कांग्रेसी मूर्खता की विराटता बनाम बीजेपी भक्ति वैभव
कांग्रेसी मूर्खता की विराटता बनाम बीजेपी भक्ति वैभव
शैलेन्द्र कुमार शुक्ल
हम पिछले कई दशकों से मूर्खता की विराटता से मुक्ति पाने के लिए लड़ते रहे हैं, इसी बीच हमने हड़बड़ाहट में भक्ति के बेहूदे गड़गच्छ में छलांग लगा दी। निष्कर्ष वही हुआ जिसे 2014 के नाम से जाना जाता रहेगा। हमें जहां बुद्धि से काम लेना चाहिए वहाँ हम भावना का वरण करने की आदिम गलती दोहराते आए हैं। यह गलती दोहरा कर हम कोई नया काम नहीं करते, हम अपने गोल-दायरे में कई सदियों की गंध लिए विचित्र भ्रम में जीने की पुष्टि करते रहें हैं।
हम पतित होने को पवित्र समझने की आदत डाल रहे हैं। लेकिन यह समझदारी लाठी, बंदूक और तोप के रास्ते से तो दिमाग में घुसाई नहीं जा सकती यह तो तय है, लेकिन भक्ति का क्या कीजे! यह मूर्खता का लैटेस्ट वर्जन है।
हम मूर्खता से देश को जोतते हैं और भक्ति के बीज बोते हैं। लेकिन सच मानिए कितने-कितने जतन के बावजूद कमाई परिहल और परती ही हो जाती है।
कांग्रेसकाल से मुक्ति पा चुकी भारत की जनता बीजेपी के भक्ति काल में जार-जार रो रही है। उसका कोई सैयां-गोसइयाँ नहीं है। सारी उम्मीदों पर पानी फिर चुका है। दो साल में सिर्फ जनता को जुमलेबाजी ही हाथ लगी। आज झूठ और फरेब में गदराए वलिंटियर जनता को मुह दिखाने का मौसम नहीं खोज पा रहे हैं। बौरये कूकुर की तरह भक्त सीधे मुँह किसी से बात नहीं करते। सोशल साइटस फेसबुक और वाट्सप ग्रुप्स पर तो लोग 14 इंजेक्नश का डोज़ कब तक लें। हर जगह इनसे सावधान रहना होता है। सत्ता के विपक्ष पर आप से बात सुन कर ये भक्त आप को नेस्तनाबूत करने की भरसक कोशिश में अपने प्राणों की आहुति देने के लिए तैयार रहते हैं। ये भक्त उच्च-वर्गीय मानसिकता के कलुषपात्र होते हैं, ये संख्या में शुद्ध एक-वचन भी नहीं होते लेकिन बहुवचन होने का दंभ दिखाते हैं।
देश में क्या बदलाव हुआ है यह किसी से छुपा नहीं। जनता ने बदलाव की उम्मीद भर की थी, जिसका परिणाम वह भुगत रही है। आज एक विकल्पहीन बदलाव हमारे सामने है यानी मूर्खता की जगह भक्ति ने ले ली है। भक्ति मूर्खता से जटिल उपाधि है। बदलाव हुआ है इसे आप नकारेंगे तो भक्त आप पर हमला करने की पुरजोर कोशिश करेंगे। वह केवल इसे ही बदलाव मानते हैं कि कांग्रेस की जगह बीजेपी ने ले ली है। लेकिन जनतंत्र के लिए क्या मूलभूत परिवर्तन हुआ और जनता को उससे क्या लाभ हुआ यह सवाल संदिग्ध समझा जाता है।
आज सत्ता की जन विरोधी नीतियों का विरोध करना बराबर खतरनाक होता जा रहा है। हम आतंकवाद की बेहूदी परिकल्पना से लगातार घिरते जा रहे हैं। समाज को देश हित में सोचना राष्ट्रद्रोह के हिस्से की चीज समझा जा रहा है। यहाँ अंध भक्ति है। यहाँ जबरन भक्ति है। यहाँ आततायी भक्ति है। भक्ति का ऐसा कुरूप चेहरा भारत ने पहले कभी नहीं देखा होगा। यह भक्ति मूर्खता का चरम उत्थान है। इस भक्ति का उद्भव और विकास मूर्खता से हुआ है। यह सौ फीसदी सच है कि कांग्रेस को मूर्खता ले डूबी तो इसमें भी कोई दो-राय नहीं बीजेपी को भक्ति ले डूबेगी।


