अखिलेश सरकार की “मुनाफे के निजीकरण और घाटे के सरकारीकरण’’ की नीति के विरुद्ध प्रान्तव्यापी विरोध दिवस
अखिलेश सरकार की “मुनाफे के निजीकरण और घाटे के सरकारीकरण’’ की नीति के विरुद्ध प्रान्तव्यापी विरोध दिवस
लखनऊ सहित जिला मुख्यालयों व परियोजनाओं पर जोरदार विरोध प्रदर्शन
आन्दोलन और तेज करने की चेतावनी
लखनऊ। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संधर्ष समिति, उ प्र के आहवान पर आज सभी ऊर्जा निगमों के तमाम कर्मचारियों एवं अभियंताओं ने प्रदेश भर में सभी जिला मुख्यालयों, परियोजनाओं और राजधानी लखनऊ में जोरदार विरोध प्रदर्शन किये। समिति ने चेतावनी दी है कि यदि गाजियाबाद, मेरठ व वाराणसी के निजीकरण की प्रक्रिया तत्काल वापस न ली गयी तो आंदोलन और तेज किया जायेगा।
लखनऊ में शक्ति भवन पर बड़ी सभा हुयी। गाजियाबाद, मेरठ, वाराणसी, कानपुर, गोरखपुर, इलाहाबाद, आजमगढ़, मिर्जापुर, अनपरा, ओबरा, पिपरी, फैजाबाद, बरेली, बस्ती, गोन्डा, मुरादाबाद, सहारनपुर, अलीगढ़, बांदा, झांसी, आगरा, पनकी, हरदुआगंज और पारीछा में जोरदार विरोध प्रदर्शन हुये। लखनऊ में शक्ति भवन पर हुयी सभा को शैलेन्द्र दुबे, आर के सिंह, गिरीश पान्डेय, चन्द्रप्रकाश अवस्थी, बब्बू, सदरुद्दीन राणा, गिरीश चन्द्र शर्मा, राजेन्द्र घिल्डियाल, डी सी दीक्षित, बदरूदीन, पी के दीक्षित, विपिन वर्मा, सर्वेश चन्द्र द्विवेदी, पी एन तिवारी, विमलेश कुमार श्रीवास्तव, ए के श्रीवास्तव, सुरेश चन्द्र शर्मा, कन्हई राम, मोहनजी श्रीवास्तव, छोटे लाल दीक्षित, भगवान मिश्र, पूसे लाल ने मुख्यतया सम्बोधित किया।
संधर्ष समिति के पदाधिकारियों ने ऐलान किया कि निजीकरण की प्रक्रिया को अंजाम देने हेतु पावर कारपोरेशन द्वारा नियुक्त सलाहकार मेसर्स मेकान लि. के लोगों को डेटा एकत्र करने या किसी अन्य कार्य हेतु कार्यालयों व विद्युत उपकेन्द्रों में घुसने नहीं दिया जायेगा और न ही उन्हें कोई जानकारी दी जायेगी। यदि प्रबन्धन ने कोई जोर जबरदस्ती की तो तमाम कर्मचारी व अभियंता उसी क्षण काम बंद कर देंगे जिसकी जिम्मेदारी सरकार व प्रबन्धन की होगी।
मुनाफा कमा रहे शहरों की बिजली व्यवस्था निजी घरानों को सौपने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि एक ओर घाटे की दुहाई देकर निजीकरण के निर्णय लिए जाते हैं, दूसरी ओर मुनाफा दे रहे शहरों का निजीकरण किया जा रहा है तो सरकार यह बताये कि इससे पावर कारपोरेशन का घाटा और बढ़ेगा तो क्या घाटे की भरपाई के लिये टैरिफ बढ़ाकर आम जनता पर बोझ नही डाला जायेगा ?
आकड़े देते हुये उन्होंने बताया कि वर्ष 2013-14 में उ प्र पावर कारपोरेशन की औसत ए टी एन्ड सी हानियां 30.20 प्रतिशत थीं और प्रति यूनिट बिजली बेचने पर राजस्व वसूली रू 3.16 थीं। इसके विपरीत गाजियाबाद शहर के मण्डल- प्रथम की ए टी एण्ड सी हानियाँ 10.87 प्रतिशत और राजस्व वसूली रू 5.76 प्रति यूनिट तथा मन्डल- द्वितीय की ए टी एण्ड सी हानियाँ 7.26 प्रतिशत और राजस्व वसूली रू0 5.97 प्रति यूनिट हैं ऐसे में प्रदेश सरकार और पावर कारपोरेशन प्रबन्धन को बताना चाहिये कि गाजियाबाद शहर के निजीकरण का असली मकसद क्या है। इसी प्रकार मेरठ शहर के वितरण खण्ड-प्रथम में हानियाँ 25.50 प्रतिशत, राजस्व वसूली रू0 4.25 प्रति यूनिट, वितरण खण्ड द्वितीय में हानियाँ 17.76 प्रतिशत राजस्व वसूली रू0 5.15 प्रति यूनिट, वितरण खण्ड चतुर्थ में हानियाँ 15.30 प्रतिशत और राजस्व वसूली रू0 4.48 प्रति यूनिट है। कम हानि और अधिक राजस्व देने वाले शहरों का निजीकरण करके साफ तौर पर निजी धरानों को लाभ पहुँचाया जा रहा है जो जनहित में नहीं है।
संधर्ष समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि केस्को में हानियाँ 23.94 प्रतिशत और राजस्व वसूली रू0 4.35 प्रति यूनिट है जबकि निजी कम्पनी को सौंपे गये आगरा शहर से पावर कारपोरेशन को मात्र रू0 2.80 प्रति यूनिट मिल रहा है। आगरा में निजी कम्पनी मुनाफा कमा रही है और पावर कापोरेशन भारी घाटा उठा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीयत साफ है तो ‘‘ मुनाफे के निजीकरण और घाटे के सरकारीकरण’’ की नीति पर जनता के सामने सरकार निजीकरण की नीति की सफाई दे।
उन्होंने कहा कि संघर्ष समिति का फैसला है कि अब मुनाफा कमा रहे क्षेत्रों का किसी भी कीमत पर निजीकरण नहीं करने दिया जायेगा और आवश्यकतानुसार आन्दोलन और तेज किया जायेगा।


