ग़रीबी उन्‍मूलन दरअसल ग़रीबों के खात्‍मेम का कार्यकम है, एक वैसा ही जैसा आर्थिक सुधार योजनाओं के जनसंहार।

वाममोर्चा के भूमि सुधार अत्‍यंत के वित्‍तमत्‍त्री अशोक मित्र और मौलिक राश्‍ट्रीयकरण और ग़रीबी उन्‍मूलन कार्यकम के मुख्‍य सूत्रधार डॉ.अशोक मित्र का साक्षात्‍क छापा है आज आनंद बाजार के संपादकीय पेज में, जिसमें उन्‍होंने मौजूदा वाम नेतृत्‍व पर निरम्‍म प्रहार करते हुए वाम आंदोलनों के तमाम अंतर्विरोधों का खुलासा करते हुए साफ-साफ कहा कि आज के वामपंथी आत्मघाती है लेकिन इस देश में वाम पंथ के अलावा कोई दूसरा विकल्प भी नहीं है इस जनसंहार बंदोबस्त के विरुद्ध प्रतिबंध के लिए।

पलाश विश्वास

हफ़्तेभर बाद सब्ज़ी बाजार जाना हुआ। शनिवार दिलित किसान परिवार से हैं और अपनी इसकी क़ात के मुताबि़क हवा उठाने में मेरे लिए निर्देश है। इसलिए पांवे जमीन पर ही रहते हैं।लगभग चौथाई शताब्दी जहां बिता दिए, उस स्थायीत्व में सारे मामूली लोग मेरे परिचित आत्मीयजन हैं और खासमखास मेरे लिए तो कोई भी नहीं है।

दफ़्तर से लौटने के बाद रात चौथी बजे से सुबह साढ़े पांच बजे में अपने पीस के साथ रहता हूँ। इसलिए नींद से जागकर बाजार जाने से पहले मैंने अख़बार नहीं देखा था। बाजार गए तो छोटे दुकानदारों, सब्ज़ीवालों और बाजार में मौजूद लोगों ने मेरी घेराबंदी कर दी। तमाम प्रशन करने लगे लोग।