तराई जन आन्दोलन-पिछ्ले तीस सालों में बाढ़ कटान और विस्थापन की समस्या बद से बदतर होती गई
तराई जन आन्दोलन-पिछ्ले तीस सालों में बाढ़ कटान और विस्थापन की समस्या बद से बदतर होती गई
तराई जन आन्दोलन
लखीमपुर खीरी, 24 मई। तराई क्षेत्र में बाढ़ और कटान पर प्रभावी रोक, विस्थापितों के पुनर्वास, जल भराव की समस्या का स्थाई समाधान, पट्टेदारों को संक्रमणीय भूमिधरी का अधिकार आदि मुद्दों को लेकर शुरू किये गये तराई जन आन्दोलन के पहले चरण में आज ईसानगर विकास खण्ड के जंगलीनाथ बाग में पहला तराई जन समागम आयोजित किया गया। समागम में खमरिया और आसपास क्षेत्रों के सैकडों लोगो ने भागीदारी की जिसमें महिलाओं ने भी बड़ी संख्या में अपनी भागीदारी दर्ज़ करायी।
तराई जन समागम को सम्बोधित करते हुए तराई जन आन्दोलन के प्रणेता रामेन्द्र जनवार ने क्षेत्र की समस्याओं पर विस्तार से प्रकाश डाला और कहा कि पिछ्ले तीस सालों में बाढ़ कटान और विस्थापन की समस्या बद से बदतर होती गई है। उन्होने कहा कि केन्द्र व राज्य सरकारें अगर इस समस्या के स्थाई समाधान के लिये कोई ठोस पहल नहीं करती हैं तो तराई वासियों को एकजुट होकर अलग तराई राज्य की मांग करनी चाहिये।
तराई जन आन्दोलन की कोर कमेटी के सदस्य उत्कर्ष अवस्थी ने जन समागम को सम्बोधित करते हुए कहा कि हमारे ऊपर तराई जन आन्दोलन संगठित करने की बहुत गम्भीर जिम्मेदारी डाली गई है लेकिन आज जिस तरह से आप लोगो का उत्साह और सहयोगात्मक रवैया दिखायी दिया है उसके आधार पर हम विश्वास पूर्वक कह सकते हैं कि बाढ और कटान की भयावह स्थिति आते-आते उत्तर प्रदेश की तराई के पीलीभीत से कुशीनगर तक सभी 11 जिलो में हम तराई के लोगो को एकजुट कर केन्द्र व राज्य सरकारों को अपनी ताकत दिखायेंगे और यदि इन सरकारों ने ठोस समाधान के प्रयास नहीं किये तो अलग तराई राज्य की मांग बुलन्द होने से कोई रोक नहीं सकेगा।
उत्कर्ष अवस्थी ने कहा कि जन समागमों का यह क्रम निरंतर जारी रहेगा और सभी प्रभावित क्षेत्रों में जन समागम करने के बाद पद यात्राओं का दौर शुरू किया जायेगा। यह तराई जन आन्दोलन का दूसरा चरण होगा। उन्होंने उपस्थित जनो से सवाल किया कि यदि सरकारें इस समस्या का समाधान नहीं करती हैं तो क्या आप सभी लोग अलग तराई राज्य के गठन की मांग का समर्थन करेंगे, इस पर उपस्थित जन समुदाय ने बहुत उल्लास के साथ तलिया बजाकर और दोनों हाथ ऊपर उठाकर उत्कर्ष अवस्थी के प्रस्ताव का समर्थन किया।
महिलाओं की बढ़ चढ़ कर हुई प्रतिभागिता में सक्रिय योगदान करने वाली महिला नेत्री सुनीला रावत ने अपने सम्बोधन में कहा कि तराई जन आन्दोलन में तराई क्षेत्र की महिलाएं भी कन्धे से कन्धा और कदम से कदम मिलाकर इस आन्दोलन में अपनी भागीदारी दर्ज़ करांयेगी। लखीमपुर से तराई जन समागम में भाग लेने के लिये गये “युवा” के सन्योजक शशांक शर्मा ने कहा कि तराई जन आन्दोलन में क्षेत्र के छात्र व नौजवान पूरी तरह से सहभागिता करेगे और इस आन्दोलन को अंजाम तक पहुचाने में बढ चढकर अपनी भागीदारी दर्ज़ करायेगें।
तराई जन आन्दोलन के कोर कमेटी के सदस्य डा0 बृजबिहारी ने कार्यक्रम का संचालन किया और उन्होंने विभिन्न समस्याओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अब किसी भी हालत में तराई क्षेत्र की उपेक्षा बर्दाश्त नहीं की जायेगी कीमते चाहे कुछ भी चुकानी पडे। इस अवसर पर डा0 रामबली ने लोकगीतो को सुनकर समां बांधा।


