एक और सच पूजा-पाठ का
एक और सच पूजा-पाठ का
कुलीना कुमारी
भारत विभिधताओं वाला देश है और यहां विभिन्न प्रकार के पर्व त्योहार मनाए जाते हैं, अर्थात यहां व्रत व पूजा-पाठ का विशेष महत्व है। हमारे व्रत-त्योहार हमारे रीति-रिवाज व परंपरा के द्योतक है। हमारी परंपरा के मुताबिक, हमारा भारत पुरुष प्रधान समाज है। यद्यपि थोड़ा समय बदला है, बाहरी तौर पर कुछ परंपरा भी बदलती हुई दिखी है लेकिन कई व्रत-त्योहार का रूप लगभग पहले के तरह ही है। जैसे रक्षा बंधन, भैया दूज का त्योहार बहन द्वारा भाई की सुख-समृद्धि के लिए किए जाते हैं। तीज, करवाचौथ, शुक्र व गुरुवार व्रत कथा आदि पति के कामना के लिए व जितिया व्रत पुत्र की लंबी आयु के लिए किए जाते हैं।
पिछले महीने रक्षाबंधन के अवसर पर बेटी ने कहा कि हम ही क्यों भाई की पूजा करते हैं, भाई तो हमारे लिए कोई पूजा नहीं रखता, आगे उसने प्रश्न किया था कि महिला ही क्यों व्रत करती है?
इस संदर्भ में मेरा सोचना ये है कि व्रत बेशक पुरुषों के नाम पर हो लेकिन इससे महिलाओं को कुछ खास फायदे जरूर मिलते हैं। चूंकि आज भी अधिकतर घरों में महिला सबसे बाद में खाती है, पूजा-पाठ के नाम पर व्रत करने से या कुछ निश्चित समय तक भूखे रहने से उसके लिए फल-मूल आते हैं व महिला को मधूर भोजन प्राप्त करने का अवसर प्राप्त होता है। विशेष व्रत के अवसर पर, नए कपड़े पहनने की परंपरा की वजह से भी महिला को फायदा मिलता है, व्रत-त्योहार के नाम पर ही सही, नए कपड़े तो उसके लिए आते हैं। वैसे व्रत करने से महिला को कितनी मानसिक शांति मिलती है, ये तो पता नहीं, लेकिन पूजा के नाम पर समाज में भी व्यक्ति का मान बढ़ता है।
दुर्गा पूजा एक ऐसा पर्व है जिसमें महिला देवी की पूजा होती है और इस पूजा में स्त्री के अलावा पुरुष भी बढ़-चढ़कर भाग लेते हैं। दस दिन तक चलने वाला इस पूजा में कन्या भोजन भी कराया जाता है, व उसे दक्षिणा के साथ-साथ उसके पैर भी छुए जाते हैं। यह कैसी विडंबना है कि साल भर पुरुष द्वारा महिला के खिलाफ अपनी मर्जी से दुर्व्यवहार किया जाता है, कन्या भ्रूण हत्या से लेकर उसके साथ किए जाने वाले भेदभाव, हिंसा व गलत तरीके से उस पर अधिकार जताने के प्रयास के साथ और भी बहुत कुछ। मुझे तो लगता है कि पुरुष समाज द्वारा साल भर किए जाने वाले महिला के प्रति दुर्व्यवहार बनाम हिंसा की वजह से उपजे अपराधबोध को कम करने का एक छोटा सा उपाय है-दुर्गा पूजा के नाम पर किए जाने वाले कन्या पूजन।
हमारे धर्म में काले कारनामे करके उसको धोने का अच्छा उपाय दिया गया है। हमारे धर्माधिकारी के अनुसार, साल भर जितना भी पाप करना हो, शौक से कीजिए, असत्य भाषण से लेकर, धोखा, ठगीपन, कमजोरों पर अत्याचार या फिर और भी बहुत कुछ। बस किसी महŸवपूर्ण तिथि में जाकर गंगा स्नान कर लीजिए, आपके सारे पाप धुल जाएंगे। अथवा किसी ईश्वर के दरबार में जाकर उनसे माफी मांग लीजिए, पाप खतम, अपराध खतम।
पता नहीं कब तक किसी मजबूत द्वारा कमजोरों पर शोषण होता रहेगा लेकिन धर्म के नाम पर पुण्यात्मा व विनम्रता का ढोंग किया जाता रहेगा।


