निमेष कमीशन पर अमल के लिये मानसून सत्र के दौरान
विधान सभा पर रिहाई मंच का घेरा डालो- डेरा डालो
लखनऊ 2 सितंबर। रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि अक्सर मस्जिदों और मदरसों को आतंकवाद का अड्डा कहा जाता रहा है जबकि हकीकत यह है कि खुफिया एजेंसियों के अधिकारी मस्जिदों और मदरसों में अपना अड्डा बनाये हुये हैं।

श्री शुएब ने कहा कि देश की सुरक्षा के नाम पर जिस तरीके से आईबी के लोग मुस्लिम नौजवानों से जज्बाती बातें करके उनको अपने गिरफ्त में लेते हैं और बाद में आतंकी वारदातों में फँसाते हैं, यह एक बहुत गम्भीर मसला है। जिस पर मदरसा संस्थानों और मस्जिदों के जिम्मेदारों को चैकन्ना रहना चाहिए और इनकी शिकायत हुकूमत से करनी चाहिए। ऐसे बहुत से संस्थान पूरे देश में है जहाँ पर खुफिया एजेंसियों के लोग गहरी पैठ जमाये हुये हैं और यह संस्थान के संज्ञान में भी है। पर डर की वजह से वे इसके खिलाफ नहीं बोलते ऐसे में हम उनसे अपील करते हैं कि यह आने वाली नस्लों की जिन्दगी का सवाल है और आने वाली हमारी नस्लें सुरक्षित रहें, किसी खालिद मुजाहिद या कतील सिद्दीकी की तरह हिरासत में न मारी जायें और न ही हजारों लड़के जिस तरीके से दहशतगर्दी के इल्जाम में बन्द है वैसी जिन्दगी जियें इसलिये खुफिया विभाग के लोगों की गैरकानूनी सरगर्मियों के खिलाफ आवाज बुलन्द करें।

रिहाई मंच के प्रवक्ता शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने कहा कि रिहाई मंच सत्र के पहले दिन 16 सितंबर से डेरा डालो-घेरा डालो अभियान विधानसभा धरना स्थल पर शुरू कर रहा है। सत्र के एक दिन पहले 15 सितंबर को शाम 6 बजे सरकार को चेतावनी देने के लिये एक मशाल जुलूस भी निकाला जायेगा। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ने 4 जून को यूपी कैबिनेट में आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट स्वीकारते हुये कहा था कि उसे वह एक्शन टेकन रिपोर्ट के साथ मानसून सत्र में रखेंगे और लगातार मानसून सत्र टालते रहे। वादा खिलाफ सपा सरकार के इस रवैए को देखते हुये रिहाई मंच ने एलान किया था कि जब तक वह निमेष कमीशन की रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखते हुये दोषी पुलिस व आईबी अधिकारियों को जेल की सलाखों के पीछे नहीं भेज देती और तारिक की रिहाई सुनिश्चित नहीं करती तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा। प्रवक्ताओं ने कहा कि सरकार को आर डी निमेष कमीशन की रिपोर्ट को एक्शन टेकन रिपोर्ट के साथ विधानसभा सत्र में रखना ही होगा।

पिछड़ा समाज महासभा के एहसानुल हक मलिक और शिवनारायण कुशवाहा ने कहा कि आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई की इस मुहिम को लेकर पूरे प्रदेश में अभियान चलाया जा रहा है। मौलाना खालिद मुजाहिद अब हमारे बीच नहीं है पर उन्होंने इंसाफ पसन्द अवाम को यह जिम्मा दिया है कि उनके ऊपर जो आतंकवाद के फर्जी ठप्पा लगाया गया है उसे हम मिटा के ही दम लें और इसी मुहिम के तहत हम गर्मी से लेकर बरसात तक आज चार महीने से इस विधानसभा धरना स्थल पर बैठे हैं। उन्होंने कहा कि हम अखिलेश सरकार से कहना चाहेंगे कि अगर उसने निमेष कमीशन की रिपोर्ट को मानसून सत्र में नहीं रखा तो उसके खिलाफ जो अवाम इस विधानसभा को घेरेगी उसकी गिरफ्त से भागना अखिलेश सरकार के लिये मुश्किल हो जायेगा। उन्होंने कहा कि मानसून सत्र के दौरान रिहाई मंच के घेरा डालो-डेरा डालो अभियान को सफल बनाने के लिये वो पूरे प्रदेश का दौरा करेंगे।

भारतीय एकता पार्टी (एम) के सैयद मोइद अहमद ने कहा कि जून 2007 में याकूब को बिजनौर के नगीना से पुलिस ने उठाया था तो वहीं नौशाद को राजस्थान के अलवर जिले के मिमराना इलाके से पुलिस ने पकड़ा था। याकूब को दो दिनों तक और नौशाद को 12 दिनों तक अवैध हिरासत में रखने के बाद यूपी एसटीएफ ने याकूब को चारबाग रेलवे स्टेशन और नौशाद की लखनऊ रेजीडेंसी से फर्जी गिरफ्तारी दिखाई। पुलिस के कहानी के मुताबिक उनके आतंकवादी होने की खबर मुखबिर ने दी थी। इन्हें सरेआम भीड़ में पकड़ने का दावा किया गया था लेकिन पुलिस के पास एक भी स्वतंत्र गवाह नहीं है। इनके पास से आरडीएक्स की बरामदगी बतायी गयी। पुलिस ने आम बेचने वाले की तराजू पर आरडीएक्स को तौलने का दावा किया है। लेकिन आम बेचने वाले को गवाह नहीं बनाया है। इसी तरह के झूठे मामलों में बिजनौर के नौशाद, अमरोहा के रिजवान व शाद, पश्चिम बंगाल के अजीजुर्रहमान, मो0 अली अकबर हुसैन, नूर इस्लाम, शेख मुख्तार और जलालुद्दीन को भी फाँसा गया है। लेकिन 2007 से ही ये बेगुनाह बच्चे जेलों में सड़ रहे हैं, जिन्हें छोड़ने का वादा करके सपा सरकार सत्ता में आयी। ऐसे बेगुनाहों को न्याय दिलाने के लिये हमने सरकार से माँग की कि वो इन गिरफ्तारियों की एनआईए से जाँच कराये।

पीस फेडरेशन के डॉ0 हारिस सिद्दीकी ने कहा कि शहीद मौलाना खालिद मुजाहिद को इंसाफ दिलाने और तारिक कासमी की बेगुनाही का सबूत आरडी निमेष कमीशन की रिपोर्ट पर अमल करवाने, मौलाना खालिद की मौत की सीबीआई जाँच कराने का वादा प्रदेश सरकार से पूरा करवाने, चुनावी घोषणा पत्र के वादे के मुताबिक दहशतगर्दी के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई व दहशतगर्दी के इल्जाम से बरी बेगुनाहों के पुनर्वास और मुआवजे, 2000 के बाद हुयी समस्त आतंकी घटनाओं की एनआईए से जाँच और सपा राज में हुये सांप्रदायिक दंगों की सीबीआई जाँच के लिये कल से रिहाई मंच का जन जागरुकता पखवाड़े के तहत पूरे प्रदेश में अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अभियान के तहत हम सपा सरकार जो अपने को मुस्लिम हितैषी होने का नाटक करती है उसकी कारस्तानियों को जनता के बीच ले जा रहे हैं और जनता को मानसून सत्र के दौरान विधान सभा पर रिहाई मंच के घेरा डालो - डेरा डालो में आने के लिये गोलबंद कर रहे हैं।

यूपी की कचहरियों में 2007 में हुये धमाकों में पुलिस तथा आईबी के अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से फँसाए गये मौलाना खालिद मुजाहिद की न्यायिक हिरासत में की गयी हत्या तथा आरडी निमेष कमीशन रिपोर्ट पर कार्रवायी रिपोर्ट के साथ सत्र बुलाकर सदन में रखने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को छोड़ने की माँग को लेकर रिहाई मंच का धरना सोमवार को 104 वें दिन भी जारी रहा।

धरने में अमित मिश्रा, जुबैर जौनपुरी, कमर सीतापुरी, भागीदारी आंदोलन के पीसी कुरील, सलीम राइनी, बदायूँ से आए अब्दुल फहीम खां, अख्तर परवेज, डा0 एएच लारी, शिवदास, गुफरान सिद्दीकी, पिछड़ा समाज महासभा के एहसानुल हक मलिक, शिवनारायण कुशवाहा, शाहनवाज आलम और राजीव यादव शामिल रहे।