खालिद की हत्या पर सवाल उठाने वालों पर फर्जी मुकदमे लाद रही सरकार - रिहाई मंच
खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी के लिये तेरहवें दिन भी जारी रहा रिहाई मंच का अनिश्चित कालीन धरना
लखनऊ 3 जून 2013/ सूत्रों के हवाले से खबर है कि सीरियल बम विस्फोटों के कथित आरोपी मौलाना खालिद मुजाहिद और तारिक कासमी की फर्जी गिरफ्तारी पर बने आर डी निमेष आयोग की रिपोर्ट (जिसे कुछ सामाजिक कार्यकर्ता पहले ही उजागर कर चुके हैं और जिसमें इस गिरफ्तारी को संदिग्ध बताया गया है) कल केबिनेट की बैठक में सरकार स्वीकर कर सकती है। लेकिन आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों की रिहाई के लिये आन्दोलनरत रिहाई मंच की माँग है कि अब निमेष कमीशन की रिपोर्ट नहीं बल्कि सरकार उस पर एक्शन टेकन रिपोर्ट जारी करे तथा मौलाना खालिद मुजाहिद के हत्यारे पुलिस व आईबी अधिकारियों की गिरफ्तारी कर आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को तत्काल रिहा करे। इन माँगों को लेकर रिहाई मंच का अनिश्चित कालीन धरना तेरहवें दिन भी जारी रहा।

रिहाई मंच के प्रवक्ताओं ने बताया कि भारतीय मूल के ब्रिटेन के मुस्लिम नागरिकों के संगठन काउंसिल ऑफ इंडियन मुस्लिम्स (यूके) ने रिहाई मंच के अनिश्चित कालीन धरने का समर्थन पत्र भेजकर किया है। अनिश्चित कालीन धरने के तेरहवें दिन मुस्लिम संघर्ष मोर्चा के आफताब अहमद खान और आजमगढ़ से गिरफ्तार हबीब के भाई अबू आमिर क्रमिक उपवास पर रहे।

रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शुएब ने कहा कि रिहाई मंच के लोगों ने 18 मार्च 2013 को ही आरडी निमेष आयोग की रिपोर्ट को जनहित में सार्वजनिक कर दिया था, पर सरकार ने अब तक इस पर कोई कार्यवाई रिपोर्ट (एक्शन टेकन रिपोर्ट) जारी नहीं की। जो यह बताता है कि दोषी पुलिस कर्मियों को बचाने में पूरा सरकारी अमला लगा हुआ है। उन्होंने कहा कि सरकार खालिद की हत्यारे पुलिस अधिकारियों को तो गिरफ्तार नहीं कर रही है लेकिन इस हत्या पर सवाल उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं पर फर्जी मुकदमें लाद रही है, जिसकी ताजा नजीर इलाहाबाद के जावेद मुहम्मद और इशरार नियाजी पर लगया गया शांति भंग का फर्जी मुकदमा है, जिसमें उन पर आरोप है कि वो खालिद की हत्या पर सवाल उठाने वाले पर्चे बाँटे।

इंडियन नेशनल लीग के राष्ट्रीय अध्यक्ष मोहम्मद सुलेमान ने कहा कि पिछले दो दशक से मुसलमानों ने सपा-बसपा जैसी पार्टियों जिन्होंने मुसलमानों को एक वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल किया और जब भी मुस्लिम समाज पर कोई भी बड़ी विपत्ती आय तो इन लोगों ने सिर्फ बहुसंख्यक साम्प्रदायिक वोटों के खातिर मुस्लिम समाज को न्याय से वंचित करने की कोशिश की, जिसकी ताजा मिसाल खालिद मुजाहिद हत्या प्रकरण की है, जिसमें सपा ने अबू आसिम आजमी का इस्तेमाल किया है। ऐसे दौर में मुस्लिम समाज को सेक्यूलरिज्म का मुखौटा ओढ़े राजनीतिक पार्टियों की हकीकत समझते हुये उनके बहकावे से बाहर आकर न्याय के सवाल के लिये चल रहे राजनीतिक आन्दोलन में शिरकत करनी होगी।

अनिश्चित कालीन धरने को समर्थन करने दिल्ली से आये मानवाधिकार संगठन एपीसीआर के राष्ट्रीय संयोजक एखलाक अहमद और अबू बकर ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आतंकवाद के नाम पर कैद निर्दोष युवकों का सवाल देश में बड़ा राजनीतिक सवाल बन के उभरा है, लेकिन ठीक उसके विपरीत यूपी में पिछले छह सालों से आतंकवाद के नाम पर कैद निर्दोष यवकों को न तो जमानत मिली है और न ही मुकदमे की कार्यवाही पूरी हुयी है, जो यह साबित करता है कि यहाँ की न्यायपालिका में साम्प्रदायिक तत्व किस कदर हावी हो गये हैं। अगर न्याय पालिका सही से अपना कर्तव्य निभाती तो आज खालिद की हत्या नहीं होती बल्कि वो जेल से बाहर आ गया होता।

अनिश्चित कालीन धरने के समर्थन में आये पूर्व मन्त्री कौशल किशोर, राष्ट्रीय भागीदारी आन्दोलन के पीसी कुरील, अखिल भारतीय अनुसूचित जाति जन जाति परिसंघ के भवरनाथ पासवान और पिछड़ा वर्ग महासंघ के एहसानुल हक मलिक ने कहा कि खालिद के इंसाफ की लड़ाई सिर्फ हत्या में शामिल कुछ पुलिस अधिकारियों को सजा दिलाने से ही नहीं इस पूरे मनुवादी तन्त्र को उखाड़ फेंकने से होगा। उनके संगठन इस पूरे आन्दोलन मे रिहाई मंच के साथ रहेंगे क्योंकि खालिद की हत्या भी इसी ब्राहमणवादी निजाम ने करायी है।

अनिश्चित कालीन धरने में सीतापुर के बशीर और शकील जिन्हें आतंकवाद के नाम पर सपा हुकूमत में पिछले साल पकड़ा गया के परिजन जैनब खातून, आमिना खातून, उमर, जावेद और जुनैद भी धरने में शामिल हुये।

धरने को सम्बोधित करते हुये सीतापुर के इशहाक ने कहा कि उन्होंने पिछले साल 16 मई को अबू आसिम आजमी के साथ वो सपा के प्रवक्ता राजेन्द्र चौधरी से मिले। उन लोगों ने उन्हें भरोसा दिलाया कि सपा हुकूमत ने वादा किया है कि आतंकवाद के नाम पर कैद बेगुनाहों को रिहा करवायेंगे। पर आज एक साल बीत जाने के बाद भी सरकार ने हमारी कोई मदद नहीं की।

धरने का संचालन रिहाई आजमगढ़ के प्रभारी मसीहुद्दीन संजरी ने किया। धरने को रिहाई मंच के अध्यक्ष एडवोकेट मोहम्मद शुएब, तारिक शफीक, मो0 साकिब, आरिफ नसीम, सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडे, अबूजर, आफताब खान, सोशलिस्ट फ्रंट के मो0 आफाक, मौलाना कमर सीतापुरी, स्मार्ट पार्टी के हाजी फहीम सिद्की, कमर इरशाद, शहजादे मंसूर, मुस्लिम मोर्चा के अबू जर, भारतीय एकता पार्टी के सैयद मोईद, शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने संबोधित किया।