कांग्रेस मुक्त भारत नहीं अब भाजपा के अलग-थलग पड़ने का दौर होगा
कांग्रेस मुक्त भारत नहीं अब भाजपा के अलग-थलग पड़ने का दौर होगा
पाँच राज्यों के चुनाव परिणाम पर रंजीत वर्मा की टिप्पणी
भाजपा वहीं वहीं सफलता के झंडे गाड़ पा रही है जहाँ-जहाँ कांग्रेस थी।
असम में वह सत्तारूढ़ हुई क्योंकि वहां कांग्रेस थी जैसे कि केंद्र में हुई थी 2014 में लेकिन देखिये क्या हाल हुआ बंगाल में ममता के तृणमूल कांग्रेस के सामने, तमिलनाडु में जयललिता के एडीएमके के सामने और केरल में वामपंथियों के सामने। उन जगहों को लेकर बस यही शोर सुनाई दे रहा है कि खाता खुल गया खाता खुल गया। काहे भाई काहे का ये शोर। तो वे कहेंगे इसलिए कि इन जगहों में अपना कोई आधार नहीं था। तो यह उपलब्धि हुई न !
अच्छा,अगर यही बात है तो बताओ कि बिहार में काहे सिमटे।
लालू-नितीश ने कैसा लपेटा था भूल गए क्या। बिहार में तो तुम्हारा अच्छा आधार रहा था और आज भी है तो फिर ? दिल्ली में भी आप ने बुरी तरह धोया था। और अगले साल मायावती से भी पार नहीं पाओगे।
सीधी बात यह है कि क्षेत्रीय दलों से भाजपा टकरा नहीं पा रही है। ये वही क्षेत्रीय पार्टियां हैं जिन्होंने कांग्रेस के वर्चस्व को तोड़ा था। कायदे से इसकी शुरुआत आप 1967 से समझ सकते हैं। तब इन्होंने सात राज्यों से कांग्रेस को उखाड़ फेंका था। आज इनकी जड़ें बहुत मज़बूत हो चुकी है। इसलिए भाजपा की सारी उम्मीदें कांग्रेस पे टिकी हैं। कांग्रेस जितनी जगहों से हटेगी उतनी ही जगह इन्हें मिलेगी। इसलिए ये कांग्रेस मुक्त भारत की बात करते हैं।
अगर भाजपा में ताकत होती तो वह कांग्रेस मुक्त भारत की जगह क्षत्रप दलों से मुक्त भारत की बात करती।
ज़रा सोचिये कि कांग्रेस के पास जगह ही कितनी बची है भाजपा को देने के लिए। यानि कि एक बात साफ़ है कि भाजपा जितनी भी चौड़ी होगी कांग्रेस जितनी है उतनी ही भर रहेगी या कहिये उससे भी कम ही।
यह सब जानते हैं कि भविष्य में जो महागठबंधन बनेगा वह भाजपा के खिलाफ होगा और उसकी अगुवाई कांग्रेस के हाथ में होगी क्योंकि क्षेत्रीय दलों के बीच वही एकमात्र ऐसी पार्टी होगी जो देश भर में चुनाव लड़ सकती है और सफलता भी पा सकती है। और इस तरह क्षेत्रीय दलों के बीच प्रतीकात्मक रूप से देश का राजनैतिक प्रतिनिधित्व करने वाली वही एकमात्र पार्टी होगी। यह मैं तब की बात कर रहा हूँ जब कांग्रेस आज से भी ख़राब स्थिति में चली जाएगी। तब जो दौर शुरू होगा वह भी कांग्रेस मुक्त भारत का नहीं होगा बल्कि सच पूछिए तो भारतीय राजनीति में भाजपा के अलग-थलग पड़ने का दौर होगा। कांग्रेस का नंबर उसके बाद आएगा।


