिक लोग घायल हुए हैं.रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वास्तविक मृतक संख्या इससे अधिक हो सकती है, क्योंकि मलबे के नीचे दबे लोगों को इन आँकड़ों में शामिल नहीं किया गया है.

भूख से दम तोड़ते लोग

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान ग़ाज़ा पट्टी में कम से कम 463 फ़लस्तीनी नागरिकों की भूख से मौत हुई, जिनमें 157 बच्चे हैं.

साथ ही, अकाल और कुपोषण की यह स्थिति सीधे तौर पर इसराइल सरकार द्वारा उठाए गए क़दमों का नतीजा है. इनमें मानवीय सहायता के प्रवेश और उसके वितरण पर पाबन्दियाँ भी शामिल हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, नागरिक आबादी को भूखा रखना यदि युद्ध के एक तरीक़े के रूप में इस्तेमाल किया जाता है, तो वह युद्ध अपराध की श्रेणी में आता है. इसके साथ ही, ऐसा यदि किसी नागरिक आबादी के ख़िलाफ़ व्यापक या सुनियोजित हमलों के तहत किया गया हो, तो इसे मानवता के विरुद्ध अपराध भी माना जा सकता है.

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यदि इस तरह के कृत्य किसी राष्ट्रीय, जातीय, नस्लीय या धार्मिक समूह को पूरी तरह या आंशिक रूप से नष्ट करने के इरादे से किए गए हों, तो उन्हें जनसंहार की श्रेणी में भी रखा जा सकता है.

ग़ैरक़ानूनी बल प्रयोग

रिपोर्ट में कहा गया है कि क़ाबिज़ पश्चिमी तट में इसराइली सुरक्षा बलों द्वारा ग़ैरक़ानूनी बल प्रयोग को व्यवस्थित तरीके़ से अंजाम दिया गया है.

इसमें युद्ध के लिए बनाए गए साधनों और तरीक़ों का लगातार प्रयोग, फ़लस्तीनियों की बड़े पैमाने पर मनमानी गिरफ़्तारी, हिरासत में यातना और अन्य अमानवीय व्यवहार, तथा सम्पत्तियों को नष्ट किया जाना शामिल है.

इन कार्रवाइयों का इस्तेमाल फ़लस्तीनी लोगों के साथ व्यवस्थित भेदभाव करने, उन्हें दबाने, नियंत्रित करने और अपने अधीन रखने के उद्देश्य से किया गया.

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि फ़लस्तीनी प्राधिकरण के सुरक्षा बलों द्वारा भी कुछ मामलों में अनावश्यक या असमानुपातिक बल प्रयोग की चिन्ताजनक घटनाएँ सामने आई हैं.

इनमें बड़े पैमाने पर चलाए गए उन सैन्य अभियानों के दौरान की गई कार्रवाइयाँ भी शामिल हैं, जिनका निशाना ऐसे लोग थे, जिनकी इसराइल को तलाश थी.

बन्धकों के साथ अमानवीय व्यवहार

रिपोर्ट में कहा गया है कि रिपोर्टिंग अवधि के दौरान हमास और अन्य फ़लस्तीनी सशस्त्र समूहों ने, 7 अक्टूबर 2023 को पकड़े गए इसराइली और विदेशी बन्धकों को सौदेबाज़ी के हथियार के रूप में अपने पास रखा. इनमें हिरासत के दौरान मारे गए या मृत पाए गए लोगों के शव भी शामिल हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक़, पहले जारी किए गए वीडियो और रिहा किए गए बन्धकों की सार्वजनिक गवाहियों से ये संकेत मिले हैं कि बन्धकों के साथ यौन हिंसा और अन्य लैंगिक हिंसा, यातना तथा अन्य अमानवीय व्यवहार किए गए.

इन गवाहियों में मारपीट किए जाने, लम्बे समय तक ज़मीन के नीचे बन्द रखे जाना, तथा भोजन, पानी और शौचालय तक पहुँच से वंचित किए जाने जैसी घटनाएँ भी शामिल हैं.

रिपोर्ट में याद दिलाया गया है कि लोगों को बन्धक बनाकर रखना और उन्हें इस तरह की परिस्थितियों में रखना अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के अनेक प्रावधानों का उल्लंघन है, और ऐसे कृत्य युद्ध अपराध तथा सम्भवतः अन्य गम्भीर अन्तरराष्ट्रीय अपराधों की श्रेणी में आते हैं

जवाबदेही बेहद ज़रूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्रों में इसराइली अधिकारियों द्वारा किए गए गम्भीर मानवाधिकार उल्लंघनों और अन्तरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून के गम्भीर उल्लंघनों के मामलों में दंड से बच निकलने का माहौल लगातार बना हुआ है.

साथ ही, अब तक जवाबदेही तय करने की दिशा में कोई ठोस और सार्थक क़दम नहीं उठाए गए हैं.

संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर टर्क ने, इस रिपोर्ट पर कहा है, “दंड से छूट कोई अमूर्त चीज़ नहीं है…यह लोगों की जान लेती है. जवाबदेही बेहद ज़रूरी है. फ़लस्तीन और इसराइल में न्यायपूर्ण और टिकाऊ शान्ति के लिए यह एक अनिवार्य शर्त है.”

कार्रवाई की अपील

रिपोर्ट में, सिफ़ारिशों के तहत सभी देशों से अपील की गई है कि वे क़ाबिज़ फ़लस्तीनी क्षेत्रों में हो रहे उल्लंघनों में सहायक बनने वाली किसी भी तरह की भूमिका को रोकें.

साथ ही, इसराइल को हथियार, गोला-बारूद तथा अन्य सैन्य उपकरणों की बिक्री, आपूर्ति और हस्तांतरण तुरन्त बन्द करें.

रिपोर्ट में यह भी ज़िक्र किया गया है कि ग़ाज़ा युद्ध को समाप्त करने के लिए, अक्टूबर 2025 में संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व में घोषित, व्यापक योजना को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी हैं.

हालाँकि रिपोर्ट ने यह भी कहा है कि 7 अक्टूबर 2023 के बाद हुए मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेही तय करने की दिशा में किसी भी ठोस क़दम का नहीं होना एक गम्भीर कमी है.

रिपोर्ट में ज़ोर देते हुए कहा गया है कि पीड़ितों के लिए न्याय ही ग़ाज़ा पट्टी के पुनर्निर्माण की बुनियाद बनना चाहिए.

इसके साथ ही देशों से यह सुनिश्चित करने का आग्रह भी किया गया है कि ग़ाज़ा के पुनर्निर्माण से जुड़ी शासन व्यवस्थाओं और निर्णय प्रक्रियाओं में, फ़लस्तीनियों की तत्काल और सार्थक भागेदारी हो, ताकि वही लोग इस क्षेत्र के भविष्य के पुनर्निर्माण की दिशा तय कर सकें.