“धर्म उत्पीड़ित प्राणी की आह है, एक हृदयहीन संसार का हृदय है” मार्क्स ने ही कहा था बंधु
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“धर्म उत्पीड़ित प्राणी की आह है, एक हृदयहीन संसार का हृदय है” मार्क्स ने ही कहा था बंधु

“धर्म उत्पीड़ित प्राणी की आह है, एक हृदयहीन संसार का हृदय है” मार्क्स ने ही कहा था बंधु

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