जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती अतिक्रमण नहीं है: पटना हाईकोर्ट का स्पष्ट निर्देश, विस्थापन पर रोक
पटना हाईकोर्ट ने जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती को अतिक्रमण मानने से इनकार किया। पुनर्वास बिना विस्थापन पर रोक, मानवाधिकार संघर्ष को समर्थन।

Jaymangala Garh Musahar settlement is not an encroachment: Patna High Court issues clear directive, puts a stay on displacement.
पटना हाईकोर्ट की खंडपीठ का आदेश: पुनर्वास के बिना विस्थापन नहीं
- सरकार का हलफनामा: पर्चाधारी मुसहर अतिक्रमणकारी नहीं
- इंटरवेनर याचिका स्वीकार: अगली सुनवाई तक बस्ती पर दखल पर रोक
- अतिक्रमण नोटिस की हकीकत: हाईकोर्ट आदेश में कथित फेरबदल का आरोप
- इको पार्क के नाम पर उजाड़ने की तैयारी: प्रशासनिक दबाव और शासकीय आतंक
- दलित अधिकारियों द्वारा महादलित मुसहर समाज पर दमन का आरोप
- जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष को मेधा पाटकर और सुधा वर्गीस का समर्थन
- मानवाधिकार संगठनों की भूमिका: पीयूसीएल और विधिक सहायता
- मुसहर कौन हैं? शबरी के वंशज, महाश्वेता देवी और जनजातीय दर्जे की बहस
- संविधान, भूमि अधिकार और सबसे कमजोर की रक्षा का सवाल
- जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती के पक्ष में पटना उच्च न्यायालय के माननीय मुख्य न्यायाधीश का निर्देश
- जयमंगला गढ़ की मुसहर बस्ती अतिक्रमण नहीं है- पटना हाईकोर्ट
जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष को मेधा पाटकर का समर्थन
पटना, 5 फरवरी 2026. मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू और जस्टिस नानी ताग्या की खंडपीठ ने CWJC -19823/2024 की सुनवाई की। सुनवाई के दौरान विद्वान महाधिवक्ता ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि जयमंगला गढ़ में निवासरत पर्चाधारी अतिक्रमणकारी नहीं हैं और अगर उन्हें विस्थापित करना होगा तो पहले उन्हें दूसरे स्थल पर पुनर्वासित किया जाएगा।
ज्ञात हो कि उजाड़ने के शासकीय निर्देश के खिलाफ जयमंगला गढ़ की रहवासी सरोज देवी, कला देवी, धनिक सदा की ओर से एक इंटरवेनर पेटीशन दाखिल किया गया था, जिसे बहस के दरम्यान अदालत ने स्वीकार किया और आगे सरकार और इंटरवेनर दोनों को प्रति शपथ पत्र दाखिल करने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई तक सरकार के द्वारा मुसहर बस्ती को दखल नहीं किया जाएगा।
जयमंगला गढ़ के मुसहर बस्ती की ओर से अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय और सरकार की ओर से महाधिवक्ता पी.के. शाही ने बहस की।
सुनवाई के दरम्यान जयमंगला गढ़ के पीड़ितों की ओर से पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार सिंह, नैना और बेगूसराय के वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ कुमार अंबष्ट और शोधार्थी -लेखक पुष्पराज उपस्थित थे।
महादलित मुसहरों की विधिक सहायता के लिए जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति की ओर से पूर्व पंचायत समिति रामनरेश सदा ने पीयूसीएल के प्रति आभार प्रकट किया है। पीयूसीएल के प्रदेश महासचिव सरफराज ने जयमंगला गढ़ के मुसहर समाज को विस्थापन से बचाने के संघर्ष को मानवाधिकार और मानवता के हित का संघर्ष बताया है।
प्रसिद्ध समाजसेवी और नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेत्री मेधा पाटकर ने जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष को अपना समर्थन देते हुए उन्हें उजाड़ने की कोशिश के खिलाफ माननीय पटना उच्च न्यायालय के निर्णय को महादलितों के पक्ष में मानवतावादी न्याय कहा है।
पद्मश्री सुधा वर्गीस ने भी जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती के संघर्ष को अपना समर्थन दिया है।
जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती पर अतिक्रमण के शासकीय आरोप की हकीकत
2 जनवरी 2026 को मंझौल के अनुमंडलाधिकारी ने जयमंगला गढ़ के रहवासियों को जाकर बताया था कि उनकी बस्ती को उजाड़कर इको पार्क बनाया जाएगा।
10 जनवरी 2026 को अखबारों में चेरिया बरियारपुर के अंचलाधिकारी के हवाले से सभी अखबारों में खबर छपी कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा प्रस्तावित इको पार्क के निर्माण के लिए जयमंगला गढ़ की मुसहर बस्ती को उजाड़ा जाएगा। इस खबर में उजड़ने के बाद जिस जमीन पर बसाने का जिक्र किया गया था। उस जमीन के भूस्वामी रामाशीष प्रसाद सिंह ने CWJC 949/2026 के द्वारा अपनी जमीन की रक्षा के लिए 16 जनवरी 2026 को पटना हाईकोर्ट में रिट दायर किया था।
22 जनवरी को रामाशीष सिंह की जमीन पर गेहूं की हरी फसल को रौंदकर सीओ, बीडीओ, एसडीएम, एडीएम ने कब्जा कर लिया। 27 जनवरी 2026 को माननीय उच्च न्यायालय में चेरिया बरियारपुर के अंचलाधिकारी नंदन कुमार ने किसान की जमीन कब्जा नहीं करने का शपथ पत्र दायर किया।
15 जनवरी 2026 को अंचलाधिकारी द्वारा मुसहर बस्ती को नोटिस
15 जनवरी 2026 को चेरिया बरियारपुर के अंचलाधिकारी नंदन कुमार ने 335 परिवारों को 5 जनवरी 2026 की तिथि से जारी नोटिस जारी किया, जिसमें पूरी बस्ती को अतिक्रमणकारी बताया गया। 20जनवरी 2026 को अंचलाधिकारी ने अपने कार्यालय में नोटिस का जवाब देने का दिवस तय किया था।
सभी रहवासियों ने बेगूसराय के वरिष्ठ अधिवक्ता वशिष्ठ कुमार अंबष्ट को अपना अधिवक्ता बनाकर बासगीत पर्चा, इंदिरा आवास, प्रधानमंत्री आवास 10+2 तक की पढ़ाई वाले सरकारी विद्यालय, स्वास्थ्य उपकेंद्र, दो आंगनबाड़ी केंद्र की मौजूदगी के साक्ष्य के साथ अतिक्रमण के आरोप को खारिज किया।
दलित अधिकारियों द्वारा महादलित मुसहर समाज पर दमन की कोशिश
बीडीओ, सीओ, एसडीएम, एडीएम ने शासन की ताकत से इकट्ठे मुसहर रहवासियों को अपनी बस्ती छोड़कर अन्यत्र जाने के लिए बहुत अधिक दवाब बनाया। 15 जनवरी को बेगूसराय के जिलाधिकारी ने जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल से स्पष्ट कहा था कि हम पुनर्वास के बिना मुसहर बस्ती को उजाड़ने के लिए संकल्पित हैं।
पटना हाईकोर्ट ने मुसहर बस्ती को उजाड़ने का आदेश नहीं दिया था
बिहार के वेटलैंड और रामसर साइट के संवर्धन के संदर्भ में दायर याचिका CWJC 19823/2024 के निर्देश में माननीय पटना उच्च न्यायालय ने 18 दिसंबर 2025 को अपने आदेश के 5 वें पैरा की पहली पंक्ति में स्पष्ट कहा था कि अगर अतिक्रमण है तो उसे वैधानिक तरीके से हटाया जाएगा। "If the aforesaid allegations are found to be correct upon verification......" याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस पंक्ति को हटाकर जयमंगला गढ़ मुसहर बस्ती में नोटिस सार्वजनिक किया गया है। इस पैरा की आखिरी पंक्ति में water bodies को हटाकर Jay Mangla Devi ...लिखा गया है। अंचलाधिकारी को हाईकोर्ट के आदेश में फेरबदल कर सूचना सार्वजनिक करने का अधिकार नहीं है। जाहिर कि इस नोटिस से मुसहर बस्ती में शासकीय आतंक कायम हुआ। हाईकोर्ट के आदेश को अपनी सुविधा से छेड़छाड़ कर इस तरह जारी किया गया है, जिससे जाहिर होता था कि शासन को अतिक्रमण हटाने का कोई आदेश दिया गया था।
शासकीय आतंक के समक्ष सबसे कमजोर मुसहरों की रक्षा किस तरह हुई
चर्चित पुस्तक नंदीग्राम डायरी के लेखक पुष्पराज का पैतृक ग्राम मंझौल है। देश भर में विस्थापन विरोधी पत्रकारिता के लिए पुष्पराज ने अलग - अलग राज्यों में लेखन किया है। पुष्पराज बापू गांधी के सहकर्मी स्वतंत्रता सेनानी रामखेलावन शास्त्री के पौत्र हैं। पुष्पराज ने मीडिया के असहयोग के बावजूद मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की मदद से पटना में विद्वान अधिवक्ता आकांक्षा मालवीय की सहायता ली और आज प्रथम चरण में बेगूसराय के शासन महकमा के द्वारा अतिक्रमणकारी घोषित मुसहर बस्ती को उजड़ने से बचा लिया गया।
पुष्पराज बताते हैं कि शबर आदिवासियों को लेखन का विषय बनाने वाली प्रसिद्ध लेखिका महाश्वेता देवी ने शबर आदिवासी शबरी के वंशज मुसहरों के जीवन दर्द को लिखने के लिए उन्हें लगातार प्रेरित किया था।
पुष्पराज प्रख्यात संपादक प्रभाष जोशी और कुलदीप नैयर के अनुगामी रहे हैं। पुष्पराज मुसहर समाज की रक्षा को बापू गांधी के "कतार के अंतिम आदमी" की पत्रकारिता का हिस्सा मानते हैं।
ज्ञात हो कि पुष्पराज जिस मुसहर बस्ती को बचाने के संघर्ष में लगे हैं, उस बस्ती को उनके दादा रामखेलावन शास्त्री ने बेगूसराय के तत्कालीन आईसीएस एसडीओ ओमर साहब के सहयोग से बसाया था।
कौन हैं मुसहर
भगवान श्री राम को बेर खिलाने वाली शबरी के वंशज ऋषिदेव मुसहर
शबर आदिवासियों के जीवन को लेखन का विषय बनाने वाली प्रख्यात लेखिका महाश्वेता देवी ने बिहार के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के.बी सक्सेना को बिहार के मुसहरों के बारे में पत्र लिखा था। महाश्वेता का दावा था कि शबरी गोत्र के शबरी के वंशज मुसहरों को दलित नहीं जनजाति का दर्जा मिलना चाहिए।
यह आश्चर्यजनक है कि अगर शबरी को आदि ग्रंथों में भील माना गया है और भील को इस समय आदिवासी जनजाति का दर्जा प्राप्त है तो मुसहरों को दलित मानकर उपेक्षित क्यों छोड़ा जाए।
लोकप्रिय आईएसएस के बी सक्सेना द्वारा तैयार Action plan for Musahar राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की 2002-03 वार्षिक रिपोर्ट में दर्ज है।


