मुझे जलाया क्यों....
कुछ कहते नहीं बन रहा. यह दृश्य देखकर अपनी साँस भी भारी लग रही है. बस एक आह हो रही है.... नसें ऐंठ देने वाला हत्याकांड है यह. किसे दोष दें क्या कहें! कुछ कहते ही फलानी पार्टी के सिपहसालार चढ़ाई करने आ जाते हैं कि हमारे राममूर्ति वर्मा को क्यों कहा... अलानी पार्टी का होता तो न कहते!
इन फलानी अलानी पार्टियों के लोगों के शरीर में खून नहीं बहता, ये तो खुद ड्रैकुला हैं. ये लोगों का खून पीते हैं.पेट्रोल डालकर ज़िंदा जला देते हैं.
पुलिस इनकी
अफसर इनके
तो जगेंद्र का कौन था??
जगेंद्र तुमने इतनी बड़ी लड़ाई क्यों मोल ली??
जो बेच रहा है, उसे माफियागीरी करने देते. देशभक्ति क्या सिर्फ तुम्हारे हिस्से में आई है? हम सब केवल टीवी चैनल देख कर मनोरंजन करके ही भारत माता ज़िंदाबाद का नारा लगा के खुश हो लेते हैं. हम तो यहीं से कश्मीर मांगोगे चीर देंगे नारा लगाते हैं, और नम्बर वन वाले देशभक्त हो लेते हैं.
यह सब भयानक है! काम वाली देशभक्ति का ठेका जिन लोगों ने लिया है वे ज़िन्दगी भर संघर्ष करते रहते हैं और बाद में पुलिस की मौजूदगी में उन्हें पेट्रोल डालकर दाह कर दिया जाता है.
नाम वाली देशभक्ति वाले दिल्ली में फ़्लैट के मालिक होते हैं, अपना अखबार और चैनल चलाते हैं और करोड़ों पीट डालते हैं. बाद में राज्य सभा में भी जा सकते हैं.
पूरे देश के सामने यह हत्या हुई है. यह ब्यान व्हाटस एप्प से लेकर फेसबुक तक घूम रहा है.
युवा मुख्यमन्त्री जी, अब भी अगर थोड़ी दिलेरी बची है, अपनी साख की ज़रा भी चिंता है तो दोषी के खिलाफ अविलम्ब कार्रवाई कीजिए.
संध्या नवोदिता

Posted by Sandhya Navodita on Wednesday, June 17, 2015

संध्या नवोदिता, कवयित्री हैं।