पाश्चात्य अवधानों एवं सिद्धांतों से भारतीय यथार्थ को नहीं समझा जा सकता प्रो. विवेक कुमार, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के समाजिक पक्षधति अध्यायन केंडर में प्रोफेसर हैं और चर्चित समाजविज्ञानी हैं, उनसे सुनीता रतिका ने कई मुद्दों पर बातचीत की।

प्रश्न- जेएनयू से अपने संबंध के बारे में बताएं?

उत्तर: उत्तर भारत में 1980 के दशक तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रों में सिविल सेवा की परीक्षा के लिए बहुत मशहूर था। उत्तर भारत के लोगों का सपना होता है कि उनका बच्चा आईएएस बने। वे अपने बच्चों को सत्ताक के केंद्र में भेजना चाहते हैं। 1990 तक आते-आते लोग जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय को सिविल सेवा परीक्षा के कंपटीशन के लिए एक बेहतर विश्वविद्यालय मानने लगे। इससे वे अपने बच्चों को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में शिक्षा दिलाने के लिए उत्सुक होने लगे। मैं लिखने से हिंदी माध्यम से ए.ई. के करके जेएनयू आया था। वहां पर बी.ए. दो वर्ष का होता था और यहां पर बी.ए. की तीन वर्ष की डिग्री को ही मान्यता थी। अतः मैंने ए.ई. का प्रमाणपत्र लगाकर