जारी हुयी ‘‘विवेचना की धाँधलियों को परत दर परत खोलती गोरखपुर सीरियल ब्लास्ट पर रिहाई मंच की रिपोर्ट’’
धरने के 39 वें दिन सैकड़ों महिलायें उतरीं रिहाई मंच के धरने में
लखनऊ, 29 जून 2013। मौलाना खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस अधिकारियों की गिरफ्तारी, निमेष आयोग की रिपोर्ट पर तत्काल अमल करने और आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाह मुस्लिम नौजवानों को छोड़ने की माँग के साथ चल रहा रिहाई मंच का अनिश्चितकालीन धरना आज 39 वें दिन भी जारी रहा। आज धरने में इंडियन नेशनल लीग की सैकड़ों महिला कार्यकर्ता शामिल हुयीं। आज उपवास पर मौलाना कमर सीतापुरी बैठे।

कचहरी बम धमाकों में फर्जी तरीके से फँसाये गये आजमगढ़ के तारिक कासमी के चचा हाफिज फैयाज आजमी ने आज ‘‘विवेचना की धाँधलियों को परत दर परत खोलती गोरखपुर सीरियल ब्लास्ट पर रिहाई मंच की रिपोर्ट’’ को जारी करते हुये कहा कि जब मेरे बेटे को बेगुनाह मानते हुये सरकार मुकदमा वापसी की बात कह रही है तो आज हम सरकार से माँग करते हैं कि वो गोरखपुर समेत फैजाबाद, लखनऊ, बाराबंकी के सभी मामलों की पुनर्विवेचना कराये जिससे साफ हो सके कि असली गुनहगार कौन हैं। क्योंकि हमारा मकसद तारिक कासमी और दूसरे बेगुनाहों को बरी करा लेना ही नहीं है बल्कि पूरी दुनिया के सामने साबित करना है कि हुकूमत के नियन्त्रण में काम करने वाली एजेन्सियाँ मुसलमानों को झूठा फँसाकर उन पर जुल्म कर रही हैं।

इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुहम्मद सुलेमान और रिहाई मंच के अध्यक्ष मो0 शुऐब कहा कि गोरखपुर सीरियल ब्लास्ट हो या फिर कानपुर में बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा बम बनाते हुये फटने का मामला हो ये सभी प्रकरण साफ कर रहे हैं कि देश में सिर्फ गुजरात में किसी एक मोदी के राज में ही नहीं बल्कि पूरे देश में हिन्दुत्ववादी आतंकी संगठन और खुफिया एजेन्सियों साथ मिलकर इस जम्हूरियत को नेस्तानाबूद कर देना चाहती हैं। जिस तरह से इशरत जहाँ मामले में मोदी का नाम आ रहा है उसने साफ कर दिया है कि ये लोग पूरे देश में आन्तरिक युद्ध संचालित कर हैं। ऐसे में जब सवाल यूपी में हुयी आतंकी घटनाओं पर उठता है और उनमें भी हिन्दुत्ववादी आतंकी संगठनों, आईबी और एटीएस का रोल सामने आ रहा हो तो सपा सरकार को छिछली राजनीति से ऊपर उठकर देश की सुरक्षा के सवाल पर इन सभी घटनाओं की पुनर्विवेचना करानी चाहिये। क्योंकि पुनर्विवेचना ही वो तरीका है जिससे सरकार ने जो बेगुनाहों को छोड़ने का वादा किया है उसे भी पूरा कर सकती है और दूसरे आतंकी वारदातों को अंजाम देकर देश को तोड़ने की कोशिश करने वाले असली गुनहगारों को भी पकड़ सकती है।

अवामी काउंसिल के महासचिव असद हयात ने जाँच एजेन्सियों पर मुस्लिम विरोधी हाने का आरोप लगाते हुये कहा कि गोरखपुर सीरियल ब्लास्ट मामले में तारिक कासमी समेत सैफ, सलमान, मिर्जा शादाब बेग को झूठी कहानी और झूठे साक्ष्य गढ़कर फसाया गया जिसका मकसद उन हिन्दुत्ववादी साम्प्रदायिक तत्वों को बचाना था, जो इस पूरे मामले के असल अभियुक्त हैं। आज यह रिपोर्ट स्पष्ट कर रही है कि कोई भी ऐसा चश्मदीद गवाह नहीं है जिसने किसी भी व्यक्ति को गोरखपुर के तीनों स्थलों पर साइकिलें खड़ी करते हुये और उसने उन्हीं साइकिलों से विस्फोट होते हुये देखा था। पुलिस द्वारा घटना के बाद जो स्केच जारी किये गये और जिनका प्रकाशन हुआ वो किसकी चश्मदीद गवाही और शिनाख्त के बाद बनाये गये थे, वो किसके थे यह मुकदमे के किसी भी रिकॉर्ड से साबित नहीं है।

उन्होंने इसी तरह इस मामले के अहम गवाह मरहूम मौलाना अफजालुल हक का बयान कि तारिक कासमी 21 मई की शाम को उनके मदरसे में दो अन्य के साथ साइकिलें लेकर आया था, भी विश्वसनीय नहीं है। राजू उर्फ मुख्तार जिसको सैफ बताया जा रहा है और छोटू जिसको सलमान बताया जा रहा है, इस पूरे मामले में पुलिस द्वारा दो गढ़े गये व्यक्ति हैं। पहले आफताब आलम अंसारी को राजू उर्फ मुख्तार बताया जा रहा था परन्तु लखनऊ न्यायालय द्वारा यह नहीं माना गया और आफताब को बरी कर दिया गया। वाराणसी कचहरी विस्फोट के मामले में सैफ को अभियुक्त बनाया गया था और मुकदमे में उस पर यह आरोप था कि उसी ने राजू उर्फ मुख्तार नाम रखकर धमाके किये परन्तु विवेचना के दौरान ही यह कहानी दम तोड़ गयी और सबूत के अभाव में विवेचक द्वारा अन्तर्गत धारा 169 सैफ को बरी कर दिया गया। तारिक कासमी जो कथित इकबालिया बयान दिनाँक 22 दिसम्बर 2007 पुलिस बताती है, वह निमेष आयोग द्वारा फर्जी करार दिया जा चुका है। इस पूरे मामले में कोई सीधा और परिस्थितिजन्य साक्ष्य पुलिस के पास नहीं है। धमाके कैसे हुये और इसकी किस तरह तैयारियाँ की गयीं इस सम्बन्ध में जो तारिक और सलमान के बयान पुलिस रिकॉर्ड में हैं वो सभी परस्पर विरोधी हैं। तारिक कासमी सलमान और सैफ की कोई शिनाख्त परेड तथाकथित गवाहों के सामने नहीं कराई गयी बल्कि तारिक कासमी का फोटो दिखाकर साइकिल विक्रेताओं के झूठे बयान लिख लिए गये।

इंडियन नेशनल लीग के प्रदेश अध्यक्ष एडवोकेट मोहम्मद समी और हाजी फहीम सिद्दीकी ने कहा कि इस जालिम हुकूमत की वादाखिलाफी की वजह से जेल में बंद हम अपने बेगुनाह भाइयों से रिहाई मंच के इस धरने से कहना चाहेंगे कि लू के थपेड़ों से शुरु हुये इस आन्दोलन में जिस तरह से आज इस बरसात और उमस के दौर में लखनऊ की गलियों से निकलकर महिलायें शिरकत कर रही हैं वो साफ कर रहा है कि जेलों में बन्द हमारे बेगुनाह बच्चों की लड़ाई लड़ने को उनकी मातायें-बहनें अब सड़क पर उतर चुकी हैं। हम साफ कर देना चाहते हैं कि चाहे वो भारत की आजादी का आन्दोलन रहा हो या फिर विभिन्न देशों में हुयी क्रान्तियाँ सबके इतिहास के पन्ने इस बात की गवाही करते हैं कि जब आधी दुनिया (महिलायें) सड़क पर उतर जाती हैं तो बड़ी-बड़ी जालिम हुकूमतों को नेस्तानाबूद कर देती हैं। आज वो तहरीक यूपी के सड़कों पर शुरु हो गयी है।

आज रिहाई मंच के धरने का संचालन सोशलिस्ट फ्रंट के मो0 आफाक ने किया। आज ‘‘विवेचना की धाँधलियों को परत दर परत खोलती गोरखपुर सीरियल ब्लास्ट पर रिहाई मंच की रिपोर्ट’’ मुख्यमंत्री को भेजते हुये जैद अहमद फारुकी, डॉ. जीमल अहमद अंसारी, पीसी कुरील, एहसानुल हक मलिक, शफात अली, शिवनारायण कुशवाहा, तहसीन, रईस जहां, भवरनाथ पासवान, नूर जहां, कैसर जहां, रुबीना, शुऐब, रहमतुन, जुबैर जौनपुरी, सायरा, जैनबख् तबस्सुम, रफी, साइमा, फैज, सालिहा, शहजादे मंसूर, रुखसार, कानपुर से आशा कटियार, रेखा मिश्रा, नजमा, सलमा, असगरी, उज्मा, हासमी, सालिहा, मुजीबुन मुन्ना खां, मुहम्मद रफीक, उस्मान अली, अली मुशीर जैदी, जाहिद, शन्नो, जीनत, अफरोज, हसीना, कनीज, सीबा, नसरीन बानो, तौहीदा, प्रबुद्ध गौतम, शाहनवाज आलम और राजीव यादव मौजूद थे।