नई दिल्ली/लखनऊ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विश्व प्रसिद्ध बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (बीएचयू)की छात्राएं छेड़खानी के खिलाफ आंदोलनरत हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, जिन्हें गंगा ने बनारस बुलाया था, लंबे समय के बाद वाराणसी पहुंचे लेकिन आंदोलनरत इन गंगापुत्रियों से बिना मिले भाषण झाड़कर लौटकर दिल्ली आ गए।

फेसबुक पर निदा अहमद ने आंदोलनरत छात्राओं का एक वीडियोशेयर करते हुए निम्न टिप्पणी की -

“ये मैसेज बीएचयू के स्टूडेंट्स की तरफ़ से है...साथ की ज़रूरत है इन्हें। साथ दीजिए

बस आप लोगों से इतना निवेदन है कि आप अपने वालों से अपनी Facebook Twitter पर देश उठाया और देश की जनता को बताए कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के संसदीय क्षेत्र में छात्राएं अपने आप को असुरक्षित महसूस कर रही हैं आप कल सुबह से हम लोग यहां बैठे थे हम लोगों को यह लगाया था कि प्रधानमंत्री जी हमारे साथ आएंगे हमारे दुख में शामिल होंगे लेकिन वह बनारस में होते हुए भी दूसरा रास्ता बदल कर तुलसी मानस मंदिर में दर्शन करने चले जाते हैं लेकिन हमारी सुध लेने एक बार भी नहीं आते।”

उधर भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी)- भाकपा (माले) ने बीएचयू की छात्राओं के आंदोलन का समर्थन किया है।

पार्टी के पोलित ब्यूरो सदस्य रामजी राय ने एक बयान में कहा कि देश के प्रधानमंत्री के चुनाव क्षेत्र में छेड़खानी से परेशान छात्राएं दो दिन से विवि गेट पर धरना-प्रदर्शन कर रही हैं, लेकिन वाइस चांसलर उसे लगातार अनसुना कर रहे हैं। बल्कि पीड़ित छात्रा की शिकायत पर प्रोक्टोरियल बोर्ड के एक सदस्य का जवाब तो सदमा पहुंचाने वाला है। खुद प्रधानमंत्री भी शहर में मौजूद हैं, पर न्याय की गुहार लगा रही छात्राओं से मिलना तक उन्होंने जरूरी नहीं समझा।

कॉमरेड राय ने कहा कि यह हाल तब है, जब मोदीजी की सरकार ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा लगाती है। पर बीएचयू की घटना ने साफ कर दिया है कि यह नारा भी मोदी सरकार के अन्य नारों-वादों की तरह ही जुमला और खोखला है।

माले नेता ने कहा कि बेटियां अपनी लड़ाई खुद लड़ रही हैंऔर भाकपा (माले) उनकी मांगों का पूरी तरह से समर्थन करता है।