आम का आम और गुठलियों का वाम
आम का आम और गुठलियों का वाम
अभिनव श्रीवास्तव
आम, आम, आम, आम....
वाम, वाम, वाम, वाम....
आम-वाम, वाम-आम, आम-वाम, वाम-आम....
....
........
राम... राम,...राम... राम!!!
नाम, नाम , नाम, नाम
सिर्फ इसका ही ताम झाम...
पीछे छूटती ‘आ वाम’....
वाम, वाम, वाम, वाम !
कुछ को नाम...
कुछ को दाम..
ये सब कुर्सी का संग्राम
वाम, वाम, वाम, वाम !
इन आमों के कितने नाम..
कच्चा आम, पक्का आम..
लंगड़ा आम, तगड़ा आम...
इन आमों के कितने धाम
देखने वाला है हैरान..
पूछने वाला है बदनाम...
वाम, वाम, वाम, वाम !
आम है वाम या वाम है आम..
सर न खपाओ करो आराम..
अपने-अपने हिस्सों का फिर..
सब पा जाएंगे ईनाम...
वाम, वाम, वाम, वाम...
वाम! वाम! वाम! वाम!
आम-वाम, आम-वाम, वाम-आम, वाम-आम??
पूर्ण विराम ! पूर्ण विराम ! पूर्ण विराम ! पूर्ण विराम
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