आज़म खां के समर्थन में सपा का स्वयंसेवक राज्यपाल पर जवाबी हमला
आज़म खां के समर्थन में सपा का स्वयंसेवक राज्यपाल पर जवाबी हमला
लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के अमर्यादित व लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध आचरण पर जवाबी हमला बोला है। पार्टी ने कहा है कि राजनीति विचारधारा के आधार पर कुछ आदर्शो और मूल्यों के लिए होती है। इसमें नीतियों को लेकर आलोचना-प्रत्यालोचना की जाती है। लेकिन इधर राजनीति विचारधारा शून्य और चरित्र हनन की हो रही है।
दरअसल मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने उत्तर प्रदेश के संसदीय कार्यमंत्री आजम खां की योग्यता पर सवाल उठाए थे। अगले ही दिन सपा ने प्रेसनोट जारी कर जहां आजम की योग्यता का जमकर बखान किया वहीं बिना नाम लिए राज्यपाल के आचरण पर हमला बोला। पार्टी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आजम खां पर पूरा भरोसा करते हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राज्यपाल ने 8 मार्च की विधानसभा की कार्यवाही सुनने के बाद शुक्रवार को विधानसभा अध्यक्ष और सूबे के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने आज़म खां की योग्यता पर सवाल खड़े किए थे और इस संबंध में उन्होंने मुख्यमंत्री से मिलने की इच्छा जाहिर की थी।
राज्यपाल ने पत्र में विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पाण्डेय की जहां तारीफ की, वहीं उनकी ही एक टिप्पणी को लेकर उनसे चर्चा करने की मंशा भी जाहिर की थी।
पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने शनिवार को प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा है कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी सरकार की जनता में बढ़ती लोकप्रियता से कुछ तत्व घबराकर इसकी छवि को बिगाड़ने में लग गए हैं। वे आए दिन एक न एक मंत्री को निशाना बनाकर अपनी घटिया मानसिकता का प्रदर्शन कर रहे हैं।
चौधरी ने कहा कि गायत्री प्रसाद प्रजापति के बाद अब आजम खां को आलोचना का शिकार बनाया जा रहा है। आज़म खां कई दशकों से राजनीति में हैं और छात्रकाल से लेकर अब तक उनका संघर्षपूर्ण जीवन रहा है। राजनीति में उनका जो स्थान बना है, वह उन्होंने संघर्षो से हासिल किया है। उनकी देशव्यापी ख्याति है।
उन्होंने कहा कि आज़म खां संसदीय राजनीति के कुशल महारथी, प्रखर वक्ता और विपक्ष की आलोचनाओं का तुर्की-ब-तुर्की जवाब देने वालों में है। वह धर्म निरपेक्षता के प्रबल पक्षधर हैं। मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व के प्रति उनकी प्रतिबद्धता जगजाहिर है।
चौधरी ने कहा कि आज़म खां की बेबाकी के सभी कायल हैं। उनके संसदीय कौशल की प्रशंसा विपक्ष के नेता विधानसभा में भी करते हैं। उनका वाक्चातुर्य विलक्षण है। उनकी प्रतिभा और योग्यता पर सवाल उठाना किसी भी तरह उचित नहीं है। किसी नेता का सार्वजनिक जीवन पारदर्शी होता है, आजम खां की जिंदगी खुली किताब है।
दरअसर राज्यपाल राम नाईक पुराने समर्पित स्वयंसेवक रहे हैं, लेकिन उन्हें यह यक़ीन ही नहीं हो पा रहा है कि वे उत्तर प्रदेश जैसे बड़े सूबे के राज्यपाल जैसे गरिमामयी संवैधानिक पद पर आसीन हैं। राम नाईक लगातार नेता विरोधी दल की तरह बर्ताव करते रहते हैं और राजनीतिक दलों के निशाने पर आ जाते हैं। हालांकि लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध आचरण करने वाले राम नाईक अकेले राज्यपाल नहीं है, कई अन्य राज्यों के राज्यपाल भी इस कतार में शामिल हैं।


