इजरायल को दुनिया के नक्शे से मिटा दिया था मोदी की प्रोपेगैण्डा कम्पनी ने
इजरायल को दुनिया के नक्शे से मिटा दिया था मोदी की प्रोपेगैण्डा कम्पनी ने
मीडिया में मजाक का विषय बन गये हैं अब मोदी
शेष नारायण सिंह
जून के तीसरे हफ्ते में उत्तराखण्ड की भयावह त्रासदी की खबर के आने के साथ इंसानियत दहल उठी थी, जिसने जहाँ सुना, वहीं सन्नाटे में आ गया। चारधाम यात्रा का सीज़न था तो पूरे भारत से लोग उत्तराखण्ड के गढ़वाल इलाके में पहुँचे हुये थे। जब भारी बारिश की खबर आयी तो तबाही इस हिमालयी इलाके के हर कण में आ चुकी थी। तीर्थयात्रा पर आये लोग और पर्यटक सभी मुसीबत से आमने सामने थे। भारतीय आपदा प्रबन्धन तन्त्र हरकत में आ गया था, सेना बुला ली गयी थी, भारत तिब्बत सीमा पुलिस और आपदा प्रबन्ध के लिये तैयार की गयी फोर्स सब जुटे हुये थे। उत्तराखण्ड की सरकार समेत सभी सरकारें जिनके लोग यहाँ फंसे थे, चिन्तित थीं। बचाव और राहत का कार्य युद्धस्तर पर चल रहा था। राज्य सरकारें भी सक्रिय हो गयी थीं। जिन यात्रियों को सेना के लोग बचाकर देहरादून तक ला रहे थे उनको उनके घर तक पहुँचाने में राज्य सरकारें जुटी हुयी थीं और अपना काम कर रही थी। इस बीच खबर आयी कि 21 जून की शाम को गुजरात के मुख्यमन्त्री नरेंद्र मोदी देहरादून पहुँच गये हैं। उनके वफादार टी वी चैनलों में हाहाकार मच गया और इस तरह से ख़बरें आने लगीं कि बस अब मोदी जी पहुँच गये हैं सब कुछ ठीक हो जायेगा। 23 जून की सुबह खबर चलना शुरू हो गयी कि उन्होंने उत्तराखंड की दुर्गम पहाड़ियों में फँसे हुये 15000 गुजरातियों को तलाश लिया और उनको वापस गुजरात भेज दिया। मोदीत्व के प्रभाव वाले चैनलों की यह मुख्य खबर थी। किसी ने एक सेकण्ड के लिये भी नहीं सोचा कि इस कारनामे को अंजाम देने के बारे में मोदी की पी आर एजेन्सी से आयी हुयी खबर को जाँच परख कर चलाया जाये। लेकिन किसी ने कोई जाँच पड़ताल नहीं की , कहीं कुछ नहीं हुआ और खबर धड़ाधड़ चलने लगी। नरेंद्र मोदी को एक बार फिर मीडिया ने हीरो के रूप में पेश कर दिया था। उनके समर्थकों ने फेसबुक पर तूफ़ान मचा दिया कि जो काम सेना की सारी ताक़त लगी होने के बावजूद नहीं हो सका वह मोदी की उपस्थिति मात्र से हो गया। खबरों में बताया गया कि मोदी के साथ 80 इनोवा कारें थीं। मीडिया में शुरू के दो दिन तो यह भी ख़बरें चलायी गयीं कि मोदी जी के साथ कई विमान भी थे, 25 वातानुकूल बसें थीं और कुछ बहुत ही काबिल अफसर थे।
किसी ने नहीं पूछा कि भाई जब उन दुर्गम इलाकों में फँसे लोगों को निकालने के लिये सेना, रस्सी के पुल बनाकर, एक-एक करके लोगों बचाने की कोशिश कर रही थी तो इनकी इनोवा कारें कैसे वहाँ पहुँच गयीं। बाद में देश के लगभग सभी अखबारों में यह छपना शुरू हो गया कि मोदी ने ऐसा कुछ नहीं किया था। यह केवल उनका मीडिया मैनेजमेन्ट था जिसके कारण यह प्रचारित कर दिया गया था। बाद में मीडिया के ज़रिये देश को पता चला कि जब सड़कें तबाह नहीं हुयी थीं तो देहरादून और केदारनाथ के बीच की दूरी 221 किलोमीटर थी। अब तो वह एक महाप्रलय का क्षेत्र है। वहाँ इनोवा क्या, आदमी पैदल नहीं पहुँच सकता लेकिन मोदी के पी आर प्रबन्धकों ने एक ऐसा काम कर दिखाया और मोदी को महामानव साबित करने के अपने प्रोजेक्ट पर इतना जोर दे दिया कि एक हास्यास्पद स्थिति पैदा हो गयी। बाद में तो सबको पता लग गया कि यह 15000 लोगों को बचाने वाला भी कारनामा ठीक वैसा है जिस तरह नरेंद्र मोदी को विकास का महानायक बताया जाता है जबकि पहले से विकसित गुजरात राज्य को उन्होंने विकास के हर पैमाने पर कई राज्यों से पीछे धकेल दिया है। बाद में तो भाजपा के दिल्ली दफ्तर में ही 15000 वाला केस मजाक का विषय बना दिया गया।
मोदी अब मीडिया में मजाक का विषय बन गये हैं। देश के अँग्रेज़ी के सबसे बड़े अखबार ने लिखा है कि हर क्षेत्र में मोदी का बखान बड़ी-बड़ी बातें और ब्लफ़ के ज़रिये किया जाता है लेकिन हिमालय में उनकी बहादुरी के बारे में बोला गया यह झूठ शुद्ध रूप से बेशर्म झूठ है।
अब बातें पब्लिक डोमेन में आ रही हैं। धीरे- धीरे पता चल रहा है कि नरेंद्र मोदी की असफलताओं के बावजूद मीडिया उनको क्यों हीरो के रूप में पेश करता है। उन्होंने एक अमरीकी प्रचार एजेन्सी को गुजरात सरकार की छवि चमकाने के काम में लगा रखा है। सरकार की छवि चमकाने के लिये उस एजेन्सी को नरेंद्र मोदी की छवि भी चमकानी पड़ती है। यह एजेन्सी है ऐपको वर्ल्डवाइड। अमरीका की यह कम्पनी लॉबीइंग उद्योग की सबसे बड़ी कम्पनी है। अपने परिचय वाले ब्रोशर में इस कम्पनी ने लिखा है कि ऐपको वर्ल्डवाइड सरकारों, राजनेताओं और बहुत बड़ी कम्पनियों को प्रोफेशनल और दुर्लभ सेवा उपलब्ध कराती है। इसकी स्थापना 1984 में मार्जारी क्रॉस ने किया था। उस वक़्त की दुनिया सबसे बड़ी वकीलों की फर्म आर्नाल्ड एण्ड पोर्टर की एक सहायक कम्पनी के रूप में ऐपको वर्ल्डवाइड ने काम शुरू किया। इसके नाम के पहले दो अक्षर ए और पी भी अपनी मुख्य कम्पनी के नाम से ही लिये गये हैं। आर्नल्ड एण्ड पोर्टर इजरायल की सबसे बड़ी फर्म है। अमरीका और दुनिया भर में इजरायल को बहुत ही पवित्र देश के रूप में पेश करने के अपने प्रोजेक्ट के चलते ऐपको वर्ल्डवाइड और उनकी मालिक कम्पनी आर्नल्ड एण्ड पोर्टर ने इसलाम को बहुत ही खूँखार रूप में पेश कर रखा है।
ऐपको वर्ल्डवाइड पूरी दुनिया में युद्ध को बढ़ावा देने का काम करती है। इसके पास ऐसे हज़ारों लोग काम करते हैं जो युद्ध को बढ़ावा देते हैं। इस कम्पनी के मुख्य उद्देश्यों में हथियारों की अधिक से अधिक बिक्री करवाना शामिल है क्योंकि हथियार लॉबी के बड़े खिलाड़ियों के लिये यह काम करते हैं। यह श्रीलंका की सरकार के साथ भी है और इजरायली खुफिया एजेन्सी मोसाद के ज़रिये तमिल आतंकवादियों को भी ट्रेनिंग दिलवाती है। दोनों को जो हथियार मिलते हैं वे सब एप्को वर्ल्डवाइड के मुवक्किलों के कारखानों में ही बनते हैं। यहूदीवाद के समर्थक बहुत सारे संगठन ऐपको वर्ल्डवाइड के सहयोगी हैं और उसके साथ व्यापारिक रिश्ते रखते हैं। ऐपको वर्ल्डवाइड का हेरिटेज फाउन्डेशन, फ्रन्टियर ऑफ फ्रीडम, जेविश पॉलिसी सेन्टर आदि से बहुत ही करीबी सम्बन्ध हैं। इराक और इरान पर अमरीकी नीतियों पर ऐपको वर्ल्डवाइड का भारी असर है। अमरीका और यूरोप में इस्लाम को डरावना साबित करके ही इस कम्पनी ने इराक के युद्ध के पक्ष में माहौल बनाया था। उस दौर में अमरीकी राष्ट्रपति जार्ज बुश और ब्रिटिश प्रधानमन्त्री टोनी ब्लेयर को ऐपको वर्ल्डवाइड की मदद मिल रही थी। इराक पर हमले के बाद एप्को वर्ल्डवाइड ने अमरीकी ठेकेदारों को इराक के पुनर्निर्माण के बड़े- बड़े ठेके दिलवाये। ऐपको वर्ल्डवाइड के काम के बारे में कहा जाता है कि वह ऐसी लॉबीइंग फर्म है जो सांसदों, विधायकों और कानून बनाने वालों को प्रभावित करके कम्पनियों को लाभ पहुँचाती है। यह ऐसी कम्पनी है जो सरकारों के क़ानून भी अपने मुवक्किलों के हिसाब से बनवा देती है। यह फर्जी एन जी ओ और अन्य स्वयंसेवी संगठनों की स्थापना भी करवाती है और अगर कोई सरकार ऐपको वर्ल्डवाइड के मुवक्किल के पक्ष में काम नहीं कर रही है तो अपने कारपोरेट सहयोगियों से धन लेने वाले एन जी ओ संगठनों की मार्फ़त उन सरकारों के खिलाफ आंदोलन भी करवाती है। जो लोग भारत में पिछले कुछ वर्षों से आये हुये आन्दोलनों की बाढ़ से अवगत हैं उनको इन एनजीओ आन्दोलनों में भी कुछ इस तरह के सन्देश नज़र आ सकते हैं। इस कम्पनी में काम करने वाले या बाहर से सहयोग करने वालों में बहुत बड़े पत्रकार और वकील शामिल हैं। इरान पर हमला करने का जो औचित्य तैयार किया गया उसको इसी कम्पनी में काम करने वाले दो वकीलों जेफरी स्मिथ और जान बेलिंजर ने लिखा था। अमरीकी नामी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने उसे छापा भी था। साथ में यह भी बताया था कि उस लेख के लेखक कौन लोग हैं। इस शताब्दी की जो सबसे बड़ी अफवाह है कि “इजरायल दुनिया के नक्शे से गायब हो गया है“ ने भी इसी कम्पनी की कृपा से अमरीकी मीडिया में प्लांट किया गया था। इसका मकसद इरान पर हमला करवाना था। मलयेशिया के तत्कालीन उप प्रधानमन्त्री, अनवर इब्राहीम के चरित्र पर लांछन लगवाकर उनको सत्ता से बेदखल करवाकर उनके राजनीतिक जीवन को चौपट करने का काम भी एप्को वर्ल्डवाइड ने ही किया है। मलयेशिया की सरकार इनकी एक प्रमुख मुवक्किल है। अनवर इब्राहीम आजकल एप्को वर्ल्डवाइड के खिलाफ अपने देश में आन्दोलन चला रहे हैं।
इसी एप्को वर्ल्डवाइड को नरेंद्र मोदी की छवि को चमकाने के काम पर लगाया गया है। गुजरात सरकार इस काम के लिये बहुत बड़ी रकम भी दे रही है। एप्को वर्ल्डवाइड के ग्राहकों में मोदी के अलावा कई देशों के तानाशाह भी हैं। नाइजीरिया के तानाशाह सानी अबाचा और कजाखस्तान के आजीवन राष्ट्रपति नुरसुल्तान अबिशुली नज़रबायेव भी एप्को वर्ल्डवाइड के मुवक्किल हैं। यही कम्पनी नरेंद्र मोदी की पी आर एजेन्सी है। हिमालय में मोदी के कारनामे का प्रचार जिस तरह से किया गया वह तो कुछ नहीं है। क्योंकि इरान पर हमला करवाने के लिये यही कम्पनी “इजरायल को दुनिया के नक्शे से हटा भी चुकी है “और अमरीकी और इजरायली मीडिया ने इस खबर को उसी तरह से चलाया था जिस तरह से भारतीय मीडिया के एक वर्ग ने बिना सोचे समझे प्रचार किया था कि नरेंद्र मोदी ने इनोवा कारों पर बैठाकर कुछ ही घंटों में 15000 गुजरातियों को बीन-बीन कर केदारनाथ से निकाल लिया था और उनको सुरक्षित उनके घरों पर पहुँचा दिया था जबकि उस इलाके की सभी सड़कें भारी बारिश के कारण तबाह हो चुकी थीं।


