राम प्रताप यादव
आज दिनभर अपनी मां को लेकर इस हॉस्पिटल से उस हॉस्पिटल दौड़ता रहा कि कहीं उसे भर्ती कर लिया जाय लेकिन सरकारी तो दूर प्राइवेट हॉस्पिटल भी मरीजों से खचाखच भरे हैं।
कहीं कोई बेड न मिला तो अंत में अपने हास्टल के साथी लोग काम आए और विवेकानन्द में भर्ती करवा पाया।
विवेकानन्द हॉस्पिटल कोई सरकारी हॉस्पिटल नहीं है, मगर यहां पांच छः घंटे में एक से बढ़कर एक क्रिटिकल मरीज के तीमारदारों को डॉक्टरों के आगे भीख मांगते हुए देखा कि कहीं उन्हें कोई एक बेड मिल जाय!

जिस लखनऊ पे मुझे इतना नाज़ है आज उसपे कोफ़्त हो रही है।
अखिलेशजी प्रदेश को साईकिल ट्रैक की जरूरत नहीं है, हॉस्पिटल की जरूरत है।
आज मन बहुत व्यथित है।
राम प्रताप यादव की फेसबुक टाइमलाइन से साभार