कांग्रेस को मिटा कर कुछ और नया खड़ा करने की कवायद केवल आरएसएस भाजपा के उत्थान के रूप में सामने आई
कांग्रेस को मिटा कर कुछ और नया खड़ा करने की कवायद केवल आरएसएस भाजपा के उत्थान के रूप में सामने आई
राहुल गांधी का बर्कले में सम्बोधन और बात चीत।
राहुल गांधी आज देश के सबसे महत्वपूर्ण राज नेता हैं अगर भाजपा आरएसएस के खिलाफ कोई सार्थक और प्रभावी संघर्ष का सवाल है।
जिस प्रकार से उनके ऊपर पिछले 10 सालों से आरएसएस भाजपा आक्रमण कर रही है और उन्हें पप्पू घोषित करने में लगी है वह अकारण नहीं है।
राहुल गांधी कांग्रेस से हैं, उस कांग्रेस से जिसकी आलोचना कर बुद्धिजीवी वर्ग अपने क्रांतिकारी होने का तमगा लेता रहा है। anti congressism खुद में एक पर्याप्त बात मानी जाती रही है, इसलिए उस बुद्धिजीवी वर्ग के लिए अपने उस grooves से निकलना मुश्किल रहा है। लेकिन देर सबेर उस वर्ग को भी यह अंदाजा हो रहा है कि कांग्रेस को मिटा कर कुछ और नया खड़ा करने की कवायद केवल आरएसएस भाजपा के उत्थान के रूप में सामने आई है।
राहुल की बर्कले की speech को ध्यान से सुनने की आवश्यकता है। वो speech एक conviction के साथ दी गयी और उसमे वह सब कुछ है जो भारत के बुद्धिजीवी वर्ग को अपनी पूर्व सोच को revise करने को मजबूर कर सके।
यह देश हित मे होगा कि विकल्प की राजनीति के रोमानी चिंतन को केवल एकेडेमिक्स तक फिलहाल रखा जाए और वास्तविक राजनीतिक धरातल पर उतर कर देश की राजनीति पर समझ बनाई जाए और अगर कोई ऐसा करेगा तो उसे राहुल और कांग्रेस के प्रति अपनी सोच बदलनी ही पड़ेगी ।
Still we need to criticize Congress but we also need to criticize it sympathetically.


