CO की हत्या की CBI जाँच को अखिलेश तैयार, विपक्ष ने कहा गुण्डा राज और मोदी राज कायम

बोला रिहाई मंच, मुलायम सिंह से भी बदतर और विफल अखिलेश

सरकार पर दबाव बनाने को राजा भैया हुये सक्रिय

नई दिल्ली/ लखनऊ, 04 मार्च 2013: लगता है कुण्डा के राजा उत्तर प्रदेश की अखिलेश सिंह सरकार की बलि लेने की पटकथा लिखने पर काम कर रहे हैं। पुलिस उपाधीक्षक जिया उल हक की हत्या के बाद चौतरफा दबाव में आयी प्रदेश सरकार ने हालाँकि राजा भैया पर मुकदमा भी कायम करा दिया है और राजा भैया ने मन्त्रिमण्डल से इस्तीफा भी दे दिया है लेकिन मुख्यमन्त्री अखिलेश सिंह का तनाव इससे कम नहीं हो रहा है। विपक्षी दल जहाँ आरोप लगा रहे हैं कि प्रदेश में गुण्डा राज ही नहीं बल्कि मोदी राज भी कायम है वहीं राजा भैया भी सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

बताया जाता है कि उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ जिले में मारे गये पुलिस उपाधीक्षक जिया उल हक की धरने पर बैठी पत्नी और परिजनों से मिलने गये मुख्यमन्त्री अखिलेश सिंह यादव का देवरिया में जमकर विरोध हुआ और लोगों ने राजा भैया के खिलाफ नारेबाजी करते हुये उन्हें गिरफ्तार करने की माँग की। गुस्साये लोग “राजा भैया को गिरफ्तार करो” के नारे लगा रहे थे।

पुलिस उपाधीक्षक की पत्नी परवीन ने मुख्यमन्त्री के देवरिया नहीं आने पर अपने पति का शव मुख्यमन्त्री आवास लखनऊ ले जाने की घोषणा कर सरकार की मुसीबत बढ़ा दी थी। इस ऐलान के बाद अखिलेश सिंह यादव, कैबिनेट मन्त्री मौ. आज़म खाँ के साथ देवरिया पहुँचे। सूत्रों का कहना है कि उन्होंने कहा कि अगर परिवार चाहेगा तो वो केन्द्र से इस मामले की सीबीआई जाँच की सिफारिश करने को तैयार हैं। इसके अलावा उन्होंने परिवार को भरोसा दिया कि अगर राजा भैया इस मामले में दोषी साबित हुये (?) तो उनकी गिरफ्तारी होगी।

उधर इस मसले पर राज्य की राजनीति गरमा गयी है। विधानसभा में मुख्य विपक्षी दल बहुजन समाज पार्टी के नेता स्वामी प्रसाद मौर्य ने आरोप लगाया है कि एक साल के कार्यकाल में अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश को केवल 'गुण्डा राज और जंगल राज' दिया है। जबकि स्वयं समाजवादी पार्टी के अन्दर भी इस घटना को लेकर जबरदस्त नाराजगी बतायी जा रही है। बताया जाता है कि नगर विकास मंत्री मोहम्मद आज़म खान ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि प्रतापगढ़ की घटना ने मुँह दिखाने लायक नही छोड़ा।

पुलिस उपाधीक्षक हक की हत्या की गूँज आज (सोमवार को) विधानसभा में भी सुनायी दी। इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दलों के जोरदार हंगामे के कारण प्रश्नकाल नहीं हो सका। कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर ने बाद में पत्रकारों से कहा कि सरकार कानून-व्यवस्था के मोर्चे पर नाकाम रही है और सूबे में बढ़ती अपराधों की संख्या इसका सुबूत है।

रिहाई मंच ने अखिलेश यादव सरकार को कानून व्यवस्था के मोर्चे पर अपने पिता मुलायम सिंह यादव से भी बदतर और विफल करार देते हुये कहा है कि पूरे प्रदेश में जंगल राज कायम हो गया है जिसमें सबसे बुरी स्थिति मुसलमानों की है।

टांडा में हुये मुस्लिम विरोधी हिंसा और कुंडा में रघुराज प्रताप सिंह के गुंडों द्वारा पुलिस अधिकारी जिया उल हक की हत्या पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मो. शुऐब और महासचिव पूर्व पुलिस महानीरिक्षक एस. आर. दारापुरी ने कहा कि अखिलेश सरकार को बताना चाहिये कि गुण्डे सरकार चला रहे हैं या खुद उनकी सरकार गुण्डों की भूमिका में आ गयी है। नेताओं ने सपा सरकार में हुये 11 बड़े दंगे, चार हजार हत्यायें और तीन हजार बलात्कार का जिक्र करते हुये कहा कि जब सरकार अपने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की रक्षा नहीं कर सकती तो जनता को कैसे सुरक्षा मुहैया करायेगी। रिहाई मंच के नेताओं ने कहा है कि जिस तरह टांडा में हिन्दू युवा वाहिनी के नेता की व्यक्तिग रंजिश में हुयी हत्या के बाद हिन्दुत्ववादी संगठनों से जुड़े अपराधियों ने पुलिस की मौजूदगी में चालीस मुसलमानों के घर फूँक दिये उससे साफ हो गया है कि प्रदेश में सिर्फ जंगल राज ही नहीं मोदी राज भी कायम हो गया है।

रिहाई मंच के नेताओं ने कहा कि अगर प्रतापगढ़ के अस्थान गांव में हुये मुस्लिम विरोधी हिंसा जिसमें राजा भैया के समर्थकों ने चालीस मुस्लिमों के घर जला दिये थे, उसके अपराधियों को सरकार ने जेल भेज दिया होता तो आज राजा भैया के गुंडे सीओ जिया उल हक को मारने की हिम्मत नहीं करते। इसी तरह अगर सरकार ने फैजाबाद में हुये मुस्लिम विरोधी दंगों में ईमानदारी से अपनी जिम्मेदारी निभायी होती तो टांडा के चालीस मुसलमानों के घर आगजनी के शिकार नहीं हुये होते।

उधर बताया जाता है कि सरकार पर दबाव बनाने के लिये राजा भैया ने भी कमर कस ली है। खबर है कि उनके समर्थक ग्यारह विधायकों ने ने आज उनसे मुलाकात कर उनके साथ रहने की कसमें खायीं। हालाँकि राजा अगर विद्रोह करते भी हैं तो भी सरकार की सेहत पर कोई अस पड़ने वाला नहीं है इसलिये राजाभैया की इस कवायद को स्वयं की गिरफ्तारी से बचने के लिये सरकार पर दबाव बनाने का प्रयास माना जा रहा है।