मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर का मोदी सरकार को लेकर गंभीर आरोप
पिछले दो महीनों से जजों की नियुक्ति के आदेश जारी नहीं कर रही है सरकार
नई दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर ने एक सेमिनार में जो कहा है उससे केंद्र की मोदी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं।
न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर ने कहा कि सारी औपचारिकता पूरी कर देने के बावजूद सरकार <मोदी सरकार> पिछले दो महीनों से जजों की नियुक्ति के आदेश जारी नहीं कर रही है। उन्होंने जनता से अपील की इस मामले में कोर्ट के दखल की बजाए लोगों को सरकार के काम का ‘सामाजिक आंकलन’ करना चाहिए। बीती 27 फरवरी को जम्मू कश्मीर में विधिक सहायता कार्यक्रम में बोलते समय उन्होंने यह बात कही।
अंग्रेज़ी अखबार इण्डियन एक्सप्रेस में CJI T S Thakur calls for ‘social audit’ of govt’s performance शीर्षक से प्रकाशित समाचार के मुताबिक न्यायमूर्ति ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 1700 कानून समाप्त करने के वक्तव्य का हवाला देते हुए कहा -

“Now by that standard you will have 1700 laws repealed by the time he finishes his tenure,”

उन्होंने विश्वास जताया-

“I believe that he had already repealed some 300 laws…And another 1400 can be repealed.”

न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर ने कहा -

“you repeal them with one enactment…finish them…no problem. However, the challenge is not of repealing those laws which are obsolete, but the challenge is of enforcement of those laws which are on the statue book,’’

न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर ने कहा कि विभिन्न उच्च न्यायालयों में रिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ करने संबंधी कानून मंत्री का पत्र प्राप्त होने के बाद कॉलेजियम ने 150 जजों की नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव भेजा।
न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर ने कहा,

“We did not lose time because we realized that this is a major issue and we should not be seen wanting in doing what we ought to do immediately’’.

न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर ने कहा

“I can tell you today that there is not a single proposal pending with us. We have cleared all the proposals, but it is a different issue that the percentage of casualty has been very high because we have raised the bar higher.’’

उन्होंने कहा

“The 50 per cent that have been cleared are languishing with the government for the past two months.”

न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर ने देश की वंचित आबादी खासकर असंगठित क्षेत्रों के कामगारों के कल्याण की योजनाएं लागू न किए जाने पर कड़ा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि समय आ गया है, जब सरकारों के प्रदर्शन और कामकाज के आकलन की प्रक्रिया शुरू की जानी चाहिए।
न्यायमूर्ति टी एस ठाकुर ने कहा कि न्यायपालिका पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाने के आरोप अक्सर लगाए जाते हैं, लेकिन जब सरकारें वंचित तबके के प्रति अपने कानूनी दायित्व का निवर्हन करने में विफल साबित हो रही हैं, तो ऐसे में जरूरतमंद तबके के अधिकारों को लागू कराने में न्यायपालिका का हस्तक्षेप जायज है।
असंगठित क्षेत्र के कामगारों के कल्याण और गरीबी उन्मूलन की योजनाएं लागू न होने तथा जनजातियों के अधिकारों के हनन पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि गरीबी उन्मूलन की 30 योजनाएं हैं, लेकिन वे सिर्फ कागजों में हैं। असंगठित क्षेत्र के कल्याण की योजनाओं के उपकर की बड़ी राशि का इस्तेमाल नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि देश की 85 प्रतिशत से भी ज्यादा कामकाजी असंगठित क्षेत्रों से हैं और अर्थव्यवस्था में इनका योगदान 60 प्रतिशत से भी ज्यादा है लेकिन उनके काम के घंटे, कार्यस्थल की दशा और वेतन नियमित न होना तथा उनकी सामाजिक सुरक्षा की योजनाएं लागू न होना चिंता का विषय है। ऐसे में बुद्धिजीवी वर्ग को सरकार की अकर्मण्यता पर सवाल पूछना चाहिए।
इंडियन एक्सप्रेस की मूल खबर आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं –
http://indianexpress.com/article/india/india-news-india/there-needs-to-be-some-process-to-audit-govt-performance-cji-t-s-thakur/

Time has come to audit Modi government,s performance : Chief justice T.S.Thakur https://t.co/cBKvoFF60B via @timesofindia
— अनिल ठाकुर (@AnilThakur_) February 28, 2016

#ExpressFronPage | CJI T S Thakur calls for ‘social audit’ of govt’s performance | https://t.co/jYoHCLWlV5

— The Indian Express (@IndianExpress) February 28, 2016