अभियोजन चाहे तो इस मुकदमे को पांच सौ साल तक खींच सकता है
अभियोजन चाहे तो इस मुकदमे को पांच सौ साल तक खींच सकता है
मसीहुद्दीन संजरी
गुलज़ार अहमाद वानी कशमीर का निवासी और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में पीएचडी का छात्र, 16 साल पहले गिरफ्तार किया गया। बाराबंकी, लखनऊ,कानपुर, आगरा और दिल्ली में उस पर आतंकवादी हमले के 11 मुकदमे कायम किए गए। इनमें से दस में वह बरी हो गया। बाराबंकी के साबरमती ट्रेन ब्लास्ट मामला अभी चल रहा है। उसकी ज़मानत पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने इस साल नवम्बर तक ज़मानत पर रिहाई का आदेश दिया है चाहे तब तक फैसला आए या नहीं।
जानते हैं आतंकवाद के मामलों में अक्सर सुनवाई किस तरह होती है? तो सुनिएǃ
गुलज़ार वानी के मुकदमें में कुल 96 गवाह हैं और 16 साल की सुनवाई में अब तक 76 गवाहों की गवाई पूरी हो पाई है।
गुलज़ार वानी आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के शुरूआती दौर में पकड़ा गया था। उस समय हमारी एजेंसियां उतनी प्रोफेशनल नहीं थीं। अब बहुत कुछ बदल गया है।
अहमदाबाद धमाका केस में गवाहों की संख्या करीब 2700 है। इस हिसाब से अगर अभियोजन चाहे तो इस मुकदमे को पांच सौ साल तक खींच सकता है।


