जिसके पास उधार के उम्मीदवार, उसकी नहीं बनेगी सरकार- महागठबंधन आगे
जिसके पास उधार के उम्मीदवार, उसकी नहीं बनेगी सरकार- महागठबंधन आगे
त्रिशंकु विधान सभा अब नहीं होगी। अब तो सीधा संघर्ष है एनडीए और महागठबंधन में। प्रतीक्षा करें बता सकूंगा कि कौन 20 कौन 19... अभी तो ऊपरी तौर पर महागठबंधन आगे। जिसके पास उधार के उम्मीदवार , उसकी नहीं बनेगी सरकार
बात बहुत पुरानी तो नहीं, उसी बात ने तो एनडीए उर्फ बिहारी भाजपाई की नींद उड़ाई थी तो लालू – नीतीश के मन में गठबंधन की पुरानी कहानी जगाई थी।
दोनों नरेंद्र मोदी के अभियान से पिटे पिटाए थे। तब सामने था बिहार विधान सभा के 10 चुनाव क्षेत्रों का उपचुनाव, इसमें से कुछ क्षेत्रों के विधान सभासद लोकसभा सदस्य हो चुके थे, कुछ ने भाजपा से इस्तीफा दे कर विधान सभा की सीटें खाली की थीं।
नौटंकी- मोदी की नौटंकी का अहसास बिहार को वोटर को हो चुका था। नीतीश कुमार का अहंकार अवसाद में बदल चुका था।
तभी लालू – नीतीश- कांग्रेस में समझौता हुआ। लगभग उसी समझौते में तय हो गया था कि नीतीश अपनी अकड़ के साथ नहीं, जमीनी हकीकत के साथ समझौता करेंगे। 10 में से 4 राजद को, 4 जदयू को और 2 कांग्रेस को मिलीं।
भाजपा ने 1 लोजपा को दे दी. चुनाव हुआ. उस समय आज के समय की तरह नौटंकी बाज मोदी की लोकप्रियता कम न हुई थी। नतीजों में भाजपा को 6 विधान सभा क्षेत्र मिले। दो उधार के उम्मीदवार थे।
राजद, जदयू और कांग्रेस के पास नहीं थे। राजद को 3, जदयू को 2 और कांग्रेस को 1 मिलीं।
उसी सूत्र के आधार पर अभी का समझौता हुआ।
राजनीति का खेल यहां से शुरू होता है। और इस खेल में क्या होगा, यह तो चुनाव के बाद पता चलेगा – अभी तो गठबंधन आगे है।
जुगनू शारदेय


