अतीक - मुख्तार तो मफिया हैं लेकिन राजा भैया - अभय सिंह साधू, वाह मिस्टर क्लीन
अतीक - मुख्तार तो मफिया हैं लेकिन राजा भैया - अभय सिंह साधू, वाह मिस्टर क्लीन
मसीहुद्दीन संजरी
नरम हिंदुत्व अपनाने वाले दलों के बीच यूपी में होने वाला गठबंधन एक बार फिर धराशायी हागा। इसमें सबसे अधिक मार अखिलेश की समाजवादी पार्टी पर पड़ने वाला है।
किसी ज़माने में कांग्रेस भाजपा के हाथ से मुद्दा छीनने के लिए बाबरी मस्जिद का ताला खुलवाने में अपनी भूमिका निभाई थी। नतीजा यह हुआ कि उसका पूरा वोट बैंक भाजपा के साथ चला गया, मुसलमानों ने उसे छोड़ा तो आज तक करीब नहीं हो पाए और बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद तो वह यूपी से कटी पतंग ही हो गई। लेकिन समय और नेतृत्व परिवर्तन के साथ लोग उस इतिहास को भूलने लगे।
उत्तर प्रदेश के टीपू ने मुज़फ्फरनगर दंगों के आरोपियों जो खुली राहदारी दी और लव जिहाद और गो हत्या के नाम पर गुंडागर्दी करने वालों की तरफ से आंखें बंद रखीं यह नरम हिंदुत्व ही तो था। वरना क्या कारण हो सकता है कि अतीक और मुख्तार तो मफिया हैं लेकिन राजा भैया और अभय सिंह साधू। भोपाल फर्जी इनकाउंटर के खिलाफ शान्तिपूर्ण विरोध जताने वाले रिहाई मंच के नेताओं पर लाठियां बरसाना और नजीब को ढूंढने की मांग करने वाले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों को लहू लुहान करने के पीछे अखिलेश उर्फ टीपू की यही मांसिकता तो काम कर रही थी।
मिस्टर अखिलेश अगर संघ–भाजपा के सामने शिव सेना की साम्प्रदायिकता नाकाम हो जाती है तो आपको भी नाकामी का मुंह देखना ही पड़ेगा।


