एएमयू में मुलायम का विरोध सपा के खात्मे में अहम साबित होगा- रिहाई मंच
एएमयू में मुलायम का विरोध सपा के खात्मे में अहम साबित होगा- रिहाई मंच
इलाहाबाद, 24 फरवरी 2014। रिहाई मंच ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों व शिक्षकों द्वारा सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के प्रस्तावित दौरे का विरोध करके जिस तरह मुलायम को बैकफुट पर आने को मजबूर किया, उसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए बधाई दी है।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र नेता व रिहाई मंच के राज्य कार्यकारिणी सदस्य अनिल यादव और मोहम्मद आरिफ ने कहा कि जिस तरीके से पिछले दो सालों में सपा की हुकूमत ने मुजफ्फरनगर से लेकर कोसी कलां, अस्थान, फैजाबाद, बरेली समेत पूरे प्रदेश में सौ से अधिक सांप्रदायिक हिंसा करवाकर पूरे मुस्लिम समाज को दंगाईयों के हवाले कर दिया है, ऐसे में सपा मुखिया को विश्वविद्यालय में घुसने न देने का फैसला करके अलीगढ़ मुस्लिम विश्वद्यिालय के छात्रों ने जुल्म और जालिम हुकूमतों के खिलाफ प्रतिरोध को नया मकाम दिया है। उन्होंने कहा कि मुलायम सिंह को समझ लेना चाहिए कि युवाओ का यह प्रतिरोध उस राजनीति का स्वर है जिसे कुछ प्रायोजित प्रतिनिधित्व मंडलों और प्रायोजित रैलियों के माध्यम से मैनेज नहीं किया जा सकता।
रिहाई मंच के राज्य कार्यकारिणी सदस्य लक्ष्मण प्रसाद ने अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी के छात्रों द्वारा आगामी लोकसभा चुनावों में सपा को वोट न देने के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अगर सत्ता जुल्म और ज्यादती की राजनीति करती है तो उसके समानांतर इसंाफ की राजनीति को स्थापित करना ही होगा। जिस तरह से मोदी का नाम आने के बाद गुजरात जनसंहार की तस्वीरें सामने आ जाती हैं, ठीक उसी तरह आज मुलायम-अखिलेश का नाम आने के बाद मुजफ्फरनगर के जलते हुए घर, मां-बहनों की साथ की गई बदसलूकी और कत्ल कर दिये गए लोगों की तस्वीरें सामने आ जातीं हैं। मुलायम को समझ लेना चाहिए की अलीगढ़ के छात्रों ने जो दिशा दी है उसी दिशा पर पूरे उत्तर प्रदेश की इंसाफ पसन्द अवाम है, जो किसी लैपटाॅप की लालची या सैफई में होने वाले नाच-गाने में शौक नहीं रखती, उसे इसांफ चाहिए।
रिहाई मंच ने कहा कि इस वक्त इंसाफ पसन्द अवाम को चौकन्ना रहना चाहिए क्योंकि कुछ कबूतरबाज नेता जिनकी विचारधारा अवसरवादी है, मुजफ्फरनगर सांप्रदायिक हिंसा के पहले कोसी कलां, फैजाबाद, बरेली, अस्थान जैसी सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं पर सपा को क्लीन चिट देने की हर संभव कोशिश करते नजर आते थे, वे आजकल चुनावी मौसम में नए घोसलों की तलाश में है।


