इटावा। चंबल घाटी में करीब एक हजार करोड़ की लागत से बन रही इटावा भिंड रेल परियोजना शुरू होने से पहले ही रेलवे संरक्षा विभाग के निशाने पर आ गई है। असल मे रेलवे अफसरो ने चंबल नदी पर बनाये गये पुल के एक पिलर में आई दरार को दूर किये बिना ही संरक्षा विभाग से एनओसी लेने की कवायत काफी मंहगी साबित हो चली है। इसी कारण संरक्षा आयुक्त ने अपना दौरा तो किया लेकिन रेलवे पुल की दरार समेत तमाम खामियों के सामने आने के बाद सीआरएस ने अपना दौरा बीच मे ही रदद कर दिया।
गुना-इटावा रेल लाइन प्रोजेक्ट के अंतिम चरण को कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) की हरी झंडी नहीं मिल पाई है। इस प्रोजेक्ट के भिंड-इटावा सेक्शन पर यात्री ट्रेन के लिए अभी कुछ और समय इंतजार करना होगा।
रेलवे के सीआरएस (कमिश्नर आफ रेलवे सेफ्टी) पीके बाजपेई ने भिंड-इटावा ट्रैक का निरीक्षण किया। निरीक्षण के लिए वे अन्य अधिकारियों के साथ भिंड स्टेशन से मोटर ट्राली में बैठकर गए, लेकिन जाने से पहले सीआरएस श्री बाजपेई स्टेशन पर ही रेलवे के अधिकारियों पर भड़क गए। उन्होंने यहां तक कह दिया कि तुम्हारे जीएम ने 10 बार फोन किया, तो आया हूं, इस ट्रैक का निरीक्षण करने। हालांकि फटकार के बाद स्टेशन पर मौजूद विभाग के सभी अधिकारी चुप्पी साध गए।
दरअसल, बात ट्राली में निरीक्षण पर साथ चलने को लेकर थी। सीआरएस ने स्थानीय अधिकारियों को कुछ चुनिंदा लोगों के नाम ही बताए। इस पर यहां मौजूद रेलवे के एक अधिकारी ने दूसरे कुछ लोगों के नाम का भी सुझाव दे दिया। इस पर सीआरएस भड़क गए। उन्होंने कहा कि हम टेक्नीकल निरीक्षण करने जा रहे हैं, इसमें भीड़ को साथ लेकर चलने की कोई आवश्यकता नहीं है। मालूम हो कि सीआरएस श्री बाजपेई ने भिंड से इटावा के बीच ट्रैक का निरीक्षण किया। वे चंबल पुल के पिलर में आई दरार के कारण निरीक्षण से संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने जल्द ही दोबारा से उक्त ट्रैक का निरीक्षण करने की बात कही है। सीआरएस की स्पेशल ट्रेन उनके साथ इटावा तक गई। हालांकि निरीक्षण में संतुष्ट हो पाने के कारण उन्होंने इटावा से भिंड के लिए ट्रेन को फुल स्पीड में दौड़ाने की बात से इंकार कर दिया।
ग्वालियर से भिंड का सफर सीआरएस पी के बाजपेई ने स्पेशल ट्रेन से तय किया। वे भिंड स्टेशन पर आए, तो अधिकारियों से पूछा कि ग्वालियर-भिंड के बीच ट्रेन की स्पीड क्या है। जवाब मिला 80 किमी/घंटा। साथ ही, अधिकारियों ने सीआरएस को यह भी बताया कि उक्त स्पीड तब से ही निर्धारित है, जब से ट्रैक चालू हुआ था। इस पर सीआरएस श्री बाजपेई ने पूछा कि इतनी स्पीड क्यों है, इसे बढ़ाया जाए। स्थानीय अधिकारियों ने कहा कि एक सेक्शन में वैल्डिंग का काम रह गया है, उसे पूरा कर रहे हैं, जिसके बाद जल्द ही ट्रेन आपके जीएम के दस बार फोन करने पर यहां आया हूं, आपको पता है या नहीं ।
उत्तर प्रदेश और मध्यप्रदेश की सीमा पर स्थित चंबल नदी के पुल पर एक दरार ने इस लाइन पर यात्री ट्रेन चलने की संभावनाओं पर फिलहाल विराम लगा दिया। हालांकि इस पुल के निर्माण के कुछ अरसे बाद ही यह दरार सामने गई थी। वहीं रेलवे अधिकारी यह दावा कर रहे थे कि इसे लेकर ज्यादा गंभीर चिंता की जरूरत नहीं है पर सीआरएस ने इसी आधार पर यात्री ट्रेन चलाने की अनुमति देने से इंकार कर दिया।
इस पुल को लेकर आईआईटी कानपुर की टीम ने एक स्टडी रिपोर्ट तैयार की है। सीआरएस श्री वाजपेयी ने बताया कि वे इस रिपोर्ट को पढ़ने के बाद ही फैसला लेंगे। इसके बाद वे एक बार और ट्रेक का निरीक्षण करेंगे। हालांकि उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया कि वे पुल इसके निरीक्षण पर कब जाएंगे।
गौरतलब है कि गुना-इटावा लाइन के इस अंतिम चरण का काम डेढ़ साल पहले हो चुका है। इस दौरान रेलवे द्वारा इस पर परीक्षण भी कराए गए। पर सीआरएस की हरी झंडी मिलने से इस पर सवारी गाड़ियों को नहीं चलाया जा रहा है।
1986 में गुना-इटावा रेल लाइन प्रोजेक्ट के पहले चरण को मंजूरी दी गई थी। इसके तहत गुना से शिवपुरी तक 102 किमी रेल लाइन बिझाई गई। भिंड-इटावा सेक्शन मात्र 36 किलोमीटर दूर है । इसे पूरा होने में सबसे ज्यादा देर लगी है। यह काम पिछले 13 साल से चल रहा है। इसमें वन पर्यावरण मंत्रालय की अनुमति मप्र एवं उप्र के बीच विवादों ने लंबे समय तक काम अटकाए रखा। रेलवे संरक्षा आयुक्त पीके बाजपेई की कसौटी पर नवनिर्मित भिंड-इटावा रेलवे ट्रैक खरा नहीं उतर सका। चंबल पुल के आसपास ट्रैक पर कई खामियां पाकर वे निर्माण कार्य कराने वाले इंजीनियरों पर जमकर बरसे। यहीं नहीं उदी स्टेशन पर भी उनको काफी खामियां मिली। इंजीनियरों द्वारा उनके सवालों का सही जवाब न दे पाने पर उन्होंने आगामी निरीक्षण से पूर्व सारी खामियां दूर करने के कड़े निर्देश दिए। उनके निरीक्षण और वार्तालाप से यही प्रतीत हो रहा था कि भिंड रेल सेवा के लोकार्पण के लिए आम जनता को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। गुना से भिंड होते हुए इटावा को रेलमार्ग से जोड़ने का सपना करीब 29 साल पूर्व तत्कालीन रेल मंत्री माधवराव सिंधिया ने संजोया था। तमाम अड़चनों को पार करते हुए इस सेवा का निर्माण कार्य इस साल फरवरी में पूरा हो गया था। रेल सेवा का लोकार्पण से पूर्व संरक्षा आयुक्त की हरी झंडी मिलना अनिवार्य है। इसके तहत संरक्षा आयुक्त पीके बाजपेई स्पेशल ट्रेन से भिंड तक आए। वहां से आठ ट्रालियों पर इंजीनियरों के साथ सवार होकर ट्रैक का निरीक्षण किया। अपराह्न करीब एक बजे वे चंबल पुल पर आये यहां पिलर संख्या छह की पुरानी दरार जस की तस नजर आई। नदी में पानी होने से पिलर का पूर्ण निरीक्षण नहीं कर सके, इस पर उन्होंने आईआईटी कानपुर टीम की रिपोर्ट का अवलोकन किया। इसी के साथ ट्रैक पर अन्य खामियों को देखकर उनका पारा चढ़ गया । वे टीम के साथ उदी स्टेशन पर आए, वहां उन्होंने स्टेशन पर एएसएम कार्यालय का गहन निरीक्षण किया। सिंग्नल प्रणाली व अन्य उपकरणों के संबंध में विस्तृत जानकारी करते हुए उन्होंने इंजीनियर से कई सवाल किए। इंजीनियर अपने जवाबों से उनको संतुष्ट नहीं कर सके, इसके बाद वे भड़क गए और यहीं पर निरीक्षण का समापन करा दिया। इस दौरान उनकी विशेष ट्रेन उदी स्टेशन आ चुकी थी। जिसे उदी से भिंड की ओर वापस कराया गया। इस दौरान पत्रकारों से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि अभी यह प्रारंभिक निरीक्षण है, जो छोटी-मोटी खामियां मिली हैं उनको दूर करने के निर्देश दिए है। चंबल पुल के पिलर के संबंध में आईआईटी कानपुर की टीम ने जो जांच रिपोर्ट दी है आईआईटी जांच दल की फाइनल रिपोर्ट आ जाने पर ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने पर निर्णय लिया जायेगा। उसके पश्चात इंजीनियर हर स्थिति की रिपोर्ट तैयार करेंगे उसके पश्चात रेल मंत्रालय को रिपोर्ट प्रेषित की जायेगी।
O- दिनेश शाक्य