भारत दौरे के तीसरे व अंतिम दिन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने सोमवार को संसद में जय हिंद और बहुत धन्यवाद जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर आम हिंदुस्तानियों का दिल तो बाग बाग कर दिया लेकिन एक मंझे हुए परंपरागत भारतीय व्यापारी की सौदागर की तरह मीठा बोलकर डंडी मारते हुए उन्होंने लॉलीपॉप तो कई दिए पर महत्वपूर्ण घोषणा एक भी नहीं की। और जो घोषणाएं की भी तो वह अमेरिका के हित में थीं और भारत को उनसे सिर्फ और केवल सिर्फ नुकसान ही होगा।
भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों के वोटों के बल पर और हनुमान जी की मूर्ति का आशीर्वाद लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति बनने के बाद पहली बार भारत आए ओबामा ने स्वागत के लिए भारतीयों को धन्यवाद दिया और भारत के बार-बार विश्वशक्ति होने व गाधीजी की शान में कसीदे भी पढ़े।
हम भले ही बहुत खुश हो रहे हों कि अमेरिकी राष्ट्रपति बराक हुसैन ओबामा ने धन्यवाद और जय हिन्द बोला, लेकिन ऐसा करके ओबामा भारत की इमोशनल ब्लैकमेलिंग कर गए। उनके इन दो बोल से भारत को क्या हासिल हुआ उल्टे ओबामा भारत से 50000 नौकरियां छीन कर अपने देश ले गए। भारत दौरे के बहाने ओबामा ने अपने मुल्क की राजनीति में अपनी गोटें फिट की हैं। ओबामा का यह दौरा तब हो रहा है, जब अर्थव्यवस्था की बुरी स्थिति को लेकर मतदाताओं में उपजे असंतोष से उनकी पार्र्टी को मध्यावधि चुनाव में मुंह की कहानी पडी है और तमाम दुष्प्रचार के बाओजूद निक्की हेले उनके उम्मीदवार को हराकर गवर्नर भी बन गयी.
ओबामा ने कहा कि भारत और पाकिस्तान, दोनों देश यदि चाहें तो तनाव कम करने में अमेरिका भूमिका निभाने को तैयार है ओबामा ने कहा कि कश्मीर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद है। उनका मानना था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम होना दोनों के हित में है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका इस समस्या के समाधान को थोप नहीं सकता। लेकिन इस भाषण से एक बात साफ हो गई कि भारत चाहे लाख परमाणु करार अमेरिका के साथ कर ले, उसे अमेरिका वह दर्जा कभी नहीं देगा जो पाकिस्तान को वह देता है। दूसरे यह एक सबक है कश्मीर के अलगाववादी ताक्तोक को, कि वोह समझ लें कि अमरीका की नज़र में सीन में केवल भारत और पाकिस्तान ही हैं और कश्मीर, भारत और पाकिस्तान के बीच ही वर्षों पुराना विवाद है इसमें हुर्रियत या अन्य अलगाववादी कहीं भी परिदृश्य में नहीं हैं.
फिर ओबामा के धन्यवाद और जयहिन्द पर हम क्यों लट्टू हुए जा रहे हैं। अपनी भारत यात्रा पर जाने से पहले ही ओबामा अमेरिका में घोषणा करके चले थे कि वह नए रो़जगार के अवसर पैदा करने जा रहे हैं। जाहिर है यह अवसर भारत के लिए नहीं बल्कि अमेरिका के लिए ही हैं।
अमेरिकी मीडिया भी ओबामा के भारत दौरे को कॉरपोरेट अमेरिका को मनाने की कवायद के रूप में देख रहा है। भारतीय मीडिया में अमेरिकी अखबारों की जो समीक्षा आ रही है उसके मुताबिक-
न्यूयार्क टाइम्स ने मुम्बई से एक रिपोर्ट में कहा है कि राष्ट्रपति ओबामा ने, अपनी डेमो्रे टिक र्र्पाी की चुनावी हार के बाद कॉरपोरेट अमेरिका को रिझाने के लिए शनिवार को एशिया का 10 दिवसीय दौरा शुरू किया।
इसी तरहवाशिंगटन पोस्ट ने लिखा है कि खराब अर्थव्यवस्था के राजनीतिक परिणाम का स्वाद चखने के बाद राष्ट्रपति ओबामा ने अमेरिका व भारत के बीच व्यापार ब़ाने के कई सारे उपायों की घोषणा की। एशिया में उनके दौरे अमेरिका में आर्थिक वृद्धि को ब़ावा देने पर व्यापक रूप से केंद्रित है।
वॉलस्ट्रीट जर्नल ने भी ओबामा इन इंडिया, मेक्स नाइस विद यूएस बिजनेस शीर्षक वाली एक रिपोर्ट में लिखा है कि ओबामा के लिए अपना घरेलू लक्ष्य सर्वोपरि है, वह लक्ष्य यह है कि उन्हें व्यापारिक क्षे के साथ खराब हुए रिश्ते को दुरूस्त करना है।