केंद्र सरकार की डीएनए प्रोफाइलिंग योजना जासूसी करने की तानाशाही की प्रकृति
केंद्र सरकार की डीएनए प्रोफाइलिंग योजना जासूसी करने की तानाशाही की प्रकृति
केंद्र सरकार की डीएनए प्रोफाइलिंग योजना जासूसी करने की तानाशाही प्रकृति
नई दिल्ली, 26 अगस्त। डीएनए प्रोफाइलिंग के लिए केंद्र सरकार की योजना को कांग्रेस ने 'सनकी नियंत्रण' ('control-freak') और तानाशाही की प्रकृति करार दिया है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार शुरू से ही लोगों की जासूसी करने और निजता में झांकने की प्रवृत्ति से ग्रसित रही है और इसी मकसद से वह अब जल्दबाजी में डीएनए विधेयक लाकर उसे संसद में पारित कराना चाहती है।
आज यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक विशेष संवाददाता सम्मेलन में कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस विधेयक को सरकार ने मानसून सत्र में राज्यसभा में पेश किया था लेकिन इसको लेकर विपक्षी दलों के रुख को भांप कर इसे वापस ले लिया और फिर आनन फानन में सत्र समापन के महज दो दिन पहले लोकसभा में पेश कर दिया। उन्होंने कहा कि यह लोगों की निजता से जुड़ी सूचना का मामला है और इसकी सुरक्षा को लेकर संसद में इस पर व्यापक विचार विशर्म आवश्यक है।
श्री सिंघवी ने कहा कि लोगों का डाटा सुरक्षित रखने के लिए डाटा सुरक्षा विधेयक प्रस्तावित है। उसमें डाटा की सुरक्षा को लेकर व्यापक व्यवस्था की गयी है तो सरकार उससे पहले डीएनए विधेयक क्यों ला रही है इस बारे में उसे स्पष्ट करना चाहिए। इस विधेयक को लाने में सरकार जल्दबाजी क्यों कर रही है इस पर पूरा देश उससे सवाल पूछ रहा है और उसे लोगों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए इसका जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल डीएनए प्रोफाइल के डेटा एकत्र करने के बारे में बात करता है लेकिन यह डेटा सुरक्षा के बारे में बात नहीं करता है।
The Bill only talks about collecting data of DNA profiles but it does not talk about data protection: @DrAMSinghvi
— Congress Live (@INCIndiaLive) August 26, 2018
उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों की निजता का सम्मान करना चाहिए और देशवासियों के डाटा की सुरक्षा का पहले पुख्ता इंतजाम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधेयक लाने का जो मकसद सरकार बता रही है वह स्पष्ट नहीं है। विधेयक में किए गए प्रावधान लोगों के निजी डाटा के संरक्षण की गारंटी नहीं दे रहा है इसलिए इस विधेयक में जल्दबाजी करने की बजाए इसे गंभीरता से लेना चाहिए और पहले डाटा सुरक्षा से जुड़े उपाय करने चाहिए।
उन्होंने कहा कि डीएनए विधेयक मोदी सरकार द्वारा स्नूपिंग का एक और उदाहरण है। जब इस विधेयक को राज्यसभा में पेश किया गया था, तो राज्यसभा के कई सदस्यों को इस विधेयक पर संदेह था। तो सरकार ने इसे राज्यसभा से वापस ले लिया और इसे राज्य सभा में पेश किया। उन्होंने कहा कि यह सरकार लोगों की निजता और देश की विविधता में विश्वास नहीं रखती।
LIVE: Press briefing by MP and @INCIndia spokesperson @DrAMSinghvi. https://t.co/gJCKfl2WUW
— Congress Live (@INCIndiaLive) August 26, 2018


