धीरे-धीरे अघोषित तानाशाही की ओर बढ़ रहा है हमारा लोकतंत्र
धीरे-धीरे अघोषित तानाशाही की ओर बढ़ रहा है हमारा लोकतंत्र
जीपीओ को काकोरी शहीदों का स्मारक बनाने की मांग
काकोरी शहीदों की याद में नागरिक परिषद ने किया श्रंद्धांजलि सभा का आयोजन
लखनऊ 19 दिसंबर 2014। काकोरी के विद्रोही शहीदों की याद में हजरतगंज में जीपीओ स्थित काकोरी शहीद स्तंभ पर नागरिक परिषद व विभिन्न सामाजिक व राजनीतिक संगठनों ने श्रंद्धाजलि सभा का आयोजन किया। काकोरी के शहीदों को श्रद्धाजलि देते हुए सभी ने एक स्वर में जीपीओ को शहीद स्मारक घोषित करने की मांग की। कार्यक्रम की शुरुआत रंगकर्मी महेश देवा के नेतत्व में जन कलाकार परिषद की गायक टोली ने क्रांतिकारी गीतों से किया।
काकोरी के शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए वक्ताओं ने कहा कि लखनऊ जीपीओ (अग्रेंजीकाल के रिंक थियेटर) में अग्रेजों ने अदालत लगाकार हमारे क्रांतिकारी शहीदों को सजाएं सुनाईं, उन्हें फांसी पर चढ़ाने के लिए यहीं पर अदालती नाटक खेला गया था। इसलिए यह स्थान आजादी के आंदोलन का स्मारक है। लखनऊ के नागरिक इस ऐतिहासिक इमारत को आजादी की लड़ाई का स्मारक, शहीद स्मृति लाइब्रेरी, शोध केन्द्र, सभा-सेमीनार-जनआंदोलन व सत्याग्रह केन्द्र के रुप में देखना चाहते हैं। इसलिए हम मांग करते हैं कि केन्द्र सरकार इसे जल्द से जल्द खाली करवाते हुए इस इमारत को आजादी की लड़ाई का स्मारक घोषित करते हुए खाली कर इसे प्रदेश की जनता को सौंप दे।
नागरिक परिषद के नेता रामकृष्ण ने कहा कि अपने शहीदों को जानना वास्तव में खुद को जानना है क्योंकि आज हम जो कुछ भी हैं उन्हीं की शहादत के बदौलत हैं। शहादत, किसी के भी जीवन की सबसे बड़ी राजनीतिक एंव मानवीय कार्रवाई है। इसके पीछे की सोच के साथ जुड़कर ही हम उस विरासत के सच्चे वारिस बनते हैं। उनका वारिस बनकर ही हम आज देश और आम जनता के सामने खड़ी की गई चुनौतियों का सामना कर सकते हैं। जनजागरुकता अभियान के संयोजक कॉमरेड सीबी सिंह ने कहा कि हमारा लोकतंत्र धीरे-धीरे अघोषित तानाशाही की ओर बढ़ रहा है। अग्रेंजी हुकूमत से भी खतरनाक तानाशाही की ओर। इनकी लूट और लालच से पैदा हुए आर्थिक संकटों का इस हूकूमत के पास एक ही इलाज है- तानाशाही। जन संस्कृति मंच के कौशल किशोर ने कहा कि केन्द्र में बैठे भारतीय संस्कृति के तथाकथित लंबरदार पूरे भारतीय समाज की एकता की जड़े खोद रहे हैं। आजादी की विरासत को मिटाकर उसे एक सांप्रदायिक रुप देने की कोशिश कर रहे हैं। सोशलिस्ट पार्टी के नेता ओंकार सिंह ने कहा कि वर्तमान ढांचे में सरकारों का काम है- कानून बनाकर संगठित तरीके से आम नागरिकों से अग्रेजों की तरह वसूली करना और सरकारी खजाने का आपस में बटवारा कर लेना। कानूनी-गैरकानूनी, नैतिक-अनैतिक दोनों तरीकों से।
सभा को रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मोहम्मद शुऐब , जनजागरुकता अभियान के संयोजक कॉमरेड सीबी सिंह, सोशलिस्ट पार्टी के ओंकार सिंह, इप्टा के राकेश, जन संस्कृति मंच के कौशल किशोर, भगवान स्वरुप कटियार, आर के सिंह, सैयद मोइद, जैद अहमद फारुकी, ऑल इंडिया वर्कर्स काउंसिल के ओपी सिन्हा, सतेन्द्र, शाहनवाज आलम, छात्र नेता वीरेन्द्र त्रिपाठी, ज्योती राय, रोडवेज कर्मचारी नेता होमेन्द्र मिश्रा, वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण एडवोकेट, लता राया, रीता सिंह, वरिष्ठ रंगकर्मी आदियोग, सामाजिक कार्यकर्ता चन्द्र भूषण तिवारी, रीतेश चन्द्रा, अखिलेश सक्सेना, राजीव यादव आदि उपस्थित रहे। सभा का संचालन वर्कर्स काउंसिल के अध्यक्ष ओपी सिन्हा ने किया और अध्यक्षता नागरिक परिषद के वरिष्ठ नेता के के शुक्ला ने किया। इस अवसर पर नागरिक परिषद तथा विभिन्न सामाजिक-राजनीतिक संगठनों की ओर से काकोरी के क्रांतिकारी शहीदों को याद करते हुए एक दस सूत्रीय आंदोलन के मुद्दों को लेकर जनजागरुकता के लिए पर्चा वितरण किया गया।


