ऐसा छप्पन इंच का सीना किन किसानों का है जो कर्ज न चुकाने की हिम्मत करें
ऐसा छप्पन इंच का सीना किन किसानों का है जो कर्ज न चुकाने की हिम्मत करें
कारपोरेट वकील जेटली किसानों को कर्ज माफ करने के खिलाफ हैं
पलाश विश्वास
फिलहाल यूपी चुनाव में किसानों के कर्ज माफ करने के लिए भगवा वायदे के बाद मध्यप्रदेश में किसानों पर भगवा फायरिंग में किसानों के मारे जाने के बाद किसानों को जो राजनीतिक आंदोलन देशभर में रोज तेज हो रहा है, उसकी मुख्य मांग कर्ज माफी है।
इस सिलसिले में महाराष्ट्र में किसानों ने जब आंदोलन तेज कर दिया तो वहां की भगवा सरकार ने किसानों को आम कर्ज माफी का ऐलान कर दिया है और मध्य प्रदेश सरकार ने भी लगातार तेज होते आंदोलन के बजाय केंद्र में भगवा राजकाज के तीन साल परे होने के मोदी जश्न के लगभग गुड़गोबर होने की आशंका के मद्देनजर कर्ज माफी का वायदा कर दिया है। अमल होने के आसार नहीं हैं।
राजस्थान में किसान आंदोलन तेज होता जा रहा है तो बाकी राज्य सरकारों पर दबाव बढ़ता जा रहा है कि वे किसानों का कर्ज माफ कर दें।
इस सिलसिले में बैंकरों का कहना है कि किसान कर्ज इसलिए नहीं चुका रहे हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि सरकार उनका कर्ज माफ कर देगी। गौरतलब है कि केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने किसान आंदोलन के सिलसिले में किसानों को कर्ज माफी की केंद्र सरकार की जिम्मेदार टालने की रणनीति के तहत बैंकरों से मुलाकात की।
गौरतलब है कि पेशे से कारपोरेट वकील जेटली किसानों को कर्ज माफ करने के खिलाफ हैं और इस सिलसिले में उन्होंने पहले ही साफ कर दिया है कि कर्ज माफी का आर्थिक बोझ संबंधित राज्य सरकार को ही उठाना होगा।
बहरहाल मीडिया के मुताबिक जेटली की इस बैठक में कई सरकारी बैंकों के अधिकारी शामिल हुए। इस बैठक में कई बैंकरों ने आरोप लगाया कि किसान सरकार द्वारा कर्ज माफी की उम्मीद में जान बूझकर बैंक द्वारा लिया गया लोन नहीं चुकाते हैं। बैंकरों ने वित्तमंत्री और मंत्रालय के अधिकारियों के साथ हुई बैठक में भी अपनी चिंता बताई।
अब सवाल है कि बैंक किन किसानों को कर्ज देती है और वे किसान कौन हैं जो कर्ज नहीं चुका रहे हैं। समझने वाली बात यह कि भारतीय बैंक छोटे किसानों को कर्ज देने के बाद छोटी सी छोटी रकम वसूलने के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ते। ऐसा छप्पन इंच का सीना किन किसानों का है जो कर्ज माफी के इंतजार में कर्ज न चुकाने की हिम्मत करें और बैंक भी उनसे कर्ज वसूल न कर सके। जाहिर है कि जानबूझकर कर्ज न चुकाने की हैसियत रखने वाले किसान यकीनन खुदकशी नहीं करते।
जाहिर है कि भारतीय बैंकिग को दुहने वाले पूंजीपतियों, कारपोरट कंपनियों और सत्ता वर्ग के लोगों के अलावा बेहिसाब जमीन रखने वाले बड़े और संपन्न प्रभावशाली किसानों का एक तबका भी है, जो किसी तरह का टैक्स नहीं भरते और न खुद खेत जोतते हैं, आधुनिक काल के वे जमींदार हैं, जो बैंकों का कर्ज बिना चुकाये कर्ज माफी की रकम भी हजम करने वाले हैं।
हालात पर थोड़ा विस्तार से गौर करें तो मुक्तबाजारी महाजनी सभ्यता के ताने बाने बैंकरों ने कहा, किसानों में कर्ज न चुकाने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। इसकी वजह से बैंकों पर वित्तीय दबाव बढ़ता जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार पूरे देश में किसानों पर करीब 10 लाख करोड़ रुपये के कर्ज हैं।
बैंकरों ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में किसानों द्वारा लिया गया लोन 50 प्रतिशत बढ़ा है। एक बड़े के अधिकारी ने कहा कि किसान अपने बैंक खाते से पैसे निकाल रहे हैं ताकि उनके कर्ज का पैसा बैंक अपने आप न काट लें। दक्षिण भारत के एक सार्वजनिक क्षेत्र के एक बैंक ने बताया कि कुछ जगह लोन न चुकाने वाले बैंकों से कर्ज माफी की मांग कर रहे हैं. मुंबई स्थित एक बैंक के सीईओ ने कहा कि अगर किसी को ये लगता हो कि कोई उसे एक लाख रुपये का चेक दे देगा तो वो कर्ज क्यों चुकाएगा?


