त्रासदी है कि संसद ने जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय के सम्बंध में आज तक फैसला नहीं किया
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जम्मू। प्रो. भीमसिंह ने भारतीय संसद पर जोर देकर कहा है कि जो भयंकर गलतियां भारतीय नेताओं ने जम्मू-कश्मीर के विलय के सम्बंध में की हैं, उनको संसद ही सुलझा सकती है।
पैंथर्स सुप्रीमो प्रो. भीमसिंह ने वरिष्ठ पैंथर्स नेताओं की अपनी टीम के साथ पाकिस्तान पर लगी अन्तर्राष्ट्रीय सीमा पर साई, आर.एस.पुरा, सुचेतगढ़ और अन्य क्षेत्रों में अनेक जनसभाओं को सम्बोधित किया।
प्रो. भीमसिंह ने कांग्रेस और भाजपा और दूसरे राजनीतिक दलों पर आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर के प्रति जितनी भी संवैधानियां गलतियां संसद ने 1947 से लेकर आज तक की हैं, उन्हें तुरन्त सुलझाना अनिवार्य है, ताकि जम्मू-कश्मीर का विलय भारत के साथ संवैधानिक रूप से सम्पूर्ण हो सके।
प्रो. भीमसिंह ने कहा कि 577 रियासतों का भारत संघ में विलय कर दिया गया, यह क्या कारण था कि जम्मू-कश्मीर में राजशाही कायम रखी गयी। यह राजशाही 20 अगस्त, 1952 में जम्मू-कश्मीर की तथाकथित संविधान सभा ने उठाने का निर्णय लिया, जिसे ऐसे करने का अधिकार नहीं था। त्रासदी यह है कि संसद में जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय के सम्बंध में आज तक फैसला नहीं किया गया और जम्मू-कश्मीर को धारा-370 के दायरे में रखकर जम्मू-कश्मीर को भारत से संवैधानिक रूप से अलग रखा गया।
प्रो. भीमसिंह ने कहा कि भारत की स्थिरता और अखंडता को मजबूत करने के लिए जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन अत्यंत आवश्यक है ताकि जुड़वां राज्य स्थापित किये जा सकें, जिससे लद्दाख क्षेत्र अपनी केन्द्र शासित राज्य की मांग को उठा सके।
प्रो. भीमसिंह के साथ सुश्री अनीता ठाकुर, अशोक रंधावा, शाम गोरखा, एडवोकेट केसर परवीन शामिल थे।